इंडिया गेट के 12 रोचक तथ्य: किसकी याद में बना और कब
एडविन लुटियंस का बनाया 42 मीटर ऊँचा इंडिया गेट पहले विश्व युद्ध के शहीद भारतीय सैनिकों की याद में है। अमर जवान ज्योति, राष्ट्रीय युद्ध स्मारक और कर्तव्य पथ — पूरी जानकारी।
रोहित टंडन · 7 अक्टूबर 2026 · 3 मिनट
नई दिल्ली के बीचों-बीच खड़ा इंडिया गेट देश के सबसे पहचाने जाने वाले स्मारकों में से एक है। शाम को रोशनी में नहाया यह स्मारक घूमने की जगह भी है और देश के वीर सैनिकों को श्रद्धांजलि देने का स्थान भी। आइए जानते हैं इसके 12 रोचक तथ्य।
इतिहास
- युद्ध स्मारक: इंडिया गेट का मूल नाम "ऑल इंडिया वॉर मेमोरियल" था। इसे पहले विश्व युद्ध (1914–1918) और तीसरे आंग्ल-अफ़ग़ान युद्ध (1919) में शहीद हुए ब्रिटिश भारतीय सेना के सैनिकों की याद में बनाया गया।
- नींव: इसकी नींव 10 फ़रवरी 1921 को ड्यूक ऑफ़ कनॉट ने रखी।
- उद्घाटन: लगभग दस साल के निर्माण के बाद 12 फ़रवरी 1931 को तत्कालीन वायसराय लॉर्ड इरविन ने इसका उद्घाटन किया — उसी समय नई दिल्ली को राजधानी के रूप में औपचारिक रूप से शुरू किया गया।
- वास्तुकार: इसे ब्रिटिश वास्तुकार एडविन लुटियंस ने डिज़ाइन किया, जिन्होंने राष्ट्रपति भवन समेत नई दिल्ली के बड़े हिस्से की योजना बनाई थी।
बनावट
- ऊँचाई: इंडिया गेट लगभग 42 मीटर ऊँचा है।
- पत्थर: इसे लाल और हल्के पीले बलुआ पत्थर तथा ग्रेनाइट से बनाया गया है।
- शहीदों के नाम: स्मारक की दीवारों पर 13,000 से ज़्यादा सैनिकों के नाम खुदे हैं।
- पेरिस से तुलना: इसका डिज़ाइन विजय-तोरण (ट्रायम्फल आर्च) शैली का है, इसलिए इसकी तुलना अक्सर पेरिस के "आर्क डी ट्रायम्फ़" से की जाती है।
क्या आप जानते हैं? 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के बाद इंडिया गेट के नीचे "अमर जवान ज्योति" जलाई गई थी। जनवरी 2022 में इसकी लौ को पास ही बने राष्ट्रीय युद्ध स्मारक की ज्योति में मिला दिया गया।
आज का इंडिया गेट
- राष्ट्रीय युद्ध स्मारक: इंडिया गेट के पास 25 फ़रवरी 2019 को राष्ट्रीय युद्ध स्मारक का उद्घाटन हुआ, जिसमें आज़ादी के बाद देश की रक्षा में शहीद हुए सैनिकों के नाम दर्ज हैं।
- नेताजी की प्रतिमा: इंडिया गेट के पास की छतरी (कैनोपी) में सितंबर 2022 में नेताजी सुभाष चंद्र बोस की ग्रेनाइट की विशाल प्रतिमा स्थापित की गई।
- कर्तव्य पथ: राष्ट्रपति भवन से इंडिया गेट तक जाने वाले राजपथ का नाम 2022 में बदलकर कर्तव्य पथ कर दिया गया।
- गणतंत्र दिवस परेड: हर साल 26 जनवरी की परेड कर्तव्य पथ से होकर इंडिया गेट के पास से गुज़रती है।
युद्ध स्मारक क्यों बनाए जाते हैं?
युद्ध स्मारक हमें याद दिलाते हैं कि देश की सुरक्षा और शांति की क़ीमत सैनिकों ने अपने जीवन से चुकाई है। ये स्मारक आने वाली पीढ़ियों को उनके साहस और बलिदान की कहानी सुनाते हैं। दुनिया भर में ऐसे स्मारकों पर विशेष दिनों में श्रद्धांजलि दी जाती है। भारत में 15 जनवरी को सेना दिवस और 26 जुलाई को कारगिल विजय दिवस पर शहीदों को ख़ास तौर पर याद किया जाता है।
घूमने जाएँ तो
इंडिया गेट के चारों ओर फैले हरे-भरे लॉन शाम को परिवारों से भरे रहते हैं। राष्ट्रीय युद्ध स्मारक में शाम को होने वाला समारोह और शहीदों की वीरता गाथाएँ देखना बच्चों के लिए प्रेरणादायक अनुभव है। पास ही राष्ट्रीय संग्रहालय और प्रधानमंत्री संग्रहालय भी देखे जा सकते हैं।
परीक्षा के लिए एक नज़र में
- वास्तुकार: एडविन लुटियंस · नींव: 1921 · उद्घाटन: 1931 · ऊँचाई: लगभग 42 मीटर
- अमर जवान ज्योति: 1972 से · राष्ट्रीय युद्ध स्मारक: 2019
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स्रोत
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