भारत का पहला उपग्रह आर्यभट — कब, कहाँ से और कैसे भेजा गया
19 अप्रैल 1975 को भेजा गया आर्यभट भारत का पहला उपग्रह था। जानिए इसे किसने बनाया, किस रॉकेट से गया और इसका नाम आर्यभट क्यों रखा गया।
रोहित टंडन · 4 अक्टूबर 2026 · 3 मिनट
आज भारत चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव तक पहुँच चुका है और मंगल की कक्षा में पहली ही कोशिश में यान भेज चुका है। लेकिन इस लंबी यात्रा की शुरुआत 1975 में एक छोटे-से उपग्रह से हुई थी — आर्यभट। यह भारत का पहला उपग्रह था, जिसे पूरी तरह भारतीय वैज्ञानिकों ने डिज़ाइन किया और बनाया।
मुख्य तथ्य एक नज़र में
| प्रक्षेपण की तारीख़ | 19 अप्रैल 1975 |
|---|---|
| कहाँ से | कापुस्तिन यार, तत्कालीन सोवियत संघ |
| रॉकेट | सोवियत कॉसमॉस-3एम |
| बनाने वाले | भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो), बेंगलुरु |
| वज़न | लगभग 360 किलोग्राम |
| आकार | 26 सतहों वाला बहुफलक, जिस पर सौर सेल लगे थे |
| नाम | 5वीं सदी के महान गणितज्ञ और खगोलशास्त्री आर्यभट के सम्मान में |
आर्यभट को क्यों बनाया गया?
1970 के दशक की शुरुआत में भारत के पास न तो उपग्रह बनाने का अनुभव था और न ही उसे अंतरिक्ष में भेजने वाला रॉकेट। इसरो का लक्ष्य था कि भारतीय इंजीनियर पहले एक उपग्रह बनाना, जाँचना और अंतरिक्ष में चलाना सीखें। सोवियत संघ के साथ हुए समझौते के तहत भारत ने उपग्रह बनाया और सोवियत संघ ने उसे अपने रॉकेट से कक्षा में पहुँचाया। उपग्रह पर एक्स-रे खगोलविज्ञान, सौर भौतिकी और पृथ्वी के ऊपरी वायुमंडल (एरोनॉमी) से जुड़े प्रयोग रखे गए थे।
इस परियोजना का नेतृत्व प्रसिद्ध अंतरिक्ष वैज्ञानिक प्रो. उडुपी रामचंद्र राव ने किया था। उपग्रह बेंगलुरु के पीण्या इलाक़े की एक साधारण औद्योगिक इमारत में बनाया गया था।
अंतरिक्ष में क्या हुआ?
आर्यभट सफलतापूर्वक कक्षा में पहुँचा और भारत अंतरिक्ष में अपना उपग्रह रखने वाले देशों में शामिल हो गया। कुछ ही दिनों बाद बिजली की आपूर्ति में गड़बड़ी के कारण इसके प्रयोग बंद हो गए, लेकिन तब तक इसरो ने वह सब सीख लिया था जिसके लिए इसे भेजा गया था — उपग्रह का डिज़ाइन, परीक्षण, ज़मीन से नियंत्रण और डेटा प्राप्त करना। आर्यभट लगभग 17 साल कक्षा में घूमता रहा और 10 फ़रवरी 1992 को पृथ्वी के वायुमंडल में लौटकर नष्ट हो गया।
क्या आप जानते हैं? 1976 से 1997 तक छपे ₹2 के नोट के पीछे आर्यभट उपग्रह का चित्र छपा होता था।
आर्यभट के बाद: भारत के शुरुआती उपग्रह
- भास्कर-1 (1979): पृथ्वी अवलोकन के लिए भारत का पहला प्रायोगिक उपग्रह।
- रोहिणी (1980): पहला उपग्रह जिसे भारत के अपने रॉकेट SLV-3 ने कक्षा में पहुँचाया — इस अभियान के परियोजना निदेशक डॉ. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम थे।
- एप्पल (APPLE, 1981): भारत का पहला प्रायोगिक संचार उपग्रह।
नाम के पीछे की कहानी
आर्यभट (जन्म 476 ई.) ने अपनी रचना आर्यभटीय में बताया था कि पृथ्वी अपनी धुरी पर घूमती है, और उन्होंने π (पाई) का बहुत सटीक मान दिया था। भारत के पहले उपग्रह का नाम उन्हीं के नाम पर रखकर देश ने अपनी प्राचीन वैज्ञानिक परंपरा को आधुनिक अंतरिक्ष युग से जोड़ा।
और जानने के लिए डॉ. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम की प्रोफ़ाइल देखें, या कक्षा 5 का सौरमंडल क्विज़ खेलें।
स्रोत
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