भाई दूज की कथा: यम-यमुना की कहानी और परंपराएँ
भाई दूज दिवाली के दो दिन बाद मनाया जाता है। जानिए यम और यमुना की कथा, तिलक की परंपरा और देश के अलग-अलग हिस्सों में इसके नाम।
रोहित टंडन · 14 अक्टूबर 2026 · 4 मिनट
दिवाली के पाँच दिनों के उत्सव का आख़िरी दिन है भाई दूज — भाई-बहन के प्रेम का त्योहार। यह कार्तिक महीने के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाया जाता है, इसलिए इसे "यम द्वितीया" भी कहते हैं। इस दिन बहनें भाई के माथे पर तिलक लगाती हैं, आरती करती हैं और उसकी लंबी उम्र की कामना करती हैं; भाई बदले में बहन को उपहार देते हैं और उसकी रक्षा का वचन देते हैं।
यम और यमुना की कथा
पौराणिक कथा के अनुसार सूर्यदेव की संतान यमराज और यमुना भाई-बहन थे। यमुना अपने भाई से बहुत प्रेम करती थीं और बार-बार उन्हें अपने घर भोजन के लिए बुलाती थीं, लेकिन मृत्यु के देवता यमराज अपने काम में इतने व्यस्त रहते थे कि जा नहीं पाते थे। आख़िरकार कार्तिक शुक्ल द्वितीया के दिन यमराज अपनी बहन के घर पहुँचे। यमुना ने ख़ुशी-ख़ुशी उनका तिलक किया, आरती उतारी और प्रेम से भोजन कराया।
प्रसन्न होकर यमराज ने बहन से वरदान माँगने को कहा। यमुना ने माँगा कि हर साल इस दिन जो भाई अपनी बहन के घर जाकर उसका आतिथ्य स्वीकार करे, उसे यम का भय न रहे। यमराज ने "तथास्तु" कहा — तभी से यह दिन भाई दूज के रूप में मनाया जाता है।
श्रीकृष्ण और सुभद्रा की कथा
एक और कथा के अनुसार नरकासुर का वध करने के बाद श्रीकृष्ण अपनी बहन सुभद्रा से मिलने गए। सुभद्रा ने दीये जलाकर, फूलों से स्वागत करके और तिलक लगाकर अपने भाई का अभिनंदन किया। इसे भी भाई दूज की परंपरा से जोड़ा जाता है।
क्या आप जानते हैं? भाई दूज के दिन मथुरा के विश्राम घाट पर भाई-बहन साथ में यमुना नदी में स्नान करते हैं। मान्यता है कि इस दिन यमुना स्नान का विशेष महत्व है।
अलग-अलग नाम, एक भावना
| क्षेत्र | नाम |
|---|---|
| उत्तर भारत | भाई दूज, भैया दूज, यम द्वितीया |
| महाराष्ट्र, गोवा | भाऊबीज |
| पश्चिम बंगाल | भाई फोंटा |
| नेपाल | भाई टीका (तिहार उत्सव का आख़िरी दिन) |
नेपाल में बहनें भाइयों के माथे पर सात रंगों का टीका लगाती हैं और उन्हें गेंदे की माला पहनाती हैं। बंगाल में बहनें चंदन से भाई के माथे पर फोंटा (तिलक) लगाते हुए उसकी रक्षा का मंत्र पढ़ती हैं।
भाई दूज कैसे मनाते हैं
- बहन थाली में रोली, अक्षत (चावल), दीया और मिठाई सजाती है।
- भाई को आसन पर बैठाकर तिलक लगाया जाता है और आरती उतारी जाती है।
- बहन अपने हाथों से भाई को भोजन कराती है।
- भाई बहन को उपहार देता है और उसकी हर स्थिति में सहायता का वचन देता है।
- कायस्थ समाज में इसी दिन भगवान चित्रगुप्त की पूजा और क़लम-दवात की पूजा भी होती है।
भाई दूज और रक्षा बंधन में अंतर
दोनों त्योहार भाई-बहन के प्रेम के हैं, पर उनकी परंपराएँ अलग हैं। रक्षा बंधन श्रावण पूर्णिमा को मनाया जाता है, जिसमें बहन भाई की कलाई पर राखी बाँधती है। भाई दूज कार्तिक शुक्ल द्वितीया को होता है, जिसमें तिलक और भाई का बहन के घर जाकर भोजन करना मुख्य है।
मुख्य बिंदु
- भाई दूज कार्तिक शुक्ल द्वितीया को, दिवाली के दो दिन बाद मनाया जाता है।
- इसकी मुख्य कथा यमराज के अपनी बहन यमुना के घर जाने की है।
- महाराष्ट्र में इसे भाऊबीज, बंगाल में भाई फोंटा और नेपाल में भाई टीका कहते हैं।
- बहन तिलक लगाकर आरती करती है और भाई को भोजन कराती है।
- रक्षा बंधन में राखी, भाई दूज में तिलक मुख्य परंपरा है।
दिवाली उत्सव के बाक़ी दिनों के बारे में पढ़ें: दिवाली क्यों मनाई जाती है और दिवाली के रोचक तथ्य।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
भाई दूज कब मनाया जाता है?
कार्तिक शुक्ल द्वितीया को, यानी दिवाली के दो दिन बाद। तिथि के अनुसार इसकी अंग्रेज़ी तारीख़ बदलती है; अपना पंचांग देखें।
भाई दूज को यम द्वितीया क्यों कहते हैं?
क्योंकि इस दिन यमराज अपनी बहन यमुना के घर गए थे, और यह द्वितीया तिथि को पड़ता है।
और पढ़ें: रोचक तथ्य · क्विज़: कक्षा 5: भारत के त्योहार।
स्रोत
उपयोगी लगा? शेयर करें।