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चंद्रयान-3: चाँद के दक्षिणी ध्रुव तक भारत की ऐतिहासिक यात्रा

चंद्रयान-3 की पूरी कहानी: 14 जुलाई 2023 को लॉन्च, 23 अगस्त को चाँद के दक्षिणी ध्रुव के पास लैंडिंग, विक्रम लैंडर, प्रज्ञान रोवर और उनकी खोजें।

· 17 अक्टूबर 2026 · 4 मिनट

23 अगस्त 2023 की शाम 6 बजकर 4 मिनट पर पूरे देश की साँसें थमी हुई थीं — और फिर इसरो के नियंत्रण कक्ष में तालियाँ गूँज उठीं। चंद्रयान-3 का लैंडर "विक्रम" चाँद के दक्षिणी ध्रुव के पास सुरक्षित उतर गया था। इसके साथ भारत चाँद पर सॉफ़्ट लैंडिंग करने वाला चौथा देश (सोवियत संघ, अमेरिका और चीन के बाद) और दक्षिणी ध्रुव के पास उतरने वाला दुनिया का पहला देश बन गया।

चंद्रयान-3 एक नज़र में

बातजानकारी
लॉन्च14 जुलाई 2023, सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र, श्रीहरिकोटा
रॉकेटLVM3-M4
चाँद की कक्षा में5 अगस्त 2023
लैंडिंग23 अगस्त 2023, शाम 6:04 बजे (भारतीय समय)
जगहदक्षिणी ध्रुव के पास, लगभग 69° दक्षिण अक्षांश
लैंडर और रोवरविक्रम (विक्रम साराभाई के नाम पर) और प्रज्ञान
काम की अवधिएक चंद्र दिवस — लगभग 14 पृथ्वी दिन

दक्षिणी ध्रुव ही क्यों?

चाँद के दक्षिणी ध्रुव के पास कुछ गहरे गड्ढे ऐसे हैं जहाँ अरबों सालों से धूप नहीं पहुँची। वैज्ञानिकों का मानना है कि वहाँ बर्फ़ के रूप में पानी जमा हो सकता है। भविष्य में यह पानी पीने, ऑक्सीजन बनाने और रॉकेट का ईंधन बनाने में काम आ सकता है। इसीलिए दुनिया की अंतरिक्ष एजेंसियाँ इस क्षेत्र में पहुँचना चाहती हैं — और भारत वहाँ सबसे पहले पहुँचा। चंद्रयान-1 के उपकरणों ने भी चाँद पर पानी के अणुओं के प्रमाण खोजने में मदद की थी; पूरी सूची इसरो के प्रमुख मिशन में पढ़ें।

चंद्रयान-2 की नाकामी से सीख

2019 में चंद्रयान-2 का लैंडर उतरने के आख़िरी पलों में दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। इसरो ने उसी से सीखकर चंद्रयान-3 को "नाकामी पर आधारित डिज़ाइन" से बनाया — यानी यह सोचकर कि क्या-क्या ग़लत हो सकता है। उतरने का क्षेत्र 500 मीटर × 500 मीटर से बढ़ाकर लगभग 4 किमी × 2.4 किमी किया गया, लैंडर के पैर मज़बूत किए गए, ज़्यादा ईंधन रखा गया और रफ़्तार नापने के लिए नए सेंसर लगाए गए। उस समय इसरो के अध्यक्ष एस. सोमनाथ थे।

चंद्रयान-3 ने क्या खोजा?

  • सल्फ़र की पुष्टि: प्रज्ञान रोवर के लेज़र उपकरण ने दक्षिणी ध्रुव के पास की मिट्टी में सल्फ़र की मौजूदगी की पहली बार वहीं जाकर पुष्टि की। साथ में एल्युमिनियम, कैल्शियम, लोहा, क्रोमियम, टाइटेनियम और ऑक्सीजन भी मिले।
  • तापमान: विक्रम के उपकरण ने पाया कि सतह पर तापमान लगभग 70 डिग्री सेल्सियस तक था, लेकिन कुछ सेंटीमीटर नीचे जाते ही यह तेज़ी से गिर जाता है।
  • प्रज्ञान का सफ़र: रोवर ने चाँद पर 100 मीटर से ज़्यादा दूरी तय की।
  • विक्रम की छलाँग: 3 सितंबर 2023 को विक्रम ने अपने इंजन चलाकर लगभग 40 सेंटीमीटर ऊपर उठकर पास में दोबारा लैंडिंग की — भविष्य में चाँद से नमूने वापस लाने के मिशन के लिए यह अहम परीक्षण था।

क्या आप जानते हैं? जिस जगह विक्रम उतरा, उसका नाम "शिव शक्ति पॉइंट" रखा गया, और जहाँ चंद्रयान-2 का लैंडर गिरा था, उसे "तिरंगा पॉइंट" कहा गया। 23 अगस्त को अब हर साल "राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस" के रूप में मनाया जाता है।

मिशन के बाद

चंद्र-रात शुरू होने से पहले विक्रम और प्रज्ञान को "स्लीप मोड" में डाल दिया गया, क्योंकि रात में तापमान शून्य से 100 डिग्री से भी ज़्यादा नीचे चला जाता है। वे दोबारा नहीं जागे, लेकिन तब तक वे अपना काम पूरा कर चुके थे। चंद्रयान-3 के प्रोपल्शन मॉड्यूल को बाद में चाँद की कक्षा से वापस पृथ्वी की कक्षा में लाया गया — यह भी एक नया प्रयोग था। चाँद और सूर्य से जुड़ी और बातें ग्रहण कैसे लगते हैं में पढ़ें।

मुख्य बिंदु

  • चंद्रयान-3 14 जुलाई 2023 को LVM3 रॉकेट से लॉन्च हुआ।
  • 23 अगस्त 2023 को यह चाँद के दक्षिणी ध्रुव के पास उतरा।
  • लैंडर का नाम विक्रम और रोवर का नाम प्रज्ञान है।
  • भारत सॉफ़्ट लैंडिंग करने वाला चौथा और दक्षिणी ध्रुव के पास उतरने वाला पहला देश है।
  • 23 अगस्त राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चंद्रयान-3 चाँद पर कब उतरा?

23 अगस्त 2023 को शाम 6:04 बजे (भारतीय समय)।

चंद्रयान-3 के लैंडर और रोवर के नाम क्या हैं?

लैंडर का नाम "विक्रम" और रोवर का नाम "प्रज्ञान" है।

और लेख: विज्ञान · विज्ञान के प्रश्न।

स्रोत

  1. ISRO — Chandrayaan-3 (नए टैब में खुलता है)
  2. Press Information Bureau — National Space Day (नए टैब में खुलता है)
  3. ISRO — Chandrayaan-3 science results (नए टैब में खुलता है)
चंद्रयान-3: चाँद के दक्षिणी ध्रुव तक भारत की ऐतिहासिक यात्रा

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