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मानसून कैसे आता है: भारत की बारिश का पूरा विज्ञान

भारत की सालाना बारिश का लगभग तीन-चौथाई हिस्सा जून से सितंबर के बीच गिरता है। यहाँ समझें कि दक्षिण-पश्चिम मानसून कैसे बनता है, किस तारीख़ को कहाँ पहुँचता है और किसी साल कमज़ोर क्यों पड़ता है।

· 28 अक्टूबर 2026 · 4 मिनट

मानसून कैसे आता है: भारत की बारिश का पूरा विज्ञान

मानसून कैसे आता है? गर्मियों में भारत की ज़मीन समुद्र से कहीं तेज़ी से गरम होती है, इसलिए हिंद महासागर की नम हवाएँ ज़मीन की ओर खिंच आती हैं, और पहाड़ों व मैदानों पर ऊपर उठते हुए ठंडी होकर बारिश बनकर बरसती हैं। भारत की सालाना बारिश का लगभग तीन-चौथाई हिस्सा जून से सितंबर के बीच इसी दक्षिण-पश्चिम मानसून से आता है।

"मानसून" शब्द का अर्थ क्या है?

यह शब्द अरबी के "मौसिम" से आया है, जिसका अर्थ है ऋतु या मौसम। अरब नाविकों ने बहुत पहले देखा था कि हिंद महासागर पर हवाएँ साल में दो बार दिशा बदलती हैं: गर्मियों में समुद्र से ज़मीन की ओर और सर्दियों में ज़मीन से समुद्र की ओर। वे भारत की व्यापार यात्राएँ इन्हीं मौसमी हवाओं के हिसाब से तय करते थे।

यानी मानसून सबसे पहले एक हवा है, जो ऋतु के साथ दिशा पलटती है। बारिश वह चीज़ है जो यह हवा साथ लाती है। ये हवाएँ जिन पानियों को पार करती हैं, उनके बारे में दुनिया के पाँच महासागर और उनके तथ्य में पढ़ें।

मानसून बनता कैसे है?

गैस पर रखा तवा और पास रखी पानी की कटोरी सोचिए। तवा कुछ ही मिनट में गरम हो जाता है, जबकि पानी देर तक ठंडा रहता है। इसी तरह मई-जून में उत्तर-पश्चिम भारत के मैदान और तिब्बत का पठार बहुत गरम हो जाते हैं, उनके ऊपर की हवा ऊपर उठती है और वहाँ निम्न दाब (low pressure) का क्षेत्र बन जाता है।

हवा हमेशा उच्च दाब (high pressure) से निम्न दाब की ओर बहती है। इसलिए ठंडे हिंद महासागर के ऊपर की नम हवा उत्तर की ओर भारत की तरफ़ बढ़ती है। पृथ्वी के घूमने से ये हवाएँ मुड़ जाती हैं और दक्षिण-पश्चिम दिशा से भारत पहुँचती हैं, इसीलिए इसे दक्षिण-पश्चिम मानसून कहते हैं। जब यह गीली हवा पश्चिमी घाट या पूर्वोत्तर की पहाड़ियों पर ऊपर धकेली जाती है, तो ठंडी होती है, उसकी जलवाष्प (water vapour) बूँदों में बदलती है और तेज़ बारिश शुरू हो जाती है।

मानसून की दो शाखाएँ

भारत पहुँचकर मानसून दो हिस्सों में बँट जाता है। अरब सागर शाखा पश्चिमी तट और पश्चिमी घाट से टकराती है, जबकि बंगाल की खाड़ी शाखा पूर्वोत्तर में जाकर हिमालय के साथ-साथ पश्चिम की ओर गंगा के मैदान में मुड़ती है। दोनों शाखाएँ उत्तर भारत के ऊपर मिलती हैं, इसीलिए दिल्ली में बारिश केरल या कोलकाता से देर से आती है।

मानसून किस तारीख़ को कहाँ पहुँचता है?

भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) कई सालों के रिकॉर्ड से "सामान्य तारीख़ें" तय करता है। किसी भी साल असली तारीख़ एक हफ़्ता पहले या बाद हो सकती है। तालिका में सामान्य क्रम दिया गया है।

चरणजगहसामान्य तारीख़
आगमन की शुरुआतकेरल1 जून
आगमनमुंबई11 जून
आगमनदिल्ली27 जून
पूरे देश में फैलावपूरा भारत8 जुलाई
वापसी की शुरुआतउत्तर-पश्चिम भारत17 सितंबर
वापसी पूरीपूरा भारत15 अक्टूबर

किसानों के लिए केरल में मानसून का आना साल की सबसे बड़ी ख़बर होती है। धान, कपास और सोयाबीन जैसी ख़रीफ़ फ़सलें पहली अच्छी बारिश से मिट्टी भीगने के बाद बोई जाती हैं। यही बारिश तालाब, कुएँ और जलाशय भरती है और नदियों को उफ़ान देती है, जिनके बारे में भारत की सबसे लंबी नदी कौन-सी है: गंगा, ब्रह्मपुत्र और सिंधु में पढ़ सकते हैं।

कहीं ज़्यादा और कहीं कम बारिश क्यों होती है?

पहाड़ बहुत कुछ तय करते हैं। समुद्र की ओर वाले पश्चिमी घाट के किनारे बसे मुंबई में बहुत भारी बारिश होती है, जबकि पहाड़ों के ठीक पीछे बसा पुणे कहीं सूखा रहता है, क्योंकि हवाएँ अपना ज़्यादातर पानी पहले ही गिरा चुकी होती हैं। इस सूखे हिस्से को वृष्टि छाया क्षेत्र (rain shadow area) कहते हैं, और मुंबई से पुणे की रेल यात्रा में हरी ढलानों के बाद सूखी ज़मीन दिखने लगती है।

पूर्वोत्तर में बंगाल की खाड़ी की नम हवाएँ कीप जैसी खासी पहाड़ियों में फँस जाती हैं। इसीलिए मेघालय के मासिनराम और चेरापूंजी धरती की सबसे ज़्यादा बारिश वाली जगहों में गिने जाते हैं। यही बारिश शानदार झरनों को पानी देती है, जिनकी सूची भारत के प्रमुख जलप्रपात में है।

क्या आप जानते हैं? तमिलनाडु को अपनी सालाना बारिश का बड़ा हिस्सा जुलाई में नहीं, बल्कि अक्टूबर से दिसंबर के बीच उत्तर-पूर्वी मानसून से मिलता है, जब हवाएँ पलटकर ज़मीन और बंगाल की खाड़ी से दक्षिण-पूर्वी तट की ओर बहती हैं।

किसी साल मानसून कमज़ोर क्यों पड़ता है?

मानसून दूर के महासागरों से भी जुड़ा है। अल नीनो (El Niño) वाले साल में दक्षिण अमेरिका के पास प्रशांत महासागर सामान्य से गरम हो जाता है, और इससे अक्सर भारत की मानसूनी हवाएँ कमज़ोर पड़ती हैं। सकारात्मक हिंद महासागर द्विध्रुव (Indian Ocean Dipole), जब हिंद महासागर का पश्चिमी हिस्सा पूर्वी हिस्से से गरम होता है, उल्टे मानसून की मदद कर सकता है।

IMD हर मौसम की तुलना दीर्घावधि औसत (Long Period Average) से करता है, जो जून से सितंबर तक पूरे देश के लिए लगभग 87 सेमी बारिश है। इसका 96% से 104% पाने वाला मौसम "सामान्य" कहलाता है। कमज़ोर मानसून से मंडियों में सब्ज़ियाँ महँगी होती हैं और किसान परेशान होते हैं, इसलिए हर घर पूर्वानुमान पर नज़र रखता है।

मुख्य बिंदु

  • मानसून एक मौसमी हवा है; यह नाम अरबी के "मौसिम" से आया है।
  • गरम ज़मीन और ठंडा समुद्र गर्मियों में नम समुद्री हवाओं को भारत की ओर खींचते हैं।
  • केरल में मानसून की सामान्य तारीख़ 1 जून है, और 8 जुलाई तक यह पूरे भारत में फैल जाता है।
  • अरब सागर और बंगाल की खाड़ी की शाखाएँ उत्तर भारत के ऊपर मिलती हैं।
  • अल नीनो अक्सर मानसून को कमज़ोर करता है; दीर्घावधि औसत लगभग 87 सेमी है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मानसून केरल कब पहुँचता है?

केरल में मानसून के आगमन की सामान्य तारीख़ 1 जून है। किसी साल यह लगभग एक हफ़्ता पहले या बाद भी आ सकता है।

दक्षिण-पश्चिम और उत्तर-पूर्वी मानसून में क्या अंतर है?

दक्षिण-पश्चिम मानसून जून से सितंबर तक समुद्र से ज़मीन की ओर बहता है और ज़्यादातर भारत में बारिश लाता है। उत्तर-पूर्वी मानसून अक्टूबर से दिसंबर तक उल्टी दिशा में बहता है और मुख्य रूप से तमिलनाडु और आसपास के इलाक़ों को भिगोता है।

वृष्टि छाया क्षेत्र क्या होता है?

यह पहाड़ की वह सूखी ढलान है जो हवा से दूर होती है। पहाड़ हवा की बारिश सामने वाली ढलान पर गिरवा देते हैं, इसलिए पश्चिमी घाट के पीछे बसे पुणे जैसे शहरों में बहुत कम बारिश होती है। और पढ़ें हमारे भूगोल के लेखों में।

स्रोत: भारत मौसम विज्ञान विभाग और एनसाइक्लोपीडिया ब्रिटानिका: मानसून।

स्रोत

  1. India Meteorological Department — Monsoon (नए टैब में खुलता है)
  2. Ministry of Earth Sciences (नए टैब में खुलता है)
  3. NCERT Geography, Class 9 — "Climate" (नए टैब में खुलता है)

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