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स्वतंत्र भारत का पहला बजट: 26 नवंबर 1947 की पूरी कहानी

आर. के. षणमुखम चेट्टी का पहला बजट, साढ़े सात महीने का हिसाब, बजट का समय शाम 5 बजे से सुबह 11 बजे और तारीख़ 1 फ़रवरी कैसे हुई — बजट के रोचक तथ्य।

· 4 अक्टूबर 2026 · 3 मिनट

हर साल फ़रवरी में जब वित्त मंत्री बजट पेश करते हैं, तो पूरा देश टीवी और मोबाइल पर नज़रें गड़ाए रहता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि स्वतंत्र भारत का पहला बजट कब, किसने और किन हालात में पेश किया था? उसकी कहानी आज़ादी के बाद के कठिन दिनों की झलक भी दिखाती है।

पहला बजट: 26 नवंबर 1947

स्वतंत्र भारत का पहला केंद्रीय बजट 26 नवंबर 1947 को देश के पहले वित्त मंत्री आर. के. षणमुखम चेट्टी ने पेश किया। यह पूरे साल का बजट नहीं था — यह 15 अगस्त 1947 से 31 मार्च 1948 तक, यानी लगभग साढ़े सात महीनों का हिसाब था।

उस समय के हालात

बँटवारे के बाद देश लाखों शरणार्थियों की देखभाल, सीमाओं की सुरक्षा और खाद्यान्न की कमी जैसी चुनौतियों से जूझ रहा था। इसीलिए पहले बजट में रक्षा और शरणार्थियों के पुनर्वास पर बड़ा ख़र्च रखा गया। उपलब्ध आँकड़ों के अनुसार इस अवधि की कुल आय लगभग ₹171 करोड़ और कुल ख़र्च लगभग ₹197 करोड़ आँका गया था, जिसमें रक्षा का हिस्सा सबसे बड़ा था।

गणतंत्र का पहला बजट

26 जनवरी 1950 को भारत गणराज्य बना। गणतंत्र भारत का पहला बजट 28 फ़रवरी 1950 को वित्त मंत्री जॉन मथाई ने पेश किया। इसी दौर में योजना आयोग का गठन हुआ और पंचवर्षीय योजनाओं की शुरुआत हुई।

क्या आप जानते हैं? भारत में बजट की परंपरा अंग्रेज़ों के समय शुरू हुई थी — पहला बजट 7 अप्रैल 1860 को जेम्स विल्सन ने पेश किया था।

शाम 5 बजे से सुबह 11 बजे

लंबे समय तक केंद्रीय बजट शाम 5 बजे पेश किया जाता था। यह परंपरा ब्रिटिश दौर की थी, जब लंदन के समय के हिसाब से इसे सुविधाजनक माना जाता था। 1999 में वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा ने बजट का समय बदलकर सुबह 11 बजे कर दिया।

फ़रवरी का आख़िरी दिन से 1 फ़रवरी

पहले बजट फ़रवरी के आख़िरी कामकाजी दिन पेश होता था। 2017 से इसे 1 फ़रवरी को पेश किया जाने लगा, ताकि 1 अप्रैल से शुरू होने वाले नए वित्त वर्ष से पहले संसद की मंज़ूरी मिल जाए और योजनाओं पर समय से काम शुरू हो सके। इसी साल से अलग रेल बजट को भी आम बजट में मिला दिया गया। अलग रेल बजट की परंपरा 1924 से चली आ रही थी।

बजट से जुड़े कुछ और तथ्य

  • संविधान में "बजट" शब्द नहीं है — अनुच्छेद 112 इसे "वार्षिक वित्तीय विवरण" कहता है।
  • बजट दस्तावेज़ों की छपाई से पहले वित्त मंत्रालय में "हलवा समारोह" की परंपरा निभाई जाती है।
  • भारत का वित्त वर्ष 1 अप्रैल से 31 मार्च तक चलता है।
  • बजट में आय (प्राप्तियाँ) और ख़र्च (व्यय) दोनों का अनुमान होता है; दोनों के अंतर को घाटा या अधिशेष कहते हैं।

बजट क्यों ज़रूरी है?

बजट सिर्फ़ आय-व्यय का काग़ज़ नहीं, बल्कि सरकार की प्राथमिकताओं का आईना है। इससे तय होता है कि स्कूलों, अस्पतालों, सड़कों, रक्षा और किसानों पर कितना पैसा ख़र्च होगा और टैक्स कितना लगेगा। इसलिए एक जागरूक नागरिक के लिए बजट को समझना ज़रूरी है।

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