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भारत का पहला कंप्यूटर: TIFRAC से PARAM सुपरकंप्यूटर तक

कोलकाता के भारतीय सांख्यिकी संस्थान में आया पहला कंप्यूटर, मुंबई में बना पहला स्वदेशी कंप्यूटर TIFRAC और 1991 का PARAM 8000 — भारत की कंप्यूटर यात्रा।

· 4 अक्टूबर 2026 · 3 मिनट

आज हमारी जेब के मोबाइल फ़ोन में उतनी ताक़त है जितनी कुछ दशक पहले पूरे कमरे जितने बड़े कंप्यूटरों में होती थी। भारत में कंप्यूटर की कहानी 1950 के दशक में शुरू हुई, जब देश आज़ादी के बाद विज्ञान और उद्योग की नींव रख रहा था। "भारत का पहला कंप्यूटर कौन-सा था?" — इस सवाल के दो सही जवाब हैं, और दोनों को समझना ज़रूरी है।

भारत में लगा पहला कंप्यूटर (1956)

भारत में पहला कंप्यूटर कोलकाता के भारतीय सांख्यिकी संस्थान (ISI) में लगभग 1956 में लगाया गया। इसका नाम HEC-2M था और यह विदेश (इंग्लैंड) में बने डिज़ाइन पर आधारित था। संस्थान के संस्थापक, प्रसिद्ध सांख्यिकीविद् प्रशांत चंद्र महालनोबिस चाहते थे कि बड़े सर्वेक्षणों और योजना से जुड़ी गणनाएँ तेज़ी से हों। इसलिए यह भारत में स्थापित पहला कंप्यूटर माना जाता है।

भारत में बना पहला कंप्यूटर: TIFRAC (1960)

पूरी तरह भारत में डिज़ाइन और तैयार किया गया पहला कंप्यूटर था TIFRAC — यानी Tata Institute of Fundamental Research Automatic Calculator। इसे मुंबई के टाटा मूलभूत अनुसंधान संस्थान (TIFR) में वैज्ञानिकों की एक छोटी टीम ने बनाया और यह 1960 में पूरी तरह काम करने लगा। संस्थान के संस्थापक डॉ. होमी जहाँगीर भाभा का मानना था कि भारत को परमाणु ऊर्जा और विज्ञान में आगे बढ़ने के लिए अपनी कंप्यूटिंग क्षमता चाहिए।

TIFRAC में हज़ारों वैक्यूम ट्यूब लगी थीं और यह एक बड़े कमरे में रखा जाता था। आज के मानकों से यह बहुत धीमा था, लेकिन इसने भारतीय वैज्ञानिकों को कंप्यूटर डिज़ाइन करने, बनाने और चलाने का भरोसा दिया।

क्या आप जानते हैं? 1966 में ISI और जादवपुर विश्वविद्यालय ने मिलकर ISIJU नाम का कंप्यूटर बनाया, जिसे भारत का पहला ट्रांज़िस्टर-आधारित कंप्यूटर माना जाता है।

सुपरकंप्यूटर की ओर: PARAM 8000 (1991)

1980 के दशक में जब भारत को मौसम पूर्वानुमान और वैज्ञानिक शोध के लिए विदेश से सुपरकंप्यूटर ख़रीदने में दिक़्क़तें आईं, तो सरकार ने 1988 में पुणे में सी-डैक (C-DAC) की स्थापना की। डॉ. विजय भटकर के नेतृत्व में C-DAC ने 1991 में PARAM 8000 बनाया — भारत का पहला स्वदेशी सुपरकंप्यूटर। इसने साबित किया कि भारत अपनी ज़रूरत की उन्नत मशीनें ख़ुद बना सकता है।

कंप्यूटर की पीढ़ियाँ — एक छोटी झलक

कंप्यूटर के विकास को अक्सर "पीढ़ियों" में समझाया जाता है। पहली पीढ़ी के कंप्यूटर वैक्यूम ट्यूब से चलते थे — TIFRAC इसी पीढ़ी का था। दूसरी पीढ़ी में ट्रांज़िस्टर आए, जिससे मशीनें छोटी, सस्ती और भरोसेमंद हुईं। तीसरी पीढ़ी में इंटीग्रेटेड सर्किट (IC) और चौथी पीढ़ी में माइक्रोप्रोसेसर आए, जिनसे पर्सनल कंप्यूटर और फिर स्मार्टफ़ोन बने। आज की मशीनें कृत्रिम बुद्धिमत्ता और समानांतर (पैरेलल) गणना पर आधारित हैं।

आज की तस्वीर

2015 में शुरू हुए राष्ट्रीय सुपरकंप्यूटिंग मिशन के तहत देश के कई संस्थानों में PARAM श्रृंखला के सुपरकंप्यूटर लगाए गए हैं, जो मौसम, दवाइयों की खोज, जलवायु और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) जैसे क्षेत्रों में शोध में मदद करते हैं। वहीं डिजिटल भुगतान (UPI) और आधार जैसी व्यवस्थाएँ दिखाती हैं कि कंप्यूटिंग आज भारत के हर नागरिक के जीवन का हिस्सा बन चुकी है।

परीक्षा के लिए एक नज़र में

भारत में लगा पहला कंप्यूटरHEC-2M, ISI कोलकाता (लगभग 1956)
भारत में बना पहला कंप्यूटरTIFRAC, TIFR मुंबई (1960)
पहला ट्रांज़िस्टर कंप्यूटरISIJU (1966)
पहला स्वदेशी सुपरकंप्यूटरPARAM 8000, C-DAC (1991)

और पढ़ें: भारत का पहला उपग्रह आर्यभट · विज्ञान के प्रश्न।

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