पेड़-पौधों के रोचक तथ्य: पौधे कैसे खाते और बात करते हैं
पौधे अपना भोजन ख़ुद बनाते हैं, दिन-रात साँस लेते हैं और कीड़ों के हमले पर पड़ोसी पौधों को सावधान भी करते हैं। यहाँ पेड़-पौधों के सबसे हैरान करने वाले तथ्य हैं, भारतीय घरों और बगीचों के उदाहरणों के साथ।
रोहित टंडन · 26 अक्टूबर 2026 · 4 मिनट
पेड़-पौधों के रोचक तथ्य जानने हैं? संक्षेप में: पौधे सूरज की रोशनी से अपना भोजन ख़ुद बनाते हैं, हमारी तरह हर समय साँस लेते हैं, और कीड़ों के हमले पर ऐसे रासायनिक संकेत छोड़ते हैं जिन्हें आसपास के पौधे पहचान लेते हैं। पौधा भले एक जगह खड़ा रहे, पर वह दिन के हर पल काम में लगा रहता है।
पौधे अपना भोजन कैसे बनाते हैं?
पौधे प्रकाश संश्लेषण (photosynthesis) से भोजन बनाते हैं। पत्तियों का हरा वर्णक, पर्णहरित (chlorophyll), सूरज की रोशनी पकड़ता है, और पौधा उस ऊर्जा से हवा की कार्बन डाइऑक्साइड और जड़ों से आए पानी को जोड़ता है। इससे ग्लूकोज़ (glucose) बनता है, जो पौधे को ऊर्जा और बढ़त देता है, और ऑक्सीजन बनती है, जिसे वह हवा में छोड़ देता है।
पर्णहरित लाल और नीली रोशनी को अच्छी तरह सोखता है, पर हरी रोशनी को लौटा देता है, इसीलिए ज़्यादातर पत्तियाँ हमें हरी दिखती हैं। आँगन की तुलसी को देखिए: धूप वाली दीवार के पास वह अँधेरे कोने से जल्दी बढ़ती है, क्योंकि उसे भोजन बनाने के लिए ज़्यादा रोशनी मिलती है। जीवों के और अजूबे जीव विज्ञान के 15 रोचक तथ्य: कोशिका से ब्लू व्हेल तक में पढ़ें।
क्या पौधे भी हमारी तरह साँस लेते हैं?
हाँ। पौधे दिन-रात श्वसन (respiration) करते हैं, यानी ऑक्सीजन लेकर और कार्बन डाइऑक्साइड छोड़कर अपनी शक्कर से ऊर्जा निकालते हैं। दिन में प्रकाश संश्लेषण श्वसन से कहीं तेज़ चलता है, इसलिए हरा पौधा जितनी ऑक्सीजन लेता है उससे ज़्यादा छोड़ता है। रात में रोशनी नहीं होती, तो केवल श्वसन चलता है।
पौधे पत्तियों की निचली सतह पर बने बहुत छोटे छिद्रों, रंध्रों (stomata), से साँस लेते हैं। इन्हीं छिद्रों से पानी भाप बनकर निकलता है, जिसे वाष्पोत्सर्जन (transpiration) कहते हैं। मई की गर्म दोपहर में नीम या पीपल की छाँव इसलिए भी ठंडी लगती है कि हज़ारों पत्तियाँ भाप छोड़ रही होती हैं, ठीक वैसे जैसे मटका रिसते पानी के उड़ने से पानी ठंडा रखता है।
क्या पौधे सच में एक-दूसरे से बात करते हैं?
पौधे बोलते नहीं, लेकिन रासायनिक संदेश ज़रूर भेजते हैं। जब कोई इल्ली पत्ती कुतरती है, तो कई पौधे हवा में कुछ रसायन छोड़ते हैं, और आसपास के पौधे उन्हें भाँपकर कीड़ों के पहुँचने से पहले ही बचाव वाले पदार्थ बनाने लगते हैं। वैज्ञानिकों ने यह टमाटर और जंगली तंबाकू जैसे पौधों में देखा है।
पार्क में घास कटने पर जो ताज़ा गंध आती है, वह असल में कटी पत्तियों से निकले ऐसे ही रसायनों का समूह है। ज़मीन के नीचे जड़ें भी कवक (fungi) के महीन धागों से जुड़ी रहती हैं, जो पौधों के बीच पानी, पोषक तत्व और संकेत पहुँचाने में मदद करते हैं। समझदारी केवल जानवरों का गुण नहीं है, और जानवरों की समझ का एक उदाहरण कौवे सबसे समझदार पक्षियों में क्यों गिने जाते हैं वाले लेख में मिलेगा।
कौन-से पौधे विश्व रिकॉर्ड रखते हैं?
कुछ पौधे हर रिकॉर्ड तोड़ देते हैं। नीचे की तालिका में कुछ जाने-माने रिकॉर्ड और उनकी जगह दी गई है।
| रिकॉर्ड | पौधा | कहाँ |
|---|---|---|
| सबसे पुराना ज्ञात अकेला पेड़ | ब्रिसलकोन पाइन "मेथ्यूसेला", लगभग 4,800 साल | व्हाइट माउंटेन्स, कैलिफ़ोर्निया, अमेरिका |
| सबसे ऊँचा ज्ञात पेड़ | कोस्ट रेडवुड "हाइपेरियन", लगभग 116 मीटर | रेडवुड नेशनल पार्क, कैलिफ़ोर्निया, अमेरिका |
| सबसे बड़ा अकेला फूल | रैफ़्लेसिया आर्नोल्डी, लगभग 1 मीटर चौड़ा | सुमात्रा और बोर्नियो के वर्षावन |
| सबसे तेज़ बढ़ने वाला पौधा | बाँस की कुछ प्रजातियाँ, एक दिन में लगभग 90 सेमी तक | एशिया, पूर्वोत्तर भारत समेत |
| जंगल जैसा दिखने वाला एक पेड़ | द ग्रेट बनयान, हज़ारों जटाओं वाला बरगद | आचार्य जगदीश चंद्र बोस भारतीय वनस्पति उद्यान, हावड़ा |
हावड़ा के इस विशाल बरगद का मुख्य तना बहुत पहले नष्ट हो गया, फिर भी यह अपनी जटाओं के सहारे ज़िंदा है, जो डालियों से नीचे उतरकर नए तने बन गईं। इसके नीचे चलना किसी छोटे जंगल में घूमने जैसा लगता है, जबकि यह एक ही पेड़ है। भारत के ऐसे और अजूबे भारत के बारे में 10 रोचक तथ्य में पढ़ें।
क्या आप जानते हैं? समुद्र के सूक्ष्म पौधे और शैवाल, जिन्हें पादप प्लवक (phytoplankton) कहते हैं, धरती की लगभग आधी ऑक्सीजन बनाते हैं। यानी आपकी हर दूसरी साँस समुद्र से आती है।
कुछ पौधे हिलते या कीड़े क्यों खाते हैं?
छुई-मुई (Mimosa pudica) को छूते ही उसकी पत्तियाँ कुछ सेकंड में सिमट जाती हैं। पत्तियों के आधार की ख़ास कोशिकाओं से पानी तेज़ी से बाहर निकलता है, जिससे वे ढीली होकर झुक जाती हैं। गाँव के बच्चे स्कूल जाते हुए यह खेल अक्सर खेलते हैं, बिना जाने कि वे पानी के दबाव का एक कमाल देख रहे हैं।
कुछ पौधे ऐसी मिट्टी में उगते हैं जिसमें नाइट्रोजन बहुत कम होती है, इसलिए वे इसकी भरपाई के लिए कीड़े पकड़ते हैं। मेघालय की पहाड़ियों में मिलने वाला घटपर्णी (pitcher plant) पाचक रस से भरे फिसलन वाले घड़े में कीड़ों को फँसाता है। भारतीय वैज्ञानिक जगदीश चंद्र बोस ने क्रेस्कोग्राफ़ (crescograph) नाम का यंत्र बनाया, जिसने पौधों की बहुत छोटी हरकतें दर्ज कीं और दिखाया कि पौधे रोशनी, गर्मी और स्पर्श पर प्रतिक्रिया देते हैं।
मुख्य बिंदु
- पौधे प्रकाश संश्लेषण से धूप, कार्बन डाइऑक्साइड और पानी को ग्लूकोज़ और ऑक्सीजन में बदलते हैं।
- पौधे रंध्रों से दिन-रात साँस लेते हैं।
- घायल पौधे ऐसे रसायन छोड़ते हैं जो आसपास के पौधों को कीड़ों के हमले से सावधान करते हैं।
- सबसे पुराना ज्ञात अकेला पेड़ लगभग 4,800 साल पुराना और सबसे ऊँचा लगभग 116 मीटर ऊँचा है।
- जगदीश चंद्र बोस के क्रेस्कोग्राफ़ ने दिखाया कि पौधे अपने आसपास की दुनिया पर प्रतिक्रिया देते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
क्या पौधे रात में ऑक्सीजन देते हैं?
ज़्यादातर पौधे रात में ऑक्सीजन नहीं बनाते, क्योंकि प्रकाश संश्लेषण के लिए रोशनी चाहिए। रात में वे केवल श्वसन करते हैं, थोड़ी ऑक्सीजन लेते हैं और कार्बन डाइऑक्साइड छोड़ते हैं।
पत्तियाँ हरी क्यों होती हैं?
पत्तियों में पर्णहरित होता है, जो प्रकाश संश्लेषण के लिए लाल और नीली रोशनी सोखता है। हरी रोशनी वह लौटा देता है, इसलिए हमारी आँखों को पत्तियाँ हरी दिखती हैं।
क्या पौधे छुअन महसूस करते हैं?
पौधों में तंत्रिकाएँ नहीं होतीं, लेकिन कई पौधे छुअन पर प्रतिक्रिया देते हैं, जैसे छुई-मुई का सिमटना या बेल का डंडे के चारों ओर लिपटना। ऐसी और कहानियों के लिए हमारे विज्ञान के लेख देखें।
स्रोत: NOAA: समुद्र से कितनी ऑक्सीजन आती है? और एनसाइक्लोपीडिया ब्रिटानिका: प्रकाश संश्लेषण।
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