चाँद के रोचक तथ्य: जन्म से लेकर चंद्रयान तक
चाँद के रोचक तथ्य: यह कैसे बना, हमें हमेशा एक ही हिस्सा क्यों दिखता है, यह हर साल दूर क्यों जा रहा है, ज्वार-भाटा, कलाएँ, और चाँद पर पहला क़दम।
रोहित टंडन · 20 अक्टूबर 2026 · 4 मिनट
चाँद पृथ्वी का अकेला प्राकृतिक उपग्रह है और रात के आसमान का सबसे चमकीला पिंड। कविताओं, त्योहारों और कैलेंडर से लेकर समुद्र के ज्वार-भाटे तक, चाँद हमारी ज़िंदगी में हर जगह है। यहाँ चाँद के रोचक तथ्य दिए गए हैं — उसके जन्म से लेकर भारत के चंद्रयान तक।
चाँद एक नज़र में
| बात | जानकारी |
|---|---|
| पृथ्वी से औसत दूरी | लगभग 3,84,400 किलोमीटर |
| व्यास | लगभग 3,474 किलोमीटर — पृथ्वी का लगभग एक-चौथाई |
| गुरुत्व | पृथ्वी का लगभग 1/6 |
| पृथ्वी का एक चक्कर | लगभग 27.3 दिन |
| अमावस्या से अमावस्या | लगभग 29.5 दिन |
| रोशनी को पृथ्वी तक आने में | लगभग 1.3 सेकंड |
चाँद कैसे बना?
वैज्ञानिकों का सबसे मान्य विचार "विशाल टक्कर" का है। लगभग 4.5 अरब साल पहले, जब पृथ्वी नई-नई बनी थी, मंगल के आकार का एक पिंड — जिसे "थिया" नाम दिया गया है — उससे टकराया। टक्कर से उड़ा मलबा पृथ्वी के चारों ओर घूमते-घूमते आपस में जुड़ता गया और चाँद बन गया। अपोलो मिशनों से लाए गए चाँद के पत्थरों की बनावट पृथ्वी के पत्थरों से काफ़ी मिलती है, जो इस विचार का समर्थन करती है।
हमें चाँद का हमेशा एक ही हिस्सा क्यों दिखता है?
चाँद को अपनी धुरी पर एक चक्कर लगाने में ठीक उतना ही समय लगता है जितना पृथ्वी का एक चक्कर लगाने में — लगभग 27.3 दिन। इसे "समकालिक घूर्णन" कहते हैं। इसी कारण पृथ्वी से हमें चाँद का हमेशा एक ही चेहरा दिखता है। दूसरा हिस्सा पहली बार 1959 में सोवियत यान लूना-3 की तस्वीरों में दिखा। उसे कभी-कभी "चाँद का अँधेरा हिस्सा" कहा जाता है, लेकिन वहाँ भी धूप उतनी ही पड़ती है — बस वह हमें दिखता नहीं।
क्या आप जानते हैं? चाँद हर साल पृथ्वी से लगभग 3.8 सेंटीमीटर दूर खिसक रहा है। यह इसलिए पता है क्योंकि अपोलो के अंतरिक्ष यात्री चाँद पर विशेष दर्पण छोड़ आए थे, जिन पर पृथ्वी से लेज़र भेजकर उसकी दूरी बहुत सटीकता से नापी जाती है।
चाँद और पृथ्वी का रिश्ता
- ज्वार-भाटा: चाँद का गुरुत्व समुद्र के पानी को अपनी ओर खींचता है, जिससे दिन में लगभग दो बार ज्वार और दो बार भाटा आता है। पूर्णिमा और अमावस्या पर सूर्य और चाँद एक सीध में होते हैं, तब ज्वार सबसे ऊँचा होता है।
- कलाएँ: चाँद अपनी रोशनी से नहीं चमकता, वह सूर्य की रोशनी लौटाता है। पृथ्वी के चारों ओर घूमते हुए उसका जितना रोशन हिस्सा हमें दिखता है, उसी से अमावस्या, अर्धचंद्र और पूर्णिमा जैसी कलाएँ बनती हैं।
- कैलेंडर: भारतीय पंचांग के महीने और तिथियाँ चाँद की कलाओं पर आधारित हैं, इसीलिए दीवाली, ईद और कई त्योहारों की तारीख़ें अंग्रेज़ी कैलेंडर में हर साल बदलती हैं।
- पृथ्वी को स्थिर रखना: चाँद पृथ्वी की धुरी के झुकाव को काफ़ी हद तक स्थिर रखने में मदद करता है, जिससे मौसम बहुत ज़्यादा नहीं बदलते।
चाँद पर इंसान और भारत
20 जुलाई 1969 को अपोलो-11 मिशन के नील आर्मस्ट्रांग चाँद पर क़दम रखने वाले पहले इंसान बने, और उनके बाद बज़ एल्ड्रिन। 1969 से 1972 के बीच कुल 12 लोग चाँद पर चले। वहाँ हवा और पानी न होने के कारण उनके पैरों के निशान आज भी लगभग वैसे ही होंगे। चाँद पर दिन में तापमान 100 डिग्री सेल्सियस से ऊपर और रात में शून्य से 150 डिग्री से भी नीचे चला जाता है।
भारत के चंद्रयान-1 (2008) ने चाँद पर पानी के अणुओं के प्रमाण खोजने में मदद की, और 23 अगस्त 2023 को चंद्रयान-3 दक्षिणी ध्रुव के पास उतरा — पूरी कहानी: चंद्रयान-3। चाँद और सूर्य के बीच की आँख-मिचौली: ग्रहण कैसे लगते हैं।
मुख्य बिंदु
- चाँद पृथ्वी से औसतन 3,84,400 किलोमीटर दूर है।
- चाँद पर गुरुत्व पृथ्वी का लगभग छठा हिस्सा है।
- समकालिक घूर्णन के कारण हमें चाँद का हमेशा एक ही हिस्सा दिखता है।
- चाँद हर साल लगभग 3.8 सेंटीमीटर दूर जा रहा है।
- नील आर्मस्ट्रांग 1969 में चाँद पर चलने वाले पहले इंसान बने।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
चाँद पर पहला क़दम किसने रखा?
अमेरिका के नील आर्मस्ट्रांग ने, 20 जुलाई 1969 को अपोलो-11 मिशन में।
चाँद पृथ्वी से कितना दूर है?
औसतन लगभग 3,84,400 किलोमीटर।
और लेख: विज्ञान · विज्ञान के प्रश्न।
स्रोत
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