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क़ुतुब मीनार के रोचक तथ्य: ईंटों से बनी सबसे ऊँची मीनार

क़ुतुब मीनार के रोचक तथ्य: किसने बनवाई, कितनी ऊँची है, पाँच मंज़िलें किसने जोड़ीं, अंदर जाना क्यों बंद है और परिसर का जंग न लगने वाला लौह स्तंभ।

· 23 अक्टूबर 2026 · 4 मिनट

दिल्ली के महरौली में आसमान की ओर उठी लाल और पीले बलुआ पत्थर की क़ुतुब मीनार 800 से ज़्यादा सालों से खड़ी है। यूनेस्को के अनुसार यह दुनिया की सबसे ऊँची ईंटों (पत्थर-ईंट की चिनाई) वाली मीनार है। यहाँ क़ुतुब मीनार और उसके परिसर से जुड़े सबसे रोचक तथ्य दिए गए हैं।

क़ुतुब मीनार एक नज़र में

बातजानकारी
ऊँचाईलगभग 72.5 मीटर
मंज़िलें5
नीचे का व्यासलगभग 14.3 मीटर
ऊपर का व्यासलगभग 2.7 मीटर
सीढ़ियाँलगभग 379
शुरुआतलगभग 1199, क़ुतुबुद्दीन ऐबक
सम्मान1993 में यूनेस्को विश्व धरोहर

किसने बनवाई क़ुतुब मीनार?

क़ुतुब मीनार एक व्यक्ति ने नहीं, बल्कि कई शासकों ने मिलकर पूरी की:

  • क़ुतुबुद्दीन ऐबक: दिल्ली सल्तनत के पहले सुल्तान ने लगभग 1199 में इसकी नींव रखी और पहली मंज़िल बनवाई।
  • इल्तुतमिश: ऐबक के दामाद और उत्तराधिकारी ने इसमें तीन और मंज़िलें जोड़ीं।
  • फ़िरोज़ शाह तुग़लक़: 1368 में बिजली गिरने से ऊपरी मंज़िल टूट गई, तो उन्होंने मरम्मत कराई और पाँचवीं मंज़िल बनवाई, जिसमें सफ़ेद संगमरमर का ज़्यादा इस्तेमाल हुआ।

इसके नाम पर भी दो मत हैं — कुछ इतिहासकार इसे क़ुतुबुद्दीन ऐबक के नाम पर मानते हैं, तो कुछ सूफ़ी संत ख़्वाजा क़ुतुबुद्दीन बख़्तियार काकी के नाम पर।

मीनार की सजावट

हर मंज़िल पर बाहर निकली हुई बालकनी है, और दीवारों पर बारीक नक़्क़ाशी और क़ुरान की आयतें खुदी हैं। निचली मंज़िलों में बाँसुरी जैसी गोल और नुकीली धारियाँ बारी-बारी से बनी हैं, जिससे मीनार और ऊँची और सुंदर लगती है। मीनार पर अरबी और नागरी लिपि में कई शिलालेख भी हैं, जिनसे इसके बनने और मरम्मत का इतिहास पता चलता है। नीचे की तीन मंज़िलें मुख्य रूप से लाल बलुआ पत्थर की हैं, जबकि ऊपर की मंज़िलों में संगमरमर और बलुआ पत्थर दोनों लगे हैं, जिससे मीनार का रंग ऊपर जाकर बदलता दिखता है।

क्या आप जानते हैं? क़ुतुब परिसर में खड़ा लगभग 7 मीटर ऊँचा लौह स्तंभ लगभग 1,600 साल पुराना है और इस पर एक "चंद्र" नामक राजा का शिलालेख है, जिन्हें गुप्त सम्राट चंद्रगुप्त द्वितीय माना जाता है। खुले में खड़े रहने के बावजूद इस पर लगभग जंग नहीं लगा। IIT कानपुर के वैज्ञानिकों के अध्ययन के अनुसार इसके लोहे में फ़ॉस्फ़ोरस की मात्रा ज़्यादा है, जिससे इसकी सतह पर एक पतली सुरक्षा परत बन गई है।

क़ुतुब परिसर के दूसरे स्मारक

  • क़ुव्वत-उल-इस्लाम मस्जिद: दिल्ली की सबसे पुरानी मस्जिदों में; इसके शिलालेख के अनुसार इसमें पुराने मंदिरों के खंभे और पत्थर लगाए गए।
  • अलाई दरवाज़ा: 1311 में अलाउद्दीन ख़िलजी ने बनवाया; भारत में सच्चे मेहराब और गुंबद की शुरुआती मिसालों में।
  • अलाई मीनार: अलाउद्दीन ख़िलजी क़ुतुब मीनार से दोगुनी ऊँची मीनार बनवाना चाहते थे, लेकिन उनकी मृत्यु के बाद काम पहली मंज़िल पर ही रुक गया। उसका अधूरा ढाँचा आज भी खड़ा है।
  • इल्तुतमिश का मक़बरा: सुंदर नक़्क़ाशी वाला यह मक़बरा भी परिसर में है।

अंदर जाना क्यों बंद है?

पहले लोग सीढ़ियों से मीनार के ऊपर तक जा सकते थे। लेकिन 4 दिसंबर 1981 को अंदर बिजली जाने के बाद मची भगदड़ में 45 लोगों की मौत हो गई, जिनमें ज़्यादातर स्कूली बच्चे थे। इसके बाद से मीनार के अंदर जाना बंद है। आज पर्यटक इसे बाहर से ही देखते हैं। दिल्ली के बाक़ी स्मारकों के बारे में पढ़ें: दिल्ली के रोचक तथ्य और इंडिया गेट।

मुख्य बिंदु

  • क़ुतुब मीनार दुनिया की सबसे ऊँची ईंटों की मीनार है — लगभग 72.5 मीटर।
  • इसकी शुरुआत क़ुतुबुद्दीन ऐबक ने लगभग 1199 में की।
  • इल्तुतमिश ने तीन मंज़िलें और फ़िरोज़ शाह तुग़लक़ ने पाँचवीं मंज़िल जोड़ी।
  • परिसर का लौह स्तंभ लगभग 1,600 साल पुराना है और उस पर जंग नहीं लगा।
  • 1981 की दुर्घटना के बाद से मीनार के अंदर जाना बंद है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क़ुतुब मीनार की ऊँचाई कितनी है?

लगभग 72.5 मीटर; इसमें पाँच मंज़िलें और लगभग 379 सीढ़ियाँ हैं।

क़ुतुब मीनार किसने बनवाई?

इसकी शुरुआत क़ुतुबुद्दीन ऐबक ने की, इल्तुतमिश ने इसे आगे बढ़ाया और फ़िरोज़ शाह तुग़लक़ ने पाँचवीं मंज़िल जोड़ी।

और लेख: इतिहास · इतिहास के प्रश्न।

स्रोत

  1. Archaeological Survey of India — Qutb Minar (नए टैब में खुलता है)
  2. UNESCO — Qutb Minar and its Monuments (नए टैब में खुलता है)
  3. IIT Kanpur — study of the Delhi Iron Pillar (नए टैब में खुलता है)
क़ुतुब मीनार के रोचक तथ्य: ईंटों से बनी सबसे ऊँची मीनार

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