इसरो के प्रमुख मिशन: आर्यभट से आदित्य-L1 तक
इसरो के प्रमुख मिशन एक सूची में: आर्यभट, SLV-3, चंद्रयान-1, मंगलयान, एक उड़ान में 104 उपग्रह, चंद्रयान-3, आदित्य-L1 और स्पेडेक्स — कब और क्यों ख़ास।
रोहित टंडन · 17 अक्टूबर 2026 · 4 मिनट
एक समय था जब भारत के रॉकेट के हिस्से साइकिल पर ढोकर लॉन्च पैड तक ले जाए जाते थे, और आज भारत चाँद के दक्षिणी ध्रुव पर उतर चुका है। यह सफ़र भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन यानी इसरो (ISRO) ने तय किया। यहाँ इसरो के प्रमुख मिशन साल-दर-साल दिए गए हैं, साथ में यह भी कि हर मिशन क्यों ख़ास था।
इसरो की शुरुआत
1962 में डॉ. विक्रम साराभाई के नेतृत्व में "भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष अनुसंधान समिति" (INCOSPAR) बनी। 21 नवंबर 1963 को केरल के थुम्बा से भारत का पहला साउंडिंग रॉकेट छोड़ा गया। 15 अगस्त 1969 को इसी समिति की जगह इसरो बना, और 1972 में अंतरिक्ष विभाग की स्थापना हुई। विक्रम साराभाई को "भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम का जनक" कहा जाता है। इसरो का मुख्यालय बेंगलुरु में है और ज़्यादातर बड़े लॉन्च आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा में स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से होते हैं।
इसरो के प्रमुख मिशन: साल-दर-साल
| साल | मिशन | क्यों ख़ास |
|---|---|---|
| 1975 | आर्यभट | भारत का पहला उपग्रह (सोवियत रॉकेट से भेजा गया) |
| 1980 | SLV-3 / रोहिणी | भारत के अपने रॉकेट से पहला उपग्रह कक्षा में |
| 1994 | PSLV | PSLV की पहली सफल उड़ान; आगे चलकर इसरो का सबसे भरोसेमंद रॉकेट |
| 2008 | चंद्रयान-1 | चाँद पर पानी के अणुओं के प्रमाण खोजने में बड़ी भूमिका |
| 2013–14 | मंगलयान | पहली ही कोशिश में मंगल की कक्षा तक |
| 2017 | PSLV-C37 | एक ही उड़ान में 104 उपग्रह |
| 2019 | चंद्रयान-2 | ऑर्बिटर सफल; लैंडर उतरते समय दुर्घटनाग्रस्त |
| 2023 | चंद्रयान-3 | चाँद के दक्षिणी ध्रुव के पास उतरने वाला पहला यान |
| 2023 | आदित्य-L1 | सूर्य का अध्ययन करने वाली भारत की पहली अंतरिक्ष वेधशाला |
| 2025 | स्पेडेक्स | अंतरिक्ष में दो उपग्रहों को जोड़ना (डॉकिंग); ऐसा करने वाला चौथा देश |
पहले उपग्रह की पूरी कहानी पढ़ें: आर्यभट: भारत का पहला उपग्रह। SLV-3 परियोजना के निदेशक डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम थे, जो बाद में भारत के राष्ट्रपति बने।
क्या आप जानते हैं? थुम्बा में पहले रॉकेट के हिस्से साइकिल और बैलगाड़ी से लाए गए थे, और वहाँ के सेंट मैरी मैग्डलीन चर्च को दफ़्तर और प्रयोगशाला बनाया गया था। वही इमारत आज अंतरिक्ष संग्रहालय है।
इसरो के अध्यक्ष
विक्रम साराभाई के बाद इसरो का नेतृत्व कई बड़े वैज्ञानिकों ने किया। सतीश धवन (1972–84) ने संगठन को मज़बूत ढाँचा दिया — श्रीहरिकोटा का लॉन्च केंद्र आज उन्हीं के नाम पर है। उनके बाद यू.आर. राव, के. कस्तूरीरंगन, जी. माधवन नायर, के. राधाकृष्णन, ए.एस. किरण कुमार, के. सिवन और एस. सोमनाथ जैसे वैज्ञानिक इसके अध्यक्ष रहे। जनवरी 2025 में वी. नारायणन ने यह ज़िम्मेदारी सँभाली। हर अध्यक्ष के समय इसरो ने कोई न कोई नई छलाँग लगाई — संचार उपग्रहों से लेकर चाँद और मंगल तक।
इसरो के रॉकेट
- SLV और ASLV: शुरुआती छोटे रॉकेट, जिनसे इसरो ने रॉकेट बनाना सीखा।
- PSLV: "इसरो का वर्कहॉर्स" — चंद्रयान-1, मंगलयान और आदित्य-L1 इसी से भेजे गए।
- GSLV: स्वदेशी क्रायोजेनिक इंजन वाला रॉकेट, भारी संचार उपग्रहों के लिए।
- LVM3: इसरो का सबसे भारी रॉकेट — चंद्रयान-3 इसी से गया और गगनयान भी इसी के मानव-योग्य रूप से जाएगा।
- SSLV: छोटे उपग्रहों को कम ख़र्च और कम समय में भेजने वाला नया रॉकेट।
इसरो हमारी रोज़ की ज़िंदगी में
इसरो के उपग्रह सिर्फ़ विज्ञान के लिए नहीं हैं। INSAT और GSAT उपग्रहों से टीवी प्रसारण, मौसम की भविष्यवाणी और चक्रवात की चेतावनी मिलती है। भारत की अपनी नेविगेशन प्रणाली "NavIC" रास्ता बताने में मदद करती है। रिमोट सेंसिंग उपग्रह फ़सल, जंगल, बाढ़ और सूखे पर नज़र रखते हैं, और मछुआरों को समुद्र में मछली वाले क्षेत्रों की जानकारी भी इन्हीं से मिलती है। 2025 में नासा के साथ मिलकर बना पृथ्वी-अवलोकन उपग्रह "NISAR" भी भेजा गया।
मुख्य बिंदु
- इसरो की स्थापना 15 अगस्त 1969 को हुई; मुख्यालय बेंगलुरु में है।
- विक्रम साराभाई भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के जनक हैं।
- भारत का पहला उपग्रह आर्यभट 1975 में भेजा गया।
- PSLV-C37 ने 2017 में एक उड़ान में 104 उपग्रह भेजे।
- चंद्रयान-3 चाँद के दक्षिणी ध्रुव के पास उतरने वाला पहला यान है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
इसरो की स्थापना कब हुई?
15 अगस्त 1969 को; उससे पहले 1962 से INCOSPAR यह काम देखती थी।
इसरो के रॉकेट कहाँ से लॉन्च होते हैं?
ज़्यादातर आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा में स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से।
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स्रोत
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