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स्टोनहेंज का रहस्य: 5,000 साल पुराने पत्थरों की कहानी

स्टोनहेंज लगभग 3000 ईसा पूर्व से कई चरणों में बना, और इसके पत्थर 25, 225 और 700 किलोमीटर दूर से लाए गए। जानिए वैज्ञानिक क्या जानते हैं और क्या अब भी रहस्य है।

· 31 अक्टूबर 2026 · 4 मिनट

स्टोनहेंज का रहस्य: 5,000 साल पुराने पत्थरों की कहानी

स्टोनहेंज का रहस्य तीन सवालों में छिपा है: इंग्लैंड के सैलिसबरी मैदान पर ये विशाल पत्थर किसने खड़े किए, बिना मशीनों के इन्हें कैसे लाया गया, और क्यों। वैज्ञानिक अब जानते हैं कि इसे खेती करने वाले लोगों ने लगभग 3000 ईसा पूर्व से कई चरणों में बनाया, और इसके पत्थर 25, 225 और लगभग 700 किलोमीटर दूर से आए। "क्यों" पर बहस आज भी जारी है।

स्टोनहेंज क्या है और कहाँ है?

स्टोनहेंज दक्षिणी इंग्लैंड के विल्टशायर में खड़े पत्थरों का एक घेरा है। इसके सबसे ऊँचे पत्थर सार्सेन (sarsen) कहलाते हैं, जो कठोर बलुआ पत्थर (sandstone) के बड़े खंड हैं और इनमें से कुछ का वज़न लगभग 25 टन तक है। सार्सेन के जोड़ों के ऊपर एक सपाट पत्थर आड़ा रखा है, जैसे कोई विशाल दरवाज़ा, और घेरे के भीतर छोटे "ब्लूस्टोन" खड़े हैं।

1986 में यूनेस्को ने स्टोनहेंज को पास के एवबरी पत्थर-घेरे के साथ विश्व धरोहर स्थल घोषित किया। आज इसकी देखभाल इंग्लिश हेरिटेज करती है। ओडिशा के कोणार्क सूर्य मंदिर की तरह यह भी सूर्य को ध्यान में रखकर बना पत्थर का स्मारक है, हालाँकि यह उससे 4,000 साल से भी ज़्यादा पुराना है।

स्टोनहेंज कब और किसने बनाया?

स्टोनहेंज एक साथ नहीं बना। लगभग 1,500 साल तक कई चरणों में इस पर काम चला, और इसे ऐसे लोगों ने बनाया जो खेती करते, मवेशी पालते और पत्थर व हड्डी के औज़ार इस्तेमाल करते थे। शुरुआती दौर में उनके पास न धातु के औज़ार थे, न भारी बोझ के लिए पहिए और न लिखावट, इसलिए हमारी सारी जानकारी खुदाई और विज्ञान से आती है।

कबक्या हुआ
लगभग 3000 ईसा पूर्वगोल खाई और मिट्टी का घेरा बना; यहाँ अंतिम संस्कार के अवशेष भी दफ़नाए गए
लगभग 2500 ईसा पूर्वबड़े सार्सेन खड़े किए गए और ऊपर के पत्थर जोड़े गए
अगली कई सदियाँब्लूस्टोन कई बार हटाए और नए ढंग से सजाए गए
1986स्टोनहेंज और एवबरी यूनेस्को विश्व धरोहर बने
2020एक अध्ययन ने ज़्यादातर सार्सेन का स्रोत लगभग 25 किलोमीटर उत्तर में वेस्ट वुड्स बताया
2024"ऑल्टर स्टोन" का स्रोत उत्तर-पूर्वी स्कॉटलैंड निकला

एक लोकप्रिय कहानी कहती है कि इसे ड्रूइड पुजारियों ने बनाया, पर ड्रूइड लगभग 2,000 साल बाद हुए। 12वीं सदी में लिखी एक किंवदंती इसका श्रेय जादूगर मर्लिन को देती है। ज़मीन से मिले सबूत इनमें से किसी बात का साथ नहीं देते।

पत्थर कहाँ से आए?

ज़्यादातर सार्सेन लगभग 25 किलोमीटर दूर वेस्ट वुड्स से आए। कुछ टन वज़न वाले ब्लूस्टोन वेल्स की प्रेसेली पहाड़ियों से, लगभग 225 किलोमीटर दूर से लाए गए। यह लगभग दिल्ली से आगरा जितनी दूरी है, जो लकड़ी की स्लेज पर पत्थर रखकर पैदल तय की गई।

सबसे बड़ा आश्चर्य 2024 में सामने आया। विज्ञान पत्रिका "नेचर" में छपे अध्ययन ने बताया कि बीच में पड़ा लगभग 6 टन का सपाट "ऑल्टर स्टोन" उत्तर-पूर्वी स्कॉटलैंड से, लगभग 700 किलोमीटर दूर से आया था। बाद के एक अध्ययन ने ओर्कनी द्वीपों को इस सूची से हटा दिया, इसलिए स्कॉटलैंड में उसकी सही जगह की खोज अभी जारी है।

क्या आप जानते हैं? स्टोनहेंज का "ऑल्टर स्टोन" लगभग 5,000 साल पहले उत्तर-पूर्वी स्कॉटलैंड से करीब 700 किलोमीटर दूर लाया गया था, जो सड़क से मुंबई से गोवा की दूरी से भी ज़्यादा है।

विशाल पत्थर कैसे लाए और खड़े किए गए?

किसी ने तरीक़ा लिखकर नहीं छोड़ा, पर प्रयोग बताते हैं कि क्या संभव था। लकड़ी की स्लेज पर रखा पत्थर चिकनी की गई लकड़ी की पटरियों पर रस्सियों से एक बड़ी टोली खींच सकती है। जिसने भारी स्टील की अलमारी को गोल लकड़ी के लट्ठों पर सरकते देखा है, उसने यही तरकीब छोटे पैमाने पर देखी है।

पत्थर को सीधा खड़ा करने के लिए बनाने वालों ने शायद एक ओर ढलान वाला गड्ढा खोदा, पत्थर उसमें सरकाया और रस्सियों व उत्तोलक (lever) से ऊपर खींचा। ऊपर के पत्थर लकड़ी के काम वाले जोड़ों से कसे गए: खड़े पत्थर का उभार आड़े पत्थर के खाँचे में बैठता है, ठीक वैसे जैसे गाँव का बढ़ई चारपाई के ढाँचे में चूल बिठाता है।

स्टोनहेंज क्यों बनाया गया?

सबसे साफ़ सुराग़ सूर्य है। स्टोनहेंज की मुख्य धुरी गर्मियों के सबसे लंबे दिन के सूर्योदय और सर्दियों के सबसे छोटे दिन के सूर्यास्त की दिशा में है। हर जून में ग्रीष्म संक्रांति (summer solstice) पर हज़ारों लोग वहाँ जुटते हैं, उसी सबसे लंबे दिन के आसपास जब भारत 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाता है।

यहाँ मिले दाह-संस्कार के अवशेष बताते हैं कि यह जगह क़ब्रगाह भी थी। कुछ शोधकर्ता मानते हैं कि यह किसानों के लिए साल के बदलने का निशान था, तो कुछ इसे दूर-दूर के समूहों को जोड़ने वाला अनुष्ठान-स्थल मानते हैं। हमारे रोचक तथ्य संग्रह की कई जगहों की तरह, लिखावट के बिना इसका पूरा जवाब शायद कभी न मिले।

मुख्य बिंदु

  • स्टोनहेंज इंग्लैंड के विल्टशायर में सैलिसबरी मैदान पर है और लगभग 3000 ईसा पूर्व से कई चरणों में बना।
  • लगभग 25 टन तक के बड़े सार्सेन लगभग 2500 ईसा पूर्व खड़े हुए और ज़्यादातर लगभग 25 किलोमीटर दूर से आए।
  • ब्लूस्टोन लगभग 225 किलोमीटर दूर वेल्स से और ऑल्टर स्टोन लगभग 700 किलोमीटर दूर उत्तर-पूर्वी स्कॉटलैंड से आए।
  • इसकी धुरी गर्मियों के सूर्योदय और सर्दियों के सूर्यास्त की सीध में है।
  • 1986 में यह एवबरी के साथ यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल बना।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

स्टोनहेंज कितना पुराना है?

निर्माण लगभग 3000 ईसा पूर्व शुरू हुआ, इसलिए इसका सबसे पुराना हिस्सा लगभग 5,000 साल पुराना है। बड़े सार्सेन लगभग 2500 ईसा पूर्व खड़े हुए, यानी नालंदा जैसे प्राचीन भारतीय विश्वविद्यालयों से भी बहुत पहले।

क्या स्टोनहेंज एलियंस या ड्रूइड ने बनाया?

नहीं। इसे पाषाण युग के किसान समुदायों ने स्लेज, रस्सियों, लकड़ी और बड़ी टोलियों की मदद से बनाया। ड्रूइड लगभग 2,000 साल बाद आए।

स्टोनहेंज को आज भी रहस्य क्यों कहते हैं?

हम जानते हैं कि यह कब बना और इसके पत्थर कहाँ से आए। पर बनाने वालों ने कुछ लिखकर नहीं छोड़ा, इसलिए इसे बनाने का असली कारण आज भी बहस का विषय है।

स्रोत: इंग्लिश हेरिटेज: स्टोनहेंज का इतिहास और यूनेस्को विश्व धरोहर केंद्र: स्टोनहेंज, एवबरी और संबंधित स्थल।

स्रोत

  1. English Heritage — Stonehenge (नए टैब में खुलता है)
  2. UNESCO — Stonehenge, Avebury and Associated Sites (नए टैब में खुलता है)
  3. Nature — origin of the Altar Stone (2024) (नए टैब में खुलता है)

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