टूटता तारा क्या है? उल्का वर्षा कब और कैसे देखें
टूटता तारा असल में तारा नहीं, अंतरिक्ष की धूल है जो वायुमंडल में जल उठती है। जानिए उल्का, उल्कापिंड और साल की बड़ी उल्का वर्षाओं की तारीख़ें।
रोहित टंडन · 13 अक्टूबर 2026 · 4 मिनट
रात के आसमान में अचानक एक चमकीली लकीर खिंचती है और पल भर में ग़ायब हो जाती है — लोग कहते हैं, "टूटता तारा दिखा, कोई इच्छा माँग लो!" लेकिन सच यह है कि यह कोई तारा नहीं होता। तारे सूरज जैसे विशाल गोले हैं और वे टूटकर नहीं गिरते। यहाँ जानिए वह चमक असल में क्या है, और साल में कब ऐसी दर्जनों लकीरें एक साथ दिखती हैं।
उल्का, उल्काभ और उल्कापिंड
| नाम | क्या है |
|---|---|
| उल्काभ (मीटियरॉइड) | अंतरिक्ष में घूमता चट्टान या धातु का छोटा टुकड़ा — रेत के दाने से लेकर पत्थर जितना |
| उल्का (मीटियर) | जब वह टुकड़ा पृथ्वी के वायुमंडल में घुसकर जल उठता है, तो दिखने वाली चमकती लकीर — यही "टूटता तारा" है |
| उल्कापिंड (मीटियोराइट) | वह टुकड़ा जो पूरी तरह जले बिना ज़मीन तक पहुँच जाए |
उल्काभ बहुत तेज़ — 11 से 72 किलोमीटर प्रति सेकंड — की रफ़्तार से वायुमंडल में घुसते हैं। हवा से रगड़ और दबाव के कारण वे लगभग 80 से 120 किलोमीटर की ऊँचाई पर गर्म होकर चमकने लगते हैं और ज़्यादातर वहीं जलकर राख हो जाते हैं। ज़्यादातर "टूटते तारे" रेत के दाने जितने छोटे टुकड़ों से बनते हैं।
उल्का वर्षा क्यों होती है?
धूमकेतु (पुच्छल तारे) जब सूरज के पास से गुज़रते हैं, तो अपने पीछे धूल और कंकड़ों की लंबी पट्टी छोड़ जाते हैं। साल के कुछ तय दिनों में पृथ्वी अपनी कक्षा में घूमते हुए ऐसी पट्टी से गुज़रती है। तब एक घंटे में दर्जनों उल्काएँ आसमान के एक ही हिस्से से आती दिखती हैं — इसे उल्का वर्षा कहते हैं। हर उल्का वर्षा का नाम उस तारामंडल पर रखा जाता है, जिसकी दिशा से उल्काएँ आती दिखती हैं।
| उल्का वर्षा | चरम (लगभग) | किससे बनी |
|---|---|---|
| क्वाड्रेंटिड्स | 3–4 जनवरी | एक क्षुद्रग्रह का मलबा |
| पर्सिड्स | 12–13 अगस्त | धूमकेतु स्विफ़्ट–टटल |
| ओरियोनिड्स | 20–22 अक्टूबर | हैली धूमकेतु |
| लियोनिड्स | 17–18 नवंबर | धूमकेतु टेम्पल–टटल |
| जेमिनिड्स | 13–14 दिसंबर | क्षुद्रग्रह 3200 फ़ेथॉन |
क्या आप जानते हैं? अक्टूबर के आख़िरी हफ़्तों में दिखने वाली ओरियोनिड्स उल्का वर्षा प्रसिद्ध हैली धूमकेतु के छोड़े मलबे से बनती है। हैली धूमकेतु ख़ुद लगभग हर 76 साल में दिखता है — पिछली बार 1986 में और अगली बार 2061 में।
उल्का वर्षा कैसे देखें
- शहर की रोशनी से दूर, खुले और अँधेरे स्थान पर जाएँ।
- आधी रात के बाद से सुबह होने तक का समय सबसे अच्छा होता है।
- दूरबीन या टेलीस्कोप की ज़रूरत नहीं — इनसे आसमान का छोटा हिस्सा दिखता है। नंगी आँखें ही सबसे अच्छी हैं।
- आँखों को अँधेरे के अनुसार ढलने में 20–30 मिनट लगते हैं; इस दौरान मोबाइल की स्क्रीन न देखें।
- चाँद जितना कम चमकीला हो, उतनी ज़्यादा उल्काएँ दिखेंगी।
जब उल्कापिंड ज़मीन तक पहुँचे
कुछ बड़े टुकड़े पूरी तरह नहीं जल पाते और ज़मीन पर गिरते हैं। महाराष्ट्र की लोनार झील हज़ारों साल पहले एक उल्कापिंड के टकराने से बने गड्ढे में बनी है — पढ़ें स्कूल असेंबली के लिए 20 रोचक तथ्य। अब तक मिला सबसे बड़ा उल्कापिंड नामीबिया का "होबा" है, जिसका वज़न लगभग 60 टन है। 2013 में रूस के चेल्याबिंस्क शहर के ऊपर एक उल्कापिंड हवा में फटा था, जिसके धमाके से हज़ारों खिड़कियों के काँच टूट गए थे।
मुख्य बिंदु
- "टूटता तारा" असल में अंतरिक्ष की धूल या कंकड़ है, जो वायुमंडल में जल उठता है।
- जलती लकीर उल्का है; ज़मीन तक पहुँचा टुकड़ा उल्कापिंड।
- उल्का वर्षा तब होती है जब पृथ्वी किसी धूमकेतु के छोड़े मलबे से गुज़रती है।
- ओरियोनिड्स (अक्टूबर) हैली धूमकेतु से और जेमिनिड्स (दिसंबर) एक क्षुद्रग्रह से जुड़ी हैं।
- उल्का वर्षा नंगी आँखों से, अँधेरी जगह पर, आधी रात के बाद सबसे अच्छी दिखती है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
क्या टूटता तारा सच में तारा होता है?
नहीं। यह अंतरिक्ष का छोटा टुकड़ा है जो वायुमंडल में जलकर चमकता है। असली तारे सूरज जैसे विशाल गोले हैं।
क्या उल्का वर्षा देखना ख़तरनाक है?
बिल्कुल नहीं। लगभग सभी उल्काएँ 80 किलोमीटर से ऊपर ही जलकर ख़त्म हो जाती हैं।
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