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शून्य की खोज किसने की: भारत की दुनिया को सबसे बड़ी देन

शून्य की खोज की कहानी: बख़शाली पांडुलिपि के बिंदु, ब्रह्मगुप्त के शून्य के नियम, ग्वालियर का "0", और भारत के अंक अरब होकर यूरोप तक कैसे पहुँचे।

· 22 अक्टूबर 2026 · 4 मिनट

आज हम 10, 100 या 2026 जैसी संख्याएँ बड़ी आसानी से लिख लेते हैं, लेकिन यह संभव हुआ एक छोटे-से चिह्न से — शून्य। अगर शून्य न होता, तो न बड़ी संख्याएँ आसानी से लिखी जातीं, न कंप्यूटर बनते। शून्य की खोज और उसे एक पूरी संख्या की तरह इस्तेमाल करने का श्रेय प्राचीन भारत के गणितज्ञों को जाता है।

शून्य के दो रूप

शून्य के इतिहास को समझने के लिए दो बातें अलग करनी ज़रूरी हैं। पहली — स्थान-धारक (प्लेसहोल्डर), यानी किसी ख़ाली जगह को दिखाने वाला चिह्न, जैसे 205 में बीच का शून्य, जो बताता है कि दहाई का स्थान ख़ाली है। दूसरी — संख्या के रूप में शून्य, जिसके साथ जोड़ना, घटाना और गुणा करना संभव हो। प्राचीन बेबीलोन के लोगों के पास पहला रूप था, और मध्य अमेरिका की माया सभ्यता ने भी अपने ढंग से शून्य का इस्तेमाल किया। लेकिन दस अंकों वाली स्थानीय मान प्रणाली और शून्य को पूरी संख्या मानकर उसके नियम बनाने का काम भारत में हुआ।

भारत में शून्य की यात्रा

समयकहाँ / कौनक्या हुआ
लगभग 3री–2री सदी ईसा पूर्वपिंगलछंदशास्त्र में "शून्य" शब्द का प्रयोग
लगभग 3री–4थी सदी ईस्वी (कुछ पन्ने)बख़शाली पांडुलिपिशून्य के लिए बिंदु (•) का प्रयोग
499 ईस्वीआर्यभटदस-गुना बढ़ते स्थानीय मान का वर्णन
628 ईस्वीब्रह्मगुप्त, "ब्राह्मस्फुटसिद्धांत"शून्य के साथ गणित के नियम पहली बार
876 ईस्वीग्वालियर, चतुर्भुज मंदिरशिलालेख में गोल "0" का प्रयोग

ब्रह्मगुप्त के शून्य के नियम

628 ईस्वी में ब्रह्मगुप्त ने अपने ग्रंथ "ब्राह्मस्फुटसिद्धांत" में पहली बार शून्य के साथ गणना के नियम लिखे:

  • किसी संख्या में शून्य जोड़ने या घटाने पर वही संख्या बचती है (5 + 0 = 5, 5 − 0 = 5)।
  • किसी संख्या को शून्य से गुणा करने पर शून्य मिलता है (5 × 0 = 0)।
  • किसी संख्या को उसी संख्या में से घटाने पर शून्य मिलता है (5 − 5 = 0)।
  • उन्होंने ऋणात्मक संख्याओं (क़र्ज़) और धनात्मक संख्याओं (धन) के नियम भी दिए।

शून्य से भाग देने पर ब्रह्मगुप्त का उत्तर आज के गणित से मेल नहीं खाता; बाद में भास्कराचार्य (भास्कर द्वितीय) ने इसे "खहर" — अनंत जैसी राशि — कहा। आज के गणित में किसी संख्या को शून्य से भाग देना "अपरिभाषित" माना जाता है।

क्या आप जानते हैं? 2017 में ऑक्सफ़र्ड विश्वविद्यालय ने बख़शाली पांडुलिपि की कार्बन डेटिंग कराई, जिसमें इसके कुछ पन्ने तीसरी–चौथी सदी के पाए गए। इसमें शून्य के लिए इस्तेमाल हुआ बिंदु शून्य के सबसे पुराने लिखित प्रमाणों में गिना गया, हालाँकि इसकी तारीख़ों पर विद्वानों में बहस भी है। यह पांडुलिपि 1881 में आज के पाकिस्तान के बख़शाली गाँव में मिली थी।

भारत से अरब और यूरोप तक

लगभग 9वीं सदी में बग़दाद के गणितज्ञ मुहम्मद इब्न मूसा अल-ख़्वारिज़्मी ने भारतीय अंकों पर किताब लिखी, जिससे यह प्रणाली अरब दुनिया में फैली। 1202 में इटली के गणितज्ञ फ़िबोनाची ने अपनी किताब "लिबर अबाची" के ज़रिए इसे यूरोप तक पहुँचाया। इसीलिए आज इन अंकों को "हिंदू-अरबी अंक" कहा जाता है। संस्कृत का "शून्य" अरबी में "सिफ़्र" बना, और उसी से अंग्रेज़ी के "ज़ीरो" और "साइफ़र" शब्द निकले। "एल्गोरिदम" शब्द भी अल-ख़्वारिज़्मी के नाम से आया है।

शून्य के बिना आज की दुनिया

  • रोमन अंकों में शून्य नहीं है, इसलिए उनसे बड़ी संख्याओं का गुणा-भाग बहुत कठिन था।
  • कंप्यूटर की भाषा "बाइनरी" केवल दो अंकों, 0 और 1, पर टिकी है।
  • बीजगणित, कैलकुलस और आधुनिक विज्ञान शून्य और स्थानीय मान प्रणाली के बिना संभव नहीं होते।

भारत के महान गणितज्ञों के बारे में पढ़ें: श्रीनिवास रामानुजन और गणित की हस्तियाँ। प्राचीन भारत की और उपलब्धियाँ: प्राचीन भारत के रोचक तथ्य।

मुख्य बिंदु

  • शून्य को पूरी संख्या मानकर उसके नियम बनाने का काम भारत में हुआ।
  • ब्रह्मगुप्त ने 628 ईस्वी में शून्य के साथ गणना के नियम लिखे।
  • बख़शाली पांडुलिपि में शून्य के लिए बिंदु का प्रयोग मिलता है।
  • ग्वालियर के चतुर्भुज मंदिर (876 ईस्वी) के शिलालेख में गोल "0" है।
  • भारतीय अंक अरब होकर यूरोप पहुँचे और "हिंदू-अरबी अंक" कहलाए।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

शून्य की खोज किसने की?

शून्य किसी एक व्यक्ति की खोज नहीं है; भारत में सदियों में इसका विकास हुआ, और ब्रह्मगुप्त ने 628 ईस्वी में पहली बार इसके साथ गणना के नियम लिखे।

"ज़ीरो" शब्द कहाँ से आया?

संस्कृत के "शून्य" से, जो अरबी में "सिफ़्र" बना और फिर यूरोप में "ज़ीरो"।

और लेख: विज्ञान · सामान्य ज्ञान के प्रश्न।

स्रोत

  1. Bodleian Libraries, University of Oxford — Bakhshali manuscript (नए टैब में खुलता है)
  2. Encyclopaedia Britannica — Zero (नए टैब में खुलता है)
  3. NCERT Mathematics — "Knowing Our Numbers" (नए टैब में खुलता है)
शून्य की खोज किसने की: भारत की दुनिया को सबसे बड़ी देन

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