आसमानी बिजली क्यों चमकती है? कारण और बचाव के उपाय
बादलों में बिजली क्यों चमकती है, गरज क्यों होती है और भारत में वज्रपात से कैसे बचें — दामिनी ऐप, 30-30 का नियम और ज़रूरी सावधानियाँ।
रोहित टंडन · 13 अक्टूबर 2026 · 4 मिनट
बारिश के मौसम में काले बादलों के बीच अचानक तेज़ चमक और फिर ज़ोरदार गड़गड़ाहट — यह प्रकृति का सबसे शक्तिशाली नज़ारा है। बिजली क्यों चमकती है, यह सवाल हज़ारों साल से इंसानों को हैरान करता रहा है। आज विज्ञान इसका जवाब जानता है, और यह भी कि हम इससे कैसे बच सकते हैं। भारत में हर साल हज़ारों लोगों की जान वज्रपात से जाती है, इसलिए बचाव के नियम जानना बहुत ज़रूरी है।
बादलों में बिजली कैसे बनती है?
गरज-चमक वाले ऊँचे बादल (कपासी-वर्षी या क्यूम्यलोनिम्बस बादल) कई किलोमीटर ऊँचे होते हैं। इनके अंदर तेज़ हवाएँ पानी की बूँदों, बर्फ़ के क्रिस्टलों और ओलों जैसे कणों को ऊपर-नीचे उछालती हैं। आपस में टकराने से इन कणों पर विद्युत आवेश (चार्ज) आ जाता है — हल्के कण धनात्मक आवेश लेकर ऊपर चले जाते हैं और भारी कण ऋणात्मक आवेश लेकर नीचे रह जाते हैं। जब यह अंतर बहुत बढ़ जाता है, तो हवा उसे रोक नहीं पाती और पल भर में विशाल चिंगारी के रूप में आवेश बहता है — यही आसमानी बिजली है। बिजली बादल के अंदर, दो बादलों के बीच या बादल से ज़मीन तक गिर सकती है।
गरज क्यों होती है?
बिजली की चमक हवा को पल भर में लगभग 30,000 डिग्री सेल्सियस तक गर्म कर देती है — सूरज की सतह से कई गुना ज़्यादा। इतनी गर्मी से हवा अचानक और तेज़ी से फैलती है, जिससे एक ज़ोरदार धमाके जैसी आवाज़ होती है — यही गरज है। प्रकाश ध्वनि से बहुत तेज़ चलता है, इसलिए चमक पहले दिखती है और गरज बाद में सुनाई देती है। चमक और गरज के बीच के सेकंड गिनकर 3 से भाग देने पर बिजली की लगभग दूरी किलोमीटर में मिल जाती है — यह तरीका भौतिक विज्ञान के 12 रोचक तथ्यों में भी है।
क्या आप जानते हैं? "बिजली एक जगह दो बार नहीं गिरती" — यह ग़लत कहावत है। ऊँची इमारतों पर बिजली बार-बार गिरती है; न्यूयॉर्क की एम्पायर स्टेट बिल्डिंग पर हर साल औसतन 20 से ज़्यादा बार बिजली गिरती है।
भारत में वज्रपात: बड़ा ख़तरा
राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के आँकड़ों के अनुसार भारत में प्राकृतिक आपदाओं से होने वाली मौतों में सबसे बड़ा हिस्सा आसमानी बिजली का है — हर साल लगभग ढाई हज़ार से तीन हज़ार लोग इसकी चपेट में आकर जान गँवाते हैं। ज़्यादातर पीड़ित खेतों में काम करने वाले किसान और मज़दूर होते हैं। ओडिशा, झारखंड, बिहार, मध्य प्रदेश और पश्चिम बंगाल जैसे राज्य इससे ज़्यादा प्रभावित होते हैं।
बचाव के उपाय
| क्या करें | क्या न करें |
|---|---|
| गरज सुनते ही किसी पक्के मकान या बंद गाड़ी में जाएँ | पेड़ के नीचे शरण न लें |
| खुले में फँसें तो पैरों को सटाकर उकड़ूँ बैठें, सिर नीचे रखें | ज़मीन पर लेटें नहीं |
| पानी, तालाब और नदी से दूर रहें | बिजली के खंभों और धातु की बाड़ के पास न रहें |
| आख़िरी गरज के 30 मिनट बाद ही बाहर निकलें | तूफ़ान के दौरान तार वाले फ़ोन और नहाने-धोने से बचें |
बंद कार बिजली से सुरक्षित मानी जाती है, क्योंकि उसका धातु का ढाँचा बिजली को बाहर से ही ज़मीन तक पहुँचा देता है। भारत सरकार के भारतीय उष्णदेशीय मौसम विज्ञान संस्थान (IITM), पुणे का "दामिनी" ऐप आसपास के इलाक़े में बिजली गिरने की चेतावनी पहले से देता है। घरों और ऊँची इमारतों पर लगा तड़ित-चालक (लाइटनिंग कंडक्टर) बिजली को सुरक्षित रूप से ज़मीन में पहुँचा देता है — इसका आविष्कार 1750 के दशक में अमेरिकी वैज्ञानिक बेंजामिन फ़्रैंकलिन ने किया था।
मुख्य बिंदु
- ऊँचे बादलों में कणों के टकराने से आवेश बनते हैं; उनके बहने से बिजली चमकती है।
- बिजली हवा को लगभग 30,000 डिग्री सेल्सियस तक गर्म करती है; हवा के फैलने से गरज होती है।
- भारत में हर साल हज़ारों लोगों की मौत वज्रपात से होती है।
- पेड़ के नीचे न खड़े हों; पक्के मकान या बंद गाड़ी सबसे सुरक्षित हैं।
- "दामिनी" ऐप बिजली गिरने की पहले से चेतावनी देता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
बिजली पहले दिखती है और गरज बाद में क्यों सुनाई देती है?
क्योंकि प्रकाश लगभग 3 लाख किलोमीटर प्रति सेकंड और ध्वनि केवल लगभग 343 मीटर प्रति सेकंड चलती है।
क्या मोबाइल फ़ोन से बिजली गिरती है?
नहीं, मोबाइल बिजली को आकर्षित नहीं करता। असली ख़तरा खुले मैदान, ऊँची जगह या पानी के पास होना है।
और पढ़ें: विज्ञान के 15 रोचक तथ्य · विज्ञान · विज्ञान के प्रश्न।
स्रोत
उपयोगी लगा? शेयर करें।