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आशापूर्णा देवी

Ashapoorna Devi

साहित्य व लेखन पश्चिम बंगाल इतिहास के महान व्यक्तित्व

आशापूर्णा देवी भारत से बांग्ला भाषा की कवयित्री और उपन्यासकार थीं, जिन्होंने १३ वर्ष की अवस्था से लेखन प्रारम्भ किया और आजीवन साहित्य रचना से जुड़ीं रहीं। गृहस्थ जीवन के सारे दायित्व को निभाते हुए उन्होंने लगभग दो सौ कृतियाँ लिखीं, जिनमें से अनेक कृतियों का भारत की लगभग सभी भाषाओं में अनुवाद हो चुका है।

जन्म

8 जनवरी 1909

निधन

12 जुलाई 1995

सम्मान

साहित्य अकादमी फ़ैलोशिप, 1994

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मुख्य तथ्य

जन्म
8 जनवरी 1909, कोलकाता
निधन
12 जुलाई 1995, कोलकाता
जन्म राज्य
कोलकाता, पश्चिम बंगाल
क्षेत्र
साहित्य व लेखन
पेशा
भारतीय लेखक
लिंग
महिला

जीवनी

आशापूर्णा देवी भारत से बांग्ला भाषा की कवयित्री और उपन्यासकार थीं, जिन्होंने १३ वर्ष की अवस्था से लेखन प्रारम्भ किया और आजीवन साहित्य रचना से जुड़ीं रहीं। गृहस्थ जीवन के सारे दायित्व को निभाते हुए उन्होंने लगभग दो सौ कृतियाँ लिखीं, जिनमें से अनेक कृतियों का भारत की लगभग सभी भाषाओं में अनुवाद हो चुका है। उनके सृजन में नारी जीवन के विभिन्न पक्ष, पारिवारिक जीवन की समस्यायें, समाज की कुंठा और लिप्सा अत्यंत पैनेपन के साथ उजागर हुई हैं। उनकी कृतियों में नारी का वयक्ति-स्वातन्त्र्य और उसकी महिमा नई दीप्ति के साथ मुखरित हुई है। उनकी प्रमुख रचनाएँ हैं स्वर्णलता, प्रथम प्रतिश्रुति, प्रेम और प्रयोजन, बकुलकथा, गाछे पाता नील, जल, आगुन आदि। उन्हें १९७६ में ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।यह पुरस्कार प्राप्त करने वाली वे पहली महिला हैं।

विकिपीडिया (CC BY-SA 4.0) पर आधारित सारांश, रोचक दुनिया की संपादकीय टीम द्वारा जाँचा गया।

जीवन यात्रा

  1. 1909कोलकाता में जन्म
  2. 1976ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित
  3. 1976Padma Shri in literature and education से सम्मानित
  4. 1994साहित्य अकादमी फ़ैलोशिप से सम्मानित
  5. 1995कोलकाता में निधन
स्रोत व लाइसेंस विकिडेटा से अंतिम मिलान: 27 सितंबर 2026
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