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गोविन्द शंकर कुरुप

गोविन्द शंकर कुरुप

G. Sankara Kurup

साहित्य व लेखन केरल इतिहास के महान व्यक्तित्व

गोविन्द शंकर कुरुप या जी शंकर कुरुप मलयालम भाषा के प्रसिद्ध कवि हैं। उनका जन्म केरल के एक गाँव नायतोट्ट में हुआ था।

जन्म

3 जून 1901

निधन

2 फ़रवरी 1978

सम्मान

पद्म भूषण

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मुख्य तथ्य

जन्म
3 जून 1901, Nayathod
निधन
2 फ़रवरी 1978, तिरुवनन्तपुरम
जन्म राज्य
Nayathod, केरल
क्षेत्र
साहित्य व लेखन
पेशा
ज्ञानपीठ पुरस्कार के पहले मलयाली विजेता
लिंग
पुरुष

जीवनी

गोविन्द शंकर कुरुप या जी शंकर कुरुप मलयालम भाषा के प्रसिद्ध कवि हैं। उनका जन्म केरल के एक गाँव नायतोट्ट में हुआ था। ३ साल की उम्र से उनकी शिक्षा आरंभ हुई। ८ वर्ष तक की आयु में वे 'अमर कोश' 'सिद्धरुपम' 'श्रीरामोदन्तम' आदि ग्रन्थ कंठस्थ कर चुके थे और रघुवंश महाकाव्य के कई श्लोक पढ चुके थे। ११ वर्ष की आयु में महाकवि कुंजिकुट्टन के गाँव आगमन पर वे कविता की ओर उन्मुख हुये। तिरुविल्वमला में अध्यापन कार्य करते हुये अँग्रेजी भाषा तथा साहित्य का अध्ययन किया। अँग्रेजी साहित्य इनको गीति के आलोक की ओर ले गया। उनकी प्रसिद्ध रचना ओटक्कुष़ल
अर्थात बाँसुरी भारत सरकार द्वारा दिए जाने वाले साहित्य के सर्वोच्च पुरस्कार ज्ञानपीठ द्वारा सम्मानित हुई।
इनके द्वारा रचित एक कविता–संग्रह विश्वदर्शनम् के लिये उन्हें सन् 1963 में साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

विकिपीडिया (CC BY-SA 4.0) पर आधारित सारांश, रोचक दुनिया की संपादकीय टीम द्वारा जाँचा गया।

जीवन यात्रा

  1. 1901Nayathod में जन्म
  2. 1963साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित
  3. 1965ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित
  4. 1978तिरुवनन्तपुरम में निधन
स्रोत व लाइसेंस विकिडेटा से अंतिम मिलान: 27 सितंबर 2026
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