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इसका अर्थ
आंबेडकर का मानना था कि जिस समाज की महिलाएँ पीछे हों, वह ख़ुद को प्रगतिशील नहीं कह सकता। महिलाओं की शिक्षा, अधिकार और आज़ादी ही प्रगति का सच्चा पैमाना है।
स्रोत
Speech at the All-India Depressed Classes Women’s Conference, Nagpur, 20 July 1942