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पोस्टर: “जय जवान, जय किसान।”

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इसका अर्थ

लाल बहादुर शास्त्री ने 1965 में यह नारा सीमा की रक्षा करने वाले सैनिक और देश का पेट भरने वाले किसान के सम्मान में दिया — भारत की ताक़त के दो स्तंभ।

स्रोत

Slogan given at a public meeting in Delhi, 1965

जहाँ यह दर्ज है — en.wikipedia.org ↗

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“इतिहास में ऐसा क्षण कभी-कभार ही आता है, जब हम पुराने से नए की ओर क़दम बढ़ाते हैं, जब एक युग का अंत होता है, और जब लंबे समय … इतिहास में ऐसा क्षण कभी-कभार ही आता है, जब हम पुराने से नए की ओर क़दम बढ़ाते हैं, जब एक युग का अंत होता है, और जब लंबे समय से दबी हुई एक राष्ट्र की आत्मा को अभिव्यक्ति मिलती है।
जवाहरलाल नेहरू