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पटाखों में रंग कैसे आते हैं? लाल, हरे और नीले रंग का विज्ञान

पटाखों के रंगों के पीछे धातु-लवण और गर्मी का विज्ञान काम करता है। स्ट्रॉन्शियम लाल, बेरियम हरा और तांबे के यौगिक नीला रंग देते हैं, लेकिन चमकीला नीला रंग बनाना सबसे कठिन होता है।

· 1 नवंबर 2026 · 8 मिनट

पटाखों में रंग कैसे आते हैं? इसका जवाब धातु-लवण (metal salts), गर्मी और परमाणुओं से निकलने वाले प्रकाश में छिपा है। स्ट्रॉन्शियम (strontium) के यौगिक लाल, बेरियम (barium) के यौगिक हरा और तांबे (copper) के यौगिक नीला रंग पैदा करते हैं, जबकि दूसरे पदार्थ पीला, नारंगी, बैंगनी और चाँदी जैसा प्रभाव देते हैं।

पटाखों में अलग-अलग रंगों की रोशनी कैसे पैदा होती है?

जब पटाखा जलता है, तो रासायनिक मिश्रण से निकलने वाली ऊष्मा (heat) उसके रंग पैदा करने वाले पदार्थों के परमाणुओं को ऊर्जा देती है। परमाणु में मौजूद इलेक्ट्रॉन (electron) ऊर्जा ग्रहण करके ऊँचे ऊर्जा स्तर (energy level) पर पहुँच सकते हैं, जिसे उत्तेजित अवस्था (excited state) कहते हैं। जब वे वापस कम ऊर्जा वाली अवस्था में आते हैं, तो ऊर्जा का कुछ हिस्सा प्रकाश के रूप में बाहर निकलता है।

हर तत्व से निकलने वाले प्रकाश की तरंगदैर्घ्य (wavelength) अलग हो सकती है, इसलिए हमारी आँखों को अलग-अलग रंग दिखाई देते हैं। इसी कारण पटाखे में इस्तेमाल होने वाले रासायनिक यौगिक (chemical compounds) बदलने पर उसकी रोशनी का रंग भी बदल सकता है, भले ही पटाखे की ऊँचाई या आकार लगभग वैसा ही हो।

यह प्रक्रिया इंद्रधनुष बनने से अलग है, जिसमें पानी की बूँदें सूर्य के प्रकाश को अलग-अलग रंगों में बाँटती हैं। पटाखों में रंगीन प्रकाश गर्मी और रासायनिक प्रतिक्रियाओं से पैदा होता है। रोजमर्रा की चीजों के विज्ञान से जुड़ी ऐसी ही जानकारियों के लिए पाठक रोचक तथ्यों का संग्रह देख सकते हैं।

कौन-से लवण लाल, हरा, नीला और दूसरा रंग देते हैं?

अलग-अलग धातुओं के यौगिक इसलिए चुने जाते हैं, क्योंकि गर्म होने पर वे विशेष रंगों का प्रकाश निकालते हैं। व्यावसायिक पटाखों में इन रंग पैदा करने वाले पदार्थों को अन्य अवयवों के साथ इस्तेमाल किया जाता है, ताकि आसमान में कभी लाल रोशनी दिखाई दे और कभी बैंगनी या सुनहरी चमक।

रंगरंग देने वाला सामान्य पदार्थदिखाई देने वाला प्रभाव
लालस्ट्रॉन्शियम के लवणगहरा या चमकीला लाल प्रकाश
हराबेरियम के लवणचमकीले हरे बिंदु
नीलातांबे के यौगिकनीला या नीला-हरा प्रकाश
पीलासोडियम (sodium) के यौगिकतेज पीली रोशनी
नारंगीकैल्शियम (calcium) के यौगिकनारंगी या नारंगी-लाल चमक
बैंगनीस्ट्रॉन्शियम और तांबे के यौगिकों का संयोजनलाल और नीले प्रकाश का मिश्रण
सफेद या चाँदी जैसामैग्नीशियम (magnesium), एल्युमिनियम (aluminium) या टाइटेनियम जैसे गर्म धातु-पदार्थसफेद चमक या चाँदी जैसी चिंगारियाँ

ये रंग पदार्थों के सामान्य गुण बताते हैं, लेकिन हर पटाखे में बिल्कुल एक जैसी छटा मिलने की गारंटी नहीं देते। वास्तविक रंग इस्तेमाल किए गए यौगिकों, उनकी मात्रा, जलने की परिस्थितियों और आसपास की रोशनी पर निर्भर करता है। रसोई में इस्तेमाल होने वाले साधारण नमक में भी सोडियम होता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि नमक कमरे के तापमान पर अपने आप पीली रोशनी देने लगेगा।

रंग केवल धातु के नाम से तय नहीं होता; उस धातु का कौन-सा यौगिक इस्तेमाल किया गया है और वह किन परिस्थितियों में प्रकाश छोड़ता है, यह भी मायने रखता है। इसी वजह से पटाखों का विज्ञान सामान्य ज्ञान और स्कूली विज्ञान की चर्चा के लिए अच्छा विषय है। पाठक रंगों और तत्वों के संबंध याद करने के लिए रोचकदुनिया की सामान्य ज्ञान प्रश्नोत्तरी भी हल कर सकते हैं।

नीला रंग बनाना सबसे कठिन क्यों होता है?

नीले पटाखे बनाना कठिन है, क्योंकि तांबे पर आधारित रंग देने वाले यौगिकों को साफ और चमकीला नीला प्रकाश पैदा करने के लिए सही तापमान (temperature) चाहिए। यदि मिश्रण बहुत गर्म हो जाए, तो रंग पैदा करने वाले यौगिक टूट सकते हैं या दूसरे गर्म पदार्थों की तेज रोशनी नीले रंग को दबा सकती है।

इसके विपरीत, तापमान बहुत कम होने पर नीला प्रकाश फीका या कमजोर दिखाई दे सकता है। चुनौती ऐसी स्थिति बनाने की होती है जिसमें रोशनी पर्याप्त चमकीली हो, लेकिन नीला रंग पैदा करने के लिए जरूरी रासायनिक परिस्थितियाँ भी बनी रहें। इसलिए चमकीला नीला रंग तैयार करने के लिए अनुभवी निर्माताओं को मिश्रण और तापमान पर सावधानी से नियंत्रण रखना पड़ता है।

इसी कारण नीला पटाखा कभी-कभी लाल या हरे पटाखे जितना चमकीला नहीं दिखाई देता। देखने वाले की आँखें, पटाखे से दूरी, धुआँ और आसपास की रोशनी भी रंग की स्पष्टता बदल सकते हैं। इसलिए किसी यौगिक की नीली रोशनी पैदा करने की क्षमता ही अंतिम दृश्य को तय नहीं करती।

क्या आप जानते हैं? बैंगनी पटाखों का रंग अक्सर लाल और नीली रोशनी पैदा करने वाले यौगिकों को मिलाकर बनाया जाता है। यानी बैंगनी चमक के पीछे कई बार एक अकेला पदार्थ नहीं, बल्कि दो अलग-अलग रंग पैदा करने वाली रासायनिक प्रणालियाँ होती हैं।

पटाखों में रंगों के साथ अलग-अलग आकृतियाँ कैसे बनती हैं?

आसमान में दिखाई देने वाले रंगीन बिंदुओं को पटाखों की भाषा में स्टार्स कहा जाता है। इनमें रोशनी पैदा करने वाले पदार्थ होते हैं, और एक व्यावसायिक पटाखे के खोल में इनकी व्यवस्था इस बात को प्रभावित करती है कि विस्फोट के बाद रंगीन प्रकाश किस तरह फैलता है।

जब पटाखा निर्धारित ऊँचाई पर पहुँचता है, तो उसकी समय-नियंत्रित व्यवस्था रंग पैदा करने वाले हिस्सों को अलग-अलग दिशाओं में फैलाती है। उनकी स्थिति और गति से गोलाकार चमक, फूल जैसी आकृति या पेड़ की शाखाओं की तरह नीचे आती लंबी सुनहरी लकीरें बन सकती हैं।

रंग और आकृति दो अलग पहलू हैं। रासायनिक संरचना प्रकाश का रंग तय करती है, जबकि हिस्सों की व्यवस्था और उनके फैलने का समय आकृति को प्रभावित करता है। दिवाली पर दो पटाखे आसमान में लगभग एक जैसे गोल घेरे बना सकते हैं, फिर भी एक लाल और दूसरा हरे या सुनहरे रंग में दिखाई दे सकता है।

रोजमर्रा की वस्तुओं और प्राकृतिक घटनाओं के काम करने का तरीका समझने के लिए पाठक रोचकदुनिया के अन्य लेख भी पढ़ सकते हैं। पीली स्ट्रीट लाइट और गर्म धातु से निकलने वाली चमक से तुलना करके समझा जा सकता है कि प्रकाश का रंग उस पदार्थ के बारे में भी जानकारी देता है, जिससे वह निकल रहा है।

पटाखों का आनंद लेते समय किन सुरक्षा बातों का ध्यान रखें?

पटाखों में ऊर्जावान रासायनिक प्रतिक्रियाएँ, बहुत अधिक गर्मी और जलने वाले पदार्थ शामिल होते हैं। इसलिए उनकी सुंदर रोशनी देखकर यह नहीं मानना चाहिए कि उन्हें छूना या उनके पास जाना सुरक्षित है। व्यवस्थित आतिशबाजी को सुरक्षित दूरी से देखें और स्थानीय नियमों तथा आयोजन के जिम्मेदार लोगों के निर्देशों का पालन करें।

पटाखे के भीतर के रसायन देखने के लिए उसे कभी न खोलें और अलग-अलग रंग बनाने वाले पदार्थों को घर पर मिलाने की कोशिश न करें। यदि कोई पटाखा नहीं जलता, तो उसके पास जाकर दोबारा जलाने का प्रयास न करें। मानसून की बारिश से गीले हुए पटाखे को सुखाने की कोशिश भी न करें; उसे संभालने और निपटाने के लिए संबंधित अधिकारियों या उत्पाद पर दिए गए निर्देशों का पालन करें।

बच्चे पटाखों को छुए बिना उनका विज्ञान सीख सकते हैं और यह देख सकते हैं कि अलग-अलग धमाकों में अलग रंग क्यों दिखाई देते हैं। दिवाली के किसी प्रदर्शन को देखते समय एक सरल सवाल पूछा जा सकता है: एक ही रात के आसमान में लाल, हरा, पीला और नीला प्रकाश कैसे दिखाई देता है? इसका उत्तर अलग-अलग रासायनिक यौगिकों और उनसे निकलने वाले प्रकाश में मिलता है।

मुख्य बिंदु

  • पटाखों के रंग गर्म होने पर धातु के यौगिकों से निकलने वाले प्रकाश के कारण बनते हैं।
  • स्ट्रॉन्शियम के यौगिक लाल, बेरियम के यौगिक हरा और तांबे के यौगिक नीला रंग देते हैं।
  • सोडियम के यौगिक पीला और कैल्शियम के यौगिक सामान्यतः नारंगी रंग पैदा करते हैं।
  • लाल और नीला रंग पैदा करने वाले यौगिकों को मिलाकर बैंगनी प्रभाव बनाया जा सकता है।
  • नीला रंग चमकीला बनाने के लिए तापमान की सही सीमा बनाए रखना जरूरी होता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पटाखों के रंग अलग-अलग क्यों होते हैं?

पटाखों में मौजूद अलग-अलग धातु-यौगिक गर्म होने पर विशेष रंगों का प्रकाश छोड़ते हैं। इसी वजह से कोई पटाखा लाल, हरा, नीला, पीला या किसी दूसरे रंग में दिखाई देता है।

पटाखों में नीला रंग कौन-सा रसायन पैदा करता है?

नीला रंग पैदा करने के लिए आमतौर पर तांबे के यौगिक इस्तेमाल किए जाते हैं। तापमान को सावधानी से नियंत्रित करना पड़ता है, क्योंकि बहुत अधिक गर्मी से मनचाहा नीला प्रभाव कमजोर या बदल सकता है।

क्या लाल, हरे और नीले रंग को मिलाकर पटाखों के सभी रंग बनाए जा सकते हैं?

नहीं, क्योंकि पटाखों में रंग केवल रंगीन पेंट मिलाने से नहीं बनते, बल्कि विशेष यौगिकों से निकलने वाले प्रकाश पर निर्भर करते हैं। कुछ प्रभाव अलग-अलग रंग पैदा करने वाले पदार्थों को मिलाकर बनते हैं, जबकि पीले, नारंगी और सफेद प्रकाश के लिए अन्य रासायनिक प्रणालियाँ या गर्म धातुएँ इस्तेमाल की जा सकती हैं।

स्रोत: अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण की पटाखों के रंगों में इस्तेमाल होने वाले खनिजों से संबंधित जानकारी विभिन्न तत्वों और रंगों के बीच संबंध बताती है। ऑस्ट्रेलियाई परमाणु विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संगठन का पटाखों के विज्ञान पर लेख गर्म किए गए यौगिकों से प्रकाश निकलने और नीला रंग बनाना कठिन होने की वजह समझाता है।

पटाखों में रंग कैसे आते हैं? लाल, हरे और नीले रंग का विज्ञान

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