सूर्य ग्रहण और चंद्र ग्रहण कैसे होते हैं? आसान विज्ञान
सूर्य ग्रहण और चंद्र ग्रहण कैसे होते हैं, हर महीने क्यों नहीं होते, "रिंग ऑफ़ फ़ायर" और "ब्लड मून" क्या हैं, और ग्रहण सुरक्षित तरीके से कैसे देखें।
रोहित टंडन · 13 अक्टूबर 2026 · 4 मिनट
दिन में अचानक अँधेरा छा जाए या पूर्णिमा का चाँद लाल हो जाए — पुराने समय में ये नज़ारे लोगों को डरा देते थे। आज हम जानते हैं कि सूर्य ग्रहण और चंद्र ग्रहण सूरज, पृथ्वी और चाँद की छायाओं का खेल हैं, और वैज्ञानिक सैकड़ों साल आगे के ग्रहणों की सटीक तारीख़ बता सकते हैं। यहाँ इनका आसान विज्ञान दिया गया है।
सूर्य ग्रहण कैसे होता है?
जब चाँद, सूरज और पृथ्वी के बीच आ जाता है, तो चाँद की छाया पृथ्वी के कुछ हिस्से पर पड़ती है और वहाँ से सूरज पूरा या आंशिक रूप से ढका दिखता है। यह केवल अमावस्या को हो सकता है, क्योंकि तभी चाँद सूरज और पृथ्वी के बीच होता है। एक अनोखा संयोग इसे संभव बनाता है — सूरज चाँद से लगभग 400 गुना बड़ा है, लेकिन लगभग 400 गुना दूर भी, इसलिए आसमान में दोनों लगभग बराबर आकार के दिखते हैं।
| प्रकार | क्या दिखता है |
|---|---|
| पूर्ण सूर्य ग्रहण | चाँद सूरज को पूरा ढक लेता है; कुछ मिनट दिन में अँधेरा, सूरज का बाहरी "कोरोना" दिखता है |
| आंशिक सूर्य ग्रहण | सूरज का कुछ हिस्सा ढकता है |
| वलयाकार (कंकण) सूर्य ग्रहण | चाँद दूर होने से छोटा दिखता है; सूरज का किनारा आग के छल्ले ("रिंग ऑफ़ फ़ायर") जैसा चमकता है |
चंद्र ग्रहण कैसे होता है?
जब पृथ्वी, सूरज और चाँद के बीच आ जाती है, तो पृथ्वी की छाया चाँद पर पड़ती है। यह केवल पूर्णिमा को होता है। पूर्ण चंद्र ग्रहण में चाँद गायब नहीं होता, बल्कि ताँबई-लाल दिखता है, जिसे "ब्लड मून" कहते हैं। वजह यह है कि पृथ्वी के वायुमंडल से गुज़रते समय सूरज की रोशनी का नीला हिस्सा बिखर जाता है और लाल रोशनी मुड़कर चाँद तक पहुँचती है — वही विज्ञान जिससे सूर्यास्त लाल दिखता है। पढ़ें: आसमान नीला और सूर्यास्त लाल क्यों।
क्या आप जानते हैं? लगभग 1,500 साल पहले भारत के गणितज्ञ-खगोलशास्त्री आर्यभट ने अपनी रचना "आर्यभटीय" में बताया था कि ग्रहण राहु-केतु के निगलने से नहीं, बल्कि पृथ्वी और चाँद की छाया पड़ने से होते हैं। पढ़ें आर्यभट उपग्रह और उसके नाम की कहानी।
ग्रहण हर महीने क्यों नहीं होता?
हर महीने अमावस्या और पूर्णिमा आती हैं, फिर भी हर बार ग्रहण नहीं होता। कारण यह है कि चाँद की कक्षा पृथ्वी की कक्षा से लगभग 5 डिग्री झुकी हुई है। ज़्यादातर महीनों में चाँद सूरज-पृथ्वी की सीध से थोड़ा ऊपर या नीचे से निकल जाता है। ग्रहण तभी होता है जब अमावस्या या पूर्णिमा ठीक उस समय पड़े जब चाँद दोनों कक्षाओं के कटान-बिंदु (जिन्हें भारतीय परंपरा में राहु और केतु कहा गया) के पास हो। इसलिए साल में आमतौर पर 4 से 7 ग्रहण ही होते हैं।
ग्रहण सुरक्षित तरीके से कैसे देखें
- सूर्य ग्रहण को कभी नंगी आँखों से न देखें — आंशिक ग्रहण में भी सूरज की तेज़ रोशनी आँख के पर्दे (रेटिना) को स्थायी नुक़सान पहुँचा सकती है।
- धूप के चश्मे, एक्स-रे फ़िल्म या धुएँ वाले काँच सुरक्षित नहीं हैं। केवल प्रमाणित सोलर फ़िल्टर वाले चश्मे इस्तेमाल करें।
- सबसे आसान तरीका: गत्ते में छोटा छेद करके सूरज की छवि ज़मीन या काग़ज़ पर देखें (पिनहोल प्रोजेक्टर)।
- चंद्र ग्रहण पूरी तरह सुरक्षित है — इसे नंगी आँखों, दूरबीन या टेलीस्कोप से देखा जा सकता है।
भारत के यादगार ग्रहण
22 जुलाई 2009 का पूर्ण सूर्य ग्रहण इस सदी का सबसे लंबा पूर्ण सूर्य ग्रहण था; भारत के कई हिस्सों — जैसे वाराणसी, पटना और गुवाहाटी — में दिन में कुछ मिनट के लिए अँधेरा छा गया था। इसी तरह 1898 और 1868 के ग्रहणों के समय भारत में हुए अवलोकनों ने सूरज के बारे में बड़ी खोजें कीं — 1868 में भारत के गुंटूर में देखे गए ग्रहण के दौरान सूरज में एक नए तत्व के संकेत मिले, जिसे बाद में "हीलियम" नाम दिया गया।
मुख्य बिंदु
- सूर्य ग्रहण अमावस्या को होता है, जब चाँद सूरज और पृथ्वी के बीच आता है।
- चंद्र ग्रहण पूर्णिमा को होता है, जब पृथ्वी की छाया चाँद पर पड़ती है।
- चाँद की कक्षा 5 डिग्री झुकी होने से हर महीने ग्रहण नहीं होता।
- सूर्य ग्रहण को केवल प्रमाणित सोलर फ़िल्टर या पिनहोल से देखें; चंद्र ग्रहण पूरी तरह सुरक्षित है।
- आर्यभट ने ग्रहण का वैज्ञानिक कारण लगभग 1,500 साल पहले बताया था।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
सूर्य ग्रहण किस दिन होता है?
केवल अमावस्या के दिन, और चंद्र ग्रहण केवल पूर्णिमा के दिन।
पूर्ण सूर्य ग्रहण कितनी देर का होता है?
किसी एक जगह पूर्णता अधिकतम लगभग साढ़े सात मिनट तक रह सकती है; आमतौर पर यह दो-तीन मिनट की होती है।
अपना ज्ञान परखें: कक्षा 5 GK क्विज़: सौरमंडल · और पढ़ें: विज्ञान।
स्रोत
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