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भारत का पहला केबल-स्टे ब्रिज: विद्यासागर सेतु और देश के मशहूर पुल

कोलकाता का विद्यासागर सेतु (1992) भारत का पहला केबल-स्टे पुल है। केबल-स्टे और सस्पेंशन पुल में अंतर, बांद्रा-वर्ली सी लिंक, सिग्नेचर ब्रिज और अंजी खड्ड रेल पुल।

· 8 अक्टूबर 2026 · 3 मिनट

बड़ी नदियों और समुद्री खाड़ियों पर बने विशाल पुल इंजीनियरिंग के अद्भुत नमूने होते हैं। इनमें से एक ख़ास तरह का पुल है — केबल-स्टे ब्रिज, जिसके ऊँचे खंभों से निकलती तनी हुई तारें दूर से ही ध्यान खींच लेती हैं। भारत का पहला केबल-स्टे पुल कोलकाता का विद्यासागर सेतु है।

केबल-स्टे ब्रिज क्या होता है?

केबल-स्टे पुल में एक या ज़्यादा ऊँचे खंभे (पायलॉन) होते हैं। इन खंभों से सीधी, तिरछी स्टील की केबलें निकलकर पुल के डेक (सड़क वाले हिस्से) को थामती हैं। ऊपर से देखने पर ये केबलें पंखे या वीणा के तारों जैसी दिखती हैं।

सस्पेंशन पुल से अंतर

  • सस्पेंशन पुल: दो खंभों के बीच एक मोटी मुख्य केबल झूले की तरह लटकती है, और उससे लटकती छोटी केबलें डेक को थामती हैं। ऋषिकेश के लक्ष्मण झूला और राम झूला इसके जाने-पहचाने उदाहरण हैं।
  • केबल-स्टे पुल: केबलें सीधे खंभे से डेक तक जाती हैं, बीच में कोई मुख्य झूलती केबल नहीं होती। ये मध्यम लंबाई के बड़े पुलों के लिए किफ़ायती और मज़बूत होते हैं।

विद्यासागर सेतु (दूसरा हुगली पुल)

कोलकाता और हावड़ा को जोड़ने वाला विद्यासागर सेतु हुगली नदी पर बना है और 10 अक्टूबर 1992 को यातायात के लिए खोला गया। इसका नाम महान समाज सुधारक ईश्वर चंद्र विद्यासागर के नाम पर रखा गया। यह भारत का पहला केबल-स्टे पुल है, और खुलने के समय यह एशिया के सबसे लंबे केबल-स्टे पुलों में गिना जाता था। इसका मुख्य हिस्सा (बीच का फैलाव) लगभग 457 मीटर लंबा है।

क्या आप जानते हैं? हुगली नदी पर बना पहला पुल हावड़ा ब्रिज (रवींद्र सेतु, 1943) है, जो एक "कैंटिलीवर" पुल है — उसमें केबलें नहीं, बल्कि स्टील के विशाल ढाँचे हैं, और उसे बनाने में नट-बोल्ट की जगह रिवेट लगाए गए थे।

भारत के कुछ और प्रसिद्ध केबल-स्टे पुल

  • बांद्रा-वर्ली सी लिंक (2009), मुंबई: समुद्र के ऊपर बना यह पुल मुंबई के बांद्रा और वर्ली को जोड़ता है और शहर की पहचान बन चुका है।
  • सिग्नेचर ब्रिज (2018), दिल्ली: यमुना नदी पर बने इस पुल का ऊँचा, झुका हुआ खंभा दूर से दिखता है और ऊपर दर्शक दीर्घा भी बनाई गई है।
  • अंजी खड्ड पुल, जम्मू-कश्मीर: उधमपुर–श्रीनगर–बारामूला रेल परियोजना पर बना यह भारत का पहला केबल-स्टे रेल पुल है, जो गहरी खाई पर बना है।

पुल बनाना इतना कठिन क्यों?

बड़े पुलों को न सिर्फ़ अपना और वाहनों का भारी वज़न उठाना होता है, बल्कि तेज़ हवा, भूकंप, तापमान के बदलाव और नदी के बहाव को भी झेलना होता है। इसीलिए इनके डिज़ाइन में हवा की सुरंग (विंड टनल) परीक्षण, कंप्यूटर मॉडल और मज़बूत नींव पर ख़ास ध्यान दिया जाता है। समय-समय पर केबलों की जाँच और रखरखाव भी ज़रूरी होता है।

केबल-स्टे पुल के फ़ायदे

केबल-स्टे पुलों में नदी के बीच कम खंभे लगाने पड़ते हैं, जिससे जहाज़ों और नदी के बहाव में कम रुकावट आती है। इन्हें अपेक्षाकृत जल्दी बनाया जा सकता है और 200 मीटर से लेकर लगभग एक किलोमीटर तक के फैलाव के लिए ये किफ़ायती रहते हैं।

परीक्षा के लिए एक लाइन

भारत का पहला केबल-स्टे पुल: विद्यासागर सेतु (कोलकाता, 1992) · पहला केबल-स्टे रेल पुल: अंजी खड्ड (जम्मू-कश्मीर)।

और पढ़ें: दुनिया की सबसे ऊँची इमारत · आज का क्विज़।

स्रोत

  1. सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (नए टैब में खुलता है)
  2. भारतीय रेल (नए टैब में खुलता है)
भारत का पहला केबल-स्टे ब्रिज: विद्यासागर सेतु और देश के मशहूर पुल

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