भारत का पहला हिंदी अख़बार: उदन्त मार्तण्ड (1826) की कहानी
30 मई 1826 को कलकत्ता से पं. जुगल किशोर शुक्ल ने साप्ताहिक "उदन्त मार्तण्ड" निकाला। इसी दिन हिंदी पत्रकारिता दिवस मनाया जाता है। भारत के शुरुआती अख़बारों के तथ्य।
रोहित टंडन · 8 अक्टूबर 2026 · 3 मिनट
आज हिंदी में सैकड़ों अख़बार, पत्रिकाएँ और समाचार वेबसाइटें हैं, जिन्हें करोड़ों लोग रोज़ पढ़ते हैं। लेकिन हिंदी पत्रकारिता की शुरुआत लगभग दो सौ साल पहले एक छोटे-से साप्ताहिक अख़बार से हुई थी, जो हिंदी भाषी क्षेत्र से दूर कलकत्ता में छपा था। उसका नाम था — उदन्त मार्तण्ड।
उदन्त मार्तण्ड: मुख्य तथ्य
| पहला अंक | 30 मई 1826 |
|---|---|
| स्थान | कलकत्ता (कोलकाता) |
| संपादक-प्रकाशक | पंडित जुगल किशोर शुक्ल |
| प्रकार | साप्ताहिक (हर मंगलवार) |
| नाम का अर्थ | "उगता हुआ सूर्य" या "समाचार का सूर्य" |
कलकत्ता से क्यों?
उस समय कलकत्ता ब्रिटिश भारत की राजधानी और छापेख़ानों का सबसे बड़ा केंद्र था। अंग्रेज़ी, बांग्ला और फ़ारसी में अख़बार निकल रहे थे, लेकिन हिंदी में कोई नहीं। कानपुर के रहने वाले पं. जुगल किशोर शुक्ल कलकत्ता की अदालत में काम करते थे। उन्होंने महसूस किया कि हिंदी भाषी लोगों के लिए उनकी अपनी भाषा में अख़बार होना चाहिए। अख़बार की भाषा खड़ी बोली थी, जिसमें ब्रज भाषा का पुट था।
कम उम्र, बड़ा असर
उदन्त मार्तण्ड लंबे समय तक नहीं चल पाया। पाठक ज़्यादातर दूर के इलाक़ों में थे और अख़बार भेजने का डाक ख़र्च बहुत था। सरकार से डाक शुल्क में छूट नहीं मिली और पैसों की कमी के कारण दिसंबर 1827 में इसे बंद करना पड़ा। फिर भी इसने यह राह खोल दी कि हिंदी में भी अख़बार निकल सकते हैं, और आगे चलकर हिंदी पत्रकारिता ने आज़ादी के आंदोलन में बड़ी भूमिका निभाई।
क्या आप जानते हैं? उदन्त मार्तण्ड के पहले अंक की याद में हर साल 30 मई को "हिंदी पत्रकारिता दिवस" मनाया जाता है।
भारत के शुरुआती अख़बार
- हिक्कीज़ बंगाल गज़ट (1780): भारत का पहला अख़बार, जिसे जेम्स ऑगस्टस हिक्की ने 29 जनवरी 1780 को कलकत्ता से अंग्रेज़ी में निकाला। ईस्ट इंडिया कंपनी की आलोचना के कारण इसे जल्द बंद करवा दिया गया।
- समाचार दर्पण (1818): बांग्ला भाषा के शुरुआती अख़बारों में से एक, जिसे सीरामपुर के मिशनरियों ने शुरू किया।
- जाम-ए-जहाँ-नुमा (1822): उर्दू पत्रकारिता के शुरुआती अख़बारों में गिना जाता है।
- उदन्त मार्तण्ड (1826): पहला हिंदी अख़बार।
आज़ादी के आंदोलन में अख़बार
19वीं और 20वीं सदी में अख़बार राष्ट्रीय आंदोलन की आवाज़ बने। बाल गंगाधर तिलक के "केसरी" (मराठी) और "मराठा" (अंग्रेज़ी), महात्मा गांधी के "यंग इंडिया" और "हरिजन", और गणेश शंकर विद्यार्थी के हिंदी साप्ताहिक "प्रताप" जैसे पत्रों ने लोगों को जागरूक किया। कई संपादकों को इसके लिए जेल भी जाना पड़ा।
आज की हिंदी पत्रकारिता
दो सौ साल पहले जहाँ एक अकेला हिंदी साप्ताहिक पैसों की कमी से बंद हो गया था, वहीं आज भारत में पंजीकृत अख़बारों और पत्रिकाओं में सबसे बड़ी संख्या हिंदी प्रकाशनों की है। रेडियो, टीवी और इंटरनेट के आने से हिंदी समाचार गाँव-गाँव तक पहुँचते हैं। मोबाइल पर ख़बर पढ़ने वालों में भी हिंदी पाठकों की संख्या लगातार बढ़ रही है। यह लंबा सफ़र उसी छोटे-से उदन्त मार्तण्ड से शुरू हुआ था, जिसे आज हिंदी पत्रकारिता की नींव माना जाता है।
परीक्षा के लिए याद रखें
पहला हिंदी अख़बार: उदन्त मार्तण्ड (30 मई 1826, कलकत्ता, पं. जुगल किशोर शुक्ल) · भारत का पहला अख़बार: हिक्कीज़ बंगाल गज़ट (1780)।
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