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भारत की सबसे बड़ी जेल: तिहाड़ के रोचक तथ्य और सुधार की कहानी

दिल्ली की तिहाड़ भारत की सबसे बड़ी जेल है: लगभग 400 एकड़ में नौ केंद्रीय जेलें। जानिए यहाँ इतनी भीड़ क्यों है, किरण बेदी ने क्या सुधार किए और कैदी यहाँ क्या सीखते हैं।

· 7 अक्टूबर 2026 · 3 मिनट

भारत की सबसे बड़ी जेल: तिहाड़ के रोचक तथ्य और सुधार की कहानी

भारत की सबसे बड़ी जेल कौन-सी है? यह पश्चिमी दिल्ली की तिहाड़ जेल है, जहाँ लगभग 400 एकड़ में नौ केंद्रीय जेलें बनी हैं और जिसकी गिनती दक्षिण एशिया के सबसे बड़े जेल परिसरों में होती है। तिहाड़ सिर्फ़ आकार के लिए नहीं, बल्कि कैदियों को फिर से काम-काजी नागरिक बनाने के प्रयोगों के लिए भी जानी जाती है।

तिहाड़ जेल कहाँ है और कितनी बड़ी है?

तिहाड़ पश्चिमी दिल्ली में पुराने तिहाड़ गाँव के पास है, जिसके नाम पर इसका नाम पड़ा, और इसकी स्थापना 1958 में हुई। इसे दिल्ली सरकार का जेल विभाग चलाता है। यह एक बड़ी इमारत नहीं, बल्कि नौ अलग-अलग केंद्रीय जेलों का परिसर है, जिनके अपने वार्ड, रसोई और कारख़ाने हैं।

दिल्ली बढ़ी तो और जगह की ज़रूरत पड़ी, इसलिए रोहिणी में एक केंद्रीय जेल और मंडोली में छह जेलों का परिसर बना। तिहाड़ को मिलाकर दिल्ली में अब एक ही विभाग के तहत 16 केंद्रीय जेलें हैं। ऐसा जेल परिसर लगभग एक छोटे शहर की तरह चलता है, जिसका अपना अस्पताल, स्कूल और कारख़ाने होते हैं।

तथ्यतिहाड़ एक नज़र में
स्थानपश्चिमी दिल्ली, तिहाड़ गाँव के पास
स्थापना1958
प्रबंधनजेल विभाग, दिल्ली सरकार
क्षेत्रफललगभग 400 एकड़
परिसर की जेलें9 केंद्रीय जेलें (साथ में रोहिणी में 1 और मंडोली में 6)
कैदियों के बनाए सामान का ब्रांडTJ's

तिहाड़ में हमेशा भीड़ क्यों रहती है?

तिहाड़ की नौ जेलें लगभग 5,000 कैदियों के लिए बनी थीं, पर आम तौर पर इनमें उससे दोगुने से भी ज़्यादा कैदी रहते हैं। भीड़ वाले समय की मुंबई लोकल ट्रेन सोचिए, जहाँ कुछ सौ लोगों के डिब्बे में कहीं ज़्यादा लोग सफ़र करते हैं और हर सीट व हैंडल बँट जाता है। जेल में भी भीड़ से खाना, पानी, इलाज और सुरक्षा कर्मियों का ध्यान, सब पर बोझ पड़ता है।

इसकी एक बड़ी वजह विचाराधीन कैदी (undertrial prisoner) हैं, यानी वे लोग जिनका मुक़दमा अभी चल रहा है और जिन्हें अदालत ने दोषी नहीं ठहराया। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) की सालाना "प्रिज़न स्टैटिस्टिक्स इंडिया" रिपोर्ट बताती है कि भारत में लगभग हर चार में से तीन कैदी विचाराधीन हैं। दिल्ली सरकार ने 2025–26 के बजट में जेल को भीड़ वाले शहर से बाहर ले जाने के सर्वे के लिए 10 करोड़ रुपये रखे।

किरण बेदी ने तिहाड़ को कैसे बदला?

मई 1993 में IPS अधिकारी किरण बेदी दिल्ली की जेल महानिरीक्षक (Inspector General of Prisons) बनीं और तिहाड़ उनकी ज़िम्मेदारी में आई। उन्होंने पढ़ाई, योग, शिकायत पेटियाँ और पंचायत व्यवस्था शुरू की, जिसमें कैदी ख़ुद वार्डों का रोज़ का काम चलाने में मदद करते थे, जैसे गाँव की पंचायत स्थानीय मामले सुलझाती है। इस काम के लिए उन्हें 1994 में रेमन मैग्सेसे पुरस्कार मिला।

अप्रैल 1994 में तिहाड़ के भीतर 1,000 से ज़्यादा कैदियों के लिए दस दिन का विपश्यना ध्यान (Vipassana meditation) शिविर लगा, जिसे शिक्षक सत्यनारायण गोयनका ने चलाया। इसे आधुनिक समय का सबसे बड़ा विपश्यना शिविर माना जाता है। "डूइंग टाइम, डूइंग विपश्यना" नाम की डॉक्यूमेंट्री ने यह कहानी दुनिया तक पहुँचाई, और योग जैसी परंपराओं के बारे में हमारा लेख भारत की संस्कृति के रोचक तथ्य भी पढ़िए।

क्या आप जानते हैं? तिहाड़ के कैदी बेकरी का सामान, फ़र्नीचर, कपड़े और हस्तशिल्प बनाते हैं, जो "TJ's" ब्रांड के नाम से बिकते हैं। इस काम से वे हुनर सीखते हैं और रिहाई के बाद के लिए कमाई और बचत कर पाते हैं।

तिहाड़ कैदियों को नई शुरुआत में कैसे मदद करती है?

आधुनिक सोच में जेल का मक़सद सिर्फ़ सज़ा नहीं, बल्कि सुधार है, ताकि व्यक्ति समाज में लौटकर अपराध से दूर रहे। तिहाड़ में पढ़ाई के केंद्र हैं, जहाँ कैदी स्कूल और मुक्त विश्वविद्यालय के कोर्स करते हैं, और कई ने सज़ा के दौरान परीक्षाएँ पास की हैं। किसी युवा कैदी के लिए जेल में परीक्षा पास करना उतना ही बड़ा होता है, जितना घर पर किसी छात्र के लिए बोर्ड का नतीजा।

व्यावसायिक प्रशिक्षण (vocational training) में सिलाई, बढ़ईगीरी, कंप्यूटर और बेकिंग सिखाई जाती है। दिवाली से पहले घरों में आने वाले बिस्कुट और नमकीन सोचिए: ऐसा ही सामान तिहाड़ में बनकर TJ's के नाम से बिकता है। नशा-मुक्ति, परामर्श, खेल और संगीत भी नई शुरुआत के इसी लक्ष्य में मदद करते हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने कई फ़ैसलों में कहा है कि जेल में बंद व्यक्ति के भी मौलिक अधिकार बने रहते हैं, जैसे अनुच्छेद 21 के तहत सम्मान से जीने का अधिकार। कैदियों को क़ानूनी सहायता और अमानवीय व्यवहार से सुरक्षा का अधिकार है, और हर ज़िले के विधिक सेवा प्राधिकरण वकील का ख़र्च न उठा सकने वालों को मुफ़्त मदद देते हैं।

भारत की और कौन-सी जेलें इतिहास में मशहूर हैं?

अंडमान के पोर्ट ब्लेयर की सेल्युलर जेल, यानी "काला पानी", 1896 से 1906 के बीच बनी, जहाँ अंग्रेज़ों ने कई स्वतंत्रता सेनानियों को क़ैद रखा। आज यह राष्ट्रीय स्मारक है। पुणे की यरवदा जेल में महात्मा गांधी कई बार रहे और 1932 का पूना पैक्ट भी इसी से जुड़ा है।

ये जेलें स्वतंत्रता संग्राम की गवाह हैं, जबकि तिहाड़ बाद के सुधारों की कहानी कहती है। ऐसी और चौंकाने वाली कहानियाँ हमारे रोचक तथ्य वाले लेखों में और हिंदी और अंग्रेज़ी में 50 रोचक तथ्य वाली सूची में मिलेंगी।

मुख्य बिंदु

  • पश्चिमी दिल्ली की तिहाड़ भारत का सबसे बड़ा जेल परिसर है, जहाँ लगभग 400 एकड़ में नौ केंद्रीय जेलें हैं।
  • इसकी स्थापना 1958 में हुई और इसे दिल्ली सरकार का जेल विभाग चलाता है।
  • यह लगभग 5,000 कैदियों के लिए बनी थी, पर इसमें आम तौर पर दोगुने से ज़्यादा कैदी रहते हैं, जिनमें बहुत से विचाराधीन हैं।
  • विपश्यना शिविर समेत किरण बेदी के सुधारों के लिए उन्हें 1994 में रेमन मैग्सेसे पुरस्कार मिला।
  • कैदियों का बनाया सामान "TJ's" ब्रांड से बिकता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत में सबसे बड़ी जेल कौन-सी है?

दिल्ली की तिहाड़ जेल भारत का सबसे बड़ा जेल परिसर है। इसमें लगभग 400 एकड़ में नौ केंद्रीय जेलें हैं और यह दक्षिण एशिया के सबसे बड़े परिसरों में गिनी जाती है।

तिहाड़ जेल कब बनी?

तिहाड़ की स्थापना 1958 में पश्चिमी दिल्ली में हुई। बाद में दिल्ली में रोहिणी में एक और मंडोली में छह जेलें जोड़ी गईं।

TJ's क्या है?

TJ's वह ब्रांड है, जिसके नाम से तिहाड़ के कैदियों का बनाया सामान बिकता है, जैसे बेकरी का सामान, फ़र्नीचर और कपड़े। इस काम से कैदियों को हुनर और रिहाई के बाद के लिए कमाई मिलती है।

स्रोत: दिल्ली कारागार विभाग, दिल्ली सरकार और राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB)।

स्रोत

  1. दिल्ली सरकार (नए टैब में खुलता है)
  2. राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) (नए टैब में खुलता है)

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