ब्रिटिश भारत के रोचक तथ्य: 1858 से 1947 तक का राज
ब्रिटिश भारत में 1858 से 1947 तक ताज का सीधा शासन रहा। जानिए वायसराय, राजधानी, रेल-डाक, क़ानूनों और रियासतों से जुड़े रोचक तथ्य।
रोहित टंडन · 9 अक्टूबर 2026 · 4 मिनट
1857 के विद्रोह के बाद भारत का शासन ईस्ट इंडिया कंपनी से छिनकर सीधे ब्रिटिश ताज के हाथ में आ गया। 1858 से 1947 तक के इस दौर को ब्रिटिश भारत या "ब्रिटिश राज" कहा जाता है। इन 89 वर्षों में रेल, डाक, विश्वविद्यालय और कई क़ानून आए, लेकिन अकाल, आर्थिक शोषण और दमन भी इसी दौर की सच्चाई थे। यहाँ इस दौर के रोचक तथ्य दिए गए हैं।
ताज का शासन कैसे चला
- महारानी की घोषणा: 1 नवंबर 1858 को इलाहाबाद में महारानी विक्टोरिया की घोषणा पढ़ी गई, जिसमें भारतीय रियासतों के अधिकारों का सम्मान करने का वादा था।
- वायसराय: भारत में ताज का प्रतिनिधि गवर्नर-जनरल अब "वायसराय" भी कहलाया। पहले वायसराय लॉर्ड कैनिंग थे और अंतिम लॉर्ड माउंटबेटन।
- लंदन में भारत सचिव: भारत के मामलों के लिए लंदन में "सेक्रेटरी ऑफ़ स्टेट फ़ॉर इंडिया" का पद बना।
- "भारत की सम्राज्ञी": 1 जनवरी 1877 को दिल्ली दरबार में विक्टोरिया को "क़ैसर-ए-हिंद" यानी भारत की सम्राज्ञी घोषित किया गया।
दो हिस्सों में बँटा भारत
ब्रिटिश भारत में सीधे शासित प्रांत थे — जैसे बंगाल, बंबई, मद्रास और संयुक्त प्रांत — और इनके अलावा 560 से ज़्यादा रियासतें थीं, जिन पर राजा-नवाब ब्रिटिश सर्वोच्चता के अधीन राज करते थे। हैदराबाद, जम्मू-कश्मीर, मैसूर और बड़ौदा जैसी बड़ी रियासतों से लेकर कुछ गाँवों जितनी छोटी रियासतें भी थीं। आज़ादी के बाद इन्हें भारत में मिलाना एक बड़ा काम था।
क्या आप जानते हैं? 1911 तक ब्रिटिश भारत की राजधानी कलकत्ता थी। 12 दिसंबर 1911 को दिल्ली दरबार में राजधानी दिल्ली ले जाने की घोषणा हुई और 1931 में नई दिल्ली का उद्घाटन हुआ।
जो चीज़ें इसी दौर में आईं
| क्या | कब |
|---|---|
| पहली यात्री रेलगाड़ी (बंबई–ठाणे) | 16 अप्रैल 1853 |
| भारतीय डाक की एकीकृत व्यवस्था | 1854 |
| कलकत्ता, बंबई और मद्रास विश्वविद्यालय | 1857 |
| भारतीय दंड संहिता (2024 में भारतीय न्याय संहिता ने इसकी जगह ली) | 1860 |
| पहली नियमित (समकालिक) जनगणना | 1881 |
इसी दौर में अंग्रेज़ों के बनाए कई भवन आज भी खड़े हैं — पढ़ें इंडिया गेट के 12 तथ्य और दिल्ली के 10 रोचक तथ्य।
क़ानून जिन्होंने आगे का रास्ता बनाया
- 1909 (मॉर्ले-मिंटो सुधार): विधान परिषदों में भारतीयों की भागीदारी बढ़ी, लेकिन मुसलमानों के लिए अलग निर्वाचन मंडल बनाया गया।
- 1919 (मॉन्टेग्यू-चेम्सफ़ोर्ड सुधार): प्रांतों में "द्वैध शासन" लागू हुआ।
- भारत शासन अधिनियम 1935: प्रांतों को स्वायत्तता मिली और संघीय ढाँचे की योजना बनी। स्वतंत्र भारत के संविधान का बड़ा हिस्सा इसी अधिनियम के ढाँचे पर आधारित है।
आर्थिक असर: "धन की निकासी"
कांग्रेस के संस्थापकों में से एक और "भारत के वयोवृद्ध नेता" कहे जाने वाले दादाभाई नौरोजी ने अपनी किताब "पॉवर्टी एंड अन-ब्रिटिश रूल इन इंडिया" (1901) में "धन की निकासी" (ड्रेन थ्योरी) का सिद्धांत दिया — यानी भारत की संपत्ति वेतन, पेंशन, ब्याज और मुनाफ़े के रूप में लगातार ब्रिटेन जा रही थी। सस्ते मशीनी कपड़े के आने से भारत के हथकरघा उद्योग को भारी नुक़सान हुआ। अर्थशास्त्री एंगस मैडिसन के अनुमानों के अनुसार विश्व अर्थव्यवस्था में भारत का हिस्सा 1700 के आसपास लगभग एक-चौथाई था, जो 1950 तक घटकर लगभग 4 प्रतिशत रह गया। उस दौर के और सेनानियों के बारे में पढ़ें: स्वतंत्रता सेनानियों की सूची।
दर्दनाक सच्चाई: अकाल
ब्रिटिश दौर में कई भीषण अकाल पड़े। 1876–78 के बड़े अकाल में लाखों लोग मारे गए, और 1943 के बंगाल अकाल में लगभग 30 लाख लोगों की जान गई। इतिहासकार इन मौतों के पीछे सूखे के साथ-साथ ग़लत सरकारी नीतियों को भी ज़िम्मेदार मानते हैं।
मुख्य बिंदु
- 1858 से 1947 तक का दौर ब्रिटिश भारत या "ब्रिटिश राज" कहलाता है।
- 1 नवंबर 1858 को इलाहाबाद में महारानी विक्टोरिया की घोषणा पढ़ी गई।
- पहले वायसराय लॉर्ड कैनिंग और आख़िरी लॉर्ड माउंटबेटन थे।
- लंदन में भारत के मामलों के लिए "भारत सचिव" का पद बना।
- इस दौर में रेल, डाक और विश्वविद्यालय आए, पर अकाल और "धन की निकासी" भी इसी का हिस्सा थे।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
ब्रिटिश राज कब से कब तक रहा?
ताज का सीधा शासन 1858 से 15 अगस्त 1947 तक रहा। इससे पहले लगभग सौ साल तक ईस्ट इंडिया कंपनी का शासन था।
भारत का अंतिम वायसराय कौन था?
लॉर्ड माउंटबेटन, जो आज़ादी के बाद जून 1948 तक भारत के गवर्नर-जनरल भी रहे।
और प्रश्नों के लिए देखें इतिहास GK।
स्रोत
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