छठ पूजा के रोचक तथ्य: चार दिन, सूर्य और छठी मैया
छठ पूजा सूर्य और छठी मैया की उपासना का चार दिन का पर्व है — नहाय-खाय, खरना, डूबते और उगते सूर्य को अर्घ्य। जानिए इसके नियम और रोचक तथ्य।
रोहित टंडन · 14 अक्टूबर 2026 · 4 मिनट
दिवाली के छह दिन बाद बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश और नेपाल के तराई इलाक़ों में नदियों और तालाबों के घाट श्रद्धालुओं से भर जाते हैं। यह है छठ पूजा — सूर्यदेव और छठी मैया की उपासना का महापर्व। यह कार्तिक शुक्ल षष्ठी को मनाया जाता है (इसीलिए नाम "छठ") और कठिन नियमों तथा अनुशासन के लिए जाना जाता है। आज देश-विदेश में जहाँ भी इन क्षेत्रों के लोग बसे हैं — दिल्ली, मुंबई, कोलकाता से लेकर मॉरीशस और अमेरिका तक — वहाँ छठ धूमधाम से मनाया जाता है।
चार दिन का पर्व
| दिन | क्या होता है |
|---|---|
| पहला — नहाय-खाय | व्रती नदी या तालाब में स्नान करके शुद्ध, सात्त्विक भोजन (कद्दू-भात, चने की दाल) करते हैं |
| दूसरा — खरना | दिन भर उपवास; शाम को गुड़ की खीर और रोटी का प्रसाद, उसके बाद लगभग 36 घंटे का निर्जला व्रत शुरू |
| तीसरा — संध्या अर्घ्य | डूबते सूर्य को घाट पर अर्घ्य दिया जाता है |
| चौथा — उषा अर्घ्य | उगते सूर्य को अर्घ्य देकर व्रत पूरा होता है |
छठ की अनोखी बातें
- डूबते सूर्य की पूजा: छठ शायद अकेला ऐसा बड़ा पर्व है जिसमें उगते सूर्य से पहले डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है — यह संदेश कि जीवन के हर चरण का सम्मान होना चाहिए।
- मूर्ति नहीं, प्रकृति: इसमें किसी मूर्ति या मंदिर की ज़रूरत नहीं होती। सूर्य, जल, नदी का घाट, बाँस के सूप और मौसमी फल ही पूजा के साधन हैं।
- कोई पुरोहित नहीं: व्रती (व्रत करने वाला) ख़ुद पूजा करता है; ज़्यादातर व्रती महिलाएँ होती हैं, पर पुरुष भी यह व्रत रखते हैं।
- ठेकुआ: गेहूँ के आटे, गुड़ और घी से बना ठेकुआ छठ का सबसे प्रसिद्ध प्रसाद है।
- साल में दो बार: कार्तिक के अलावा चैत्र महीने में भी छठ मनाया जाता है, जिसे "चैती छठ" कहते हैं।
क्या आप जानते हैं? छठ में पूजा का सामान — बाँस का सूप और दउरा, मिट्टी के दीये, गन्ना, केला, नारियल और मौसमी फल — लगभग सब प्राकृतिक और स्थानीय होता है। इसीलिए इसे सबसे पर्यावरण-अनुकूल त्योहारों में गिना जाता है।
छठ से जुड़ी मान्यताएँ
लोक-मान्यता में छठी मैया को संतान की रक्षा करने वाली देवी माना जाता है, और सूर्यदेव को आरोग्य और ऊर्जा का स्रोत। एक कथा के अनुसार महाभारत में कर्ण, जो सूर्य के पुत्र थे, रोज़ घंटों पानी में खड़े होकर सूर्य को अर्घ्य देते थे। एक और कथा में द्रौपदी और पांडवों द्वारा छठ व्रत रखने का उल्लेख मिलता है। छठ के लोकगीत — जैसे "काँच ही बाँस के बहँगिया" — इस पर्व की पहचान हैं, और गायिका शारदा सिन्हा के छठ गीत घर-घर में सुने जाते हैं।
घाटों की तैयारी और सामूहिकता
छठ से पहले पूरा मोहल्ला मिलकर घाटों की सफ़ाई करता है, रास्ते सजाता है और रोशनी लगाता है। जो लोग घाट तक नहीं जा पाते, वे घर की छत या आँगन में छोटा तालाब बनाकर अर्घ्य देते हैं। प्रशासन भी बड़े शहरों में घाटों पर सुरक्षा, सफ़ाई और रोशनी की व्यवस्था करता है। नदियों में भीड़ के समय डूबने का ख़तरा रहता है, इसलिए गहरे पानी में न जाने की सलाह दी जाती है।
मुख्य बिंदु
- छठ कार्तिक शुक्ल षष्ठी को, दिवाली के छह दिन बाद मनाया जाता है।
- चार दिन: नहाय-खाय, खरना, संध्या अर्घ्य और उषा अर्घ्य।
- खरना के बाद व्रती लगभग 36 घंटे का निर्जला व्रत रखते हैं।
- इसमें डूबते और उगते — दोनों सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है।
- ठेकुआ छठ का प्रमुख प्रसाद है; पूजा में मूर्ति की ज़रूरत नहीं होती।
दिवाली उत्सव के बारे में पढ़ें: दिवाली क्यों मनाई जाती है और भाई दूज की कथा। गंगा और दूसरी नदियों के बारे में: भारत की प्रमुख नदियाँ।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
छठ पूजा कब मनाई जाती है?
कार्तिक शुक्ल षष्ठी को, यानी दिवाली के छह दिन बाद। चार दिनों का यह पर्व उससे दो दिन पहले नहाय-खाय से शुरू होता है।
छठ पूजा में किसकी पूजा होती है?
सूर्यदेव और छठी मैया की।
और पढ़ें: रोचक तथ्य।
स्रोत
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