तिरंगे के रोचक तथ्य: राष्ट्रीय ध्वज का इतिहास और नियम
तिरंगे के रोचक तथ्य: पिंगली वेंकय्या का डिज़ाइन, 22 जुलाई 1947 को अपनाया गया, 24 तीलियों वाला चक्र और ध्वज संहिता के ज़रूरी नियम।
रोहित टंडन · 10 अक्टूबर 2026 · 4 मिनट
लहराता तिरंगा देखकर हर भारतीय का सिर गर्व से ऊँचा हो जाता है। यह सिर्फ़ कपड़े का टुकड़ा नहीं, आज़ादी के संघर्ष, बलिदान और हमारे मूल्यों का प्रतीक है। यहाँ तिरंगे के रोचक तथ्य दिए गए हैं — इसे किसने बनाया, रंगों का क्या अर्थ है, यह कैसे बनता है और इसे फहराने के नियम क्या हैं।
तिरंगे की कहानी
- डिज़ाइनर: आंध्र प्रदेश के स्वतंत्रता सेनानी पिंगली वेंकय्या ने 1921 में महात्मा गांधी को झंडे का एक डिज़ाइन दिया। आज का तिरंगा उसी के विकसित रूप पर आधारित है।
- चरखे से चक्र तक: 1931 में कांग्रेस ने केसरिया, सफ़ेद और हरे रंग तथा बीच में चरखे वाला झंडा अपनाया। आज़ादी के समय चरखे की जगह अशोक चक्र रखा गया।
- अपनाने की तारीख़: संविधान सभा ने 22 जुलाई 1947 को तिरंगे को राष्ट्रीय ध्वज के रूप में अपनाया — आज़ादी से 24 दिन पहले।
रंग, अनुपात और चक्र
| हिस्सा | अर्थ |
|---|---|
| केसरिया (ऊपर) | साहस और त्याग |
| सफ़ेद (बीच) | शांति और सत्य |
| हरा (नीचे) | हरियाली, विकास और समृद्धि |
| अशोक चक्र | गहरे नीले रंग का, 24 तीलियाँ — निरंतर गति और धर्म |
झंडे की लंबाई और चौड़ाई का अनुपात हमेशा 3:2 होता है। ध्वज संहिता में झंडे के नौ मानक आकार तय हैं — सबसे बड़ा 6.3 मीटर × 4.2 मीटर का होता है।
क्या आप जानते हैं? 15 अगस्त को प्रधानमंत्री लाल क़िले पर झंडे को नीचे से ऊपर खींचकर फहराते हैं, जबकि 26 जनवरी को राष्ट्रपति कर्तव्य पथ पर पहले से ऊपर बँधे झंडे को खोलते हैं। अंग्रेज़ी में इन्हें "होइस्टिंग" और "अनफ़र्लिंग" कहते हैं।
ध्वज संहिता: ज़रूरी नियम
झंडे के इस्तेमाल के नियम भारतीय ध्वज संहिता, 2002 में हैं। कुछ मुख्य बातें:
- झंडा फटा, मैला या उल्टा (हरा ऊपर) नहीं लगाया जा सकता, और उसे ज़मीन या पानी को छूने नहीं दिया जाता।
- दिसंबर 2021 के बदलाव के बाद हाथ से काते-बुने खादी के अलावा मशीन से बने और पॉलिएस्टर के झंडे की भी अनुमति है।
- जुलाई 2022 के संशोधन से अब घरों पर झंडा दिन और रात — दोनों समय फहराया जा सकता है। इसी के बाद "हर घर तिरंगा" अभियान चला।
- फटे या ख़राब हो चुके झंडे को सम्मान के साथ, एकांत में नष्ट किया जाता है — उसे इधर-उधर फेंका नहीं जाता।
हर नागरिक का अधिकार
2004 में सर्वोच्च न्यायालय ने उद्योगपति नवीन जिंदल के मामले में फ़ैसला दिया कि सम्मान के साथ राष्ट्रीय ध्वज फहराना हर नागरिक का मौलिक अधिकार है — संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a) में दी गई अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हिस्सा। इससे पहले आम लोग कुछ ख़ास दिनों को छोड़कर अपने घर या दफ़्तर पर झंडा नहीं फहरा सकते थे।
देश-दुनिया में तिरंगे के ऐतिहासिक पल
आज़ादी से बहुत पहले, 1907 में जर्मनी के स्टटगार्ट में मैडम भीकाजी कामा ने भारत का एक शुरुआती झंडा फहराकर दुनिया का ध्यान खींचा था। 29 मई 1953 को एवरेस्ट पर पहली बार पहुँचे तेनज़िंग नोर्गे अपने साथ जो झंडे ले गए थे, उनमें भारत का तिरंगा भी था। आज हर साल लाखों घरों पर "हर घर तिरंगा" अभियान में झंडा लहराता है।
तिरंगा कहाँ बनता है?
भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) के मानकों पर झंडे बनाए जाते हैं। कर्नाटक के हुब्बल्लि के पास बेंगेरी में कर्नाटक खादी ग्रामोद्योग संयुक्त संघ को देश में मानक खादी झंडे बनाने वाली प्रमुख प्रमाणित इकाई के रूप में जाना जाता है, जहाँ ज़्यादातर महिलाएँ झंडे सिलती हैं।
भारत के बाक़ी राष्ट्रीय प्रतीकों के बारे में पढ़ें: भारत के राष्ट्रीय प्रतीक। आज़ादी के पहले दिन तिरंगे का क्या हुआ, यह जानें 15 अगस्त 1947 के रोचक तथ्य में।
मुख्य बिंदु
- तिरंगे का मूल डिज़ाइन स्वतंत्रता सेनानी पिंगली वेंकय्या ने दिया।
- संविधान सभा ने 22 जुलाई 1947 को तिरंगा अपनाया।
- 1931 के झंडे के चरखे की जगह आज़ादी के समय अशोक चक्र आया।
- झंडे की लंबाई और चौड़ाई का अनुपात 3:2 है, और अशोक चक्र में 24 तीलियाँ हैं।
- ध्वज संहिता के नियमों के साथ हर नागरिक सम्मानपूर्वक तिरंगा फहरा सकता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
तिरंगे का डिज़ाइन किसने बनाया?
पिंगली वेंकय्या ने। उनके डिज़ाइन को बदलावों के बाद 22 जुलाई 1947 को राष्ट्रीय ध्वज के रूप में अपनाया गया।
अशोक चक्र में कितनी तीलियाँ होती हैं?
24 तीलियाँ, और चक्र का रंग गहरा नीला (नेवी ब्लू) होता है।
और पढ़ें: इतिहास के लेख।
स्रोत
उपयोगी लगा? शेयर करें।