कबड्डी के नियम, इतिहास और रोचक तथ्य: भारत का अपना खेल
कबड्डी के नियम आसान भाषा में: 7 खिलाड़ी, रेडर की एक साँस, बोनस लाइन, ऑल-आउट और सुपर टैकल — साथ में एशियाई खेलों में भारत का दबदबा और प्रो कबड्डी।
रोहित टंडन · 18 अक्टूबर 2026 · 4 मिनट
गाँव की मिट्टी से निकलकर टीवी स्क्रीन और बड़े स्टेडियमों तक पहुँचा कबड्डी भारत का अपना खेल है। इसमें न बल्ला चाहिए, न गेंद — बस ताक़त, फुर्ती, साँस पर क़ाबू और टीम का तालमेल। यहाँ कबड्डी के नियम आसान भाषा में दिए गए हैं, साथ में इसका इतिहास और कुछ रोचक तथ्य।
कबड्डी कैसे खेली जाती है?
कबड्डी में दो टीमें होती हैं, और हर टीम के 7 खिलाड़ी मैदान पर उतरते हैं (कुल 12 खिलाड़ियों के दल में से)। एक टीम का खिलाड़ी, जिसे रेडर कहते हैं, विरोधी पाले में जाता है और "कबड्डी-कबड्डी" बोलते हुए विरोधी खिलाड़ियों को छूकर अपने पाले में लौटने की कोशिश करता है। विरोधी टीम के खिलाड़ी, जिन्हें डिफ़ेंडर कहते हैं, उसे पकड़कर रोकने की कोशिश करते हैं। पुराने नियम में रेडर को पूरी रेड एक ही साँस में करनी होती थी; पेशेवर लीगों में अब एक रेड के लिए 30 सेकंड का समय तय है।
कबड्डी के मुख्य नियम
| नियम | मतलब |
|---|---|
| मैदान | पुरुषों के लिए लगभग 13 मीटर × 10 मीटर; महिलाओं के लिए थोड़ा छोटा |
| समय | 20-20 मिनट के दो हाफ़, बीच में छोटा ब्रेक |
| रेड पॉइंट | रेडर जितने डिफ़ेंडरों को छूकर सुरक्षित लौटे, उतने अंक |
| टैकल पॉइंट | डिफ़ेंडर रेडर को पकड़कर रोक लें तो उन्हें 1 अंक |
| बोनस लाइन | 6 या ज़्यादा डिफ़ेंडर हों और रेडर बोनस लाइन पार कर ले तो 1 अतिरिक्त अंक |
| ऑल-आउट (लोना) | किसी टीम के सभी खिलाड़ी आउट हो जाएँ तो विरोधी को 2 अतिरिक्त अंक |
| सुपर टैकल | 3 या कम डिफ़ेंडर रेडर को पकड़ लें तो 1 अतिरिक्त अंक |
| रिवाइवल | हर अंक के बदले आउट हुआ एक साथी खिलाड़ी वापस मैदान में आता है |
कबड्डी का इतिहास
कबड्डी हज़ारों साल पुराना देसी खेल माना जाता है, जो अलग-अलग इलाक़ों में अलग नामों से खेला जाता रहा — महाराष्ट्र में "हु-तु-तु", आंध्र प्रदेश में "चेडुगुडु", बंगाल में "हा-डु-डु" और तमिलनाडु में "सडुगुडु"। 1936 के बर्लिन ओलंपिक में भारत के खिलाड़ियों ने इसका प्रदर्शन किया था। 1973 में "अमैच्योर कबड्डी फ़ेडरेशन ऑफ़ इंडिया" बनी, जिसने खेल के नियम एक जैसे किए।
क्या आप जानते हैं? कबड्डी बांग्लादेश का राष्ट्रीय खेल है। भारत में यह कई राज्यों के गाँवों और स्कूलों का सबसे लोकप्रिय खेल है, क्योंकि इसके लिए किसी महँगे सामान की ज़रूरत नहीं होती।
एशियाई खेलों में भारत का दबदबा
- कबड्डी 1990 के बीजिंग एशियाई खेलों में शामिल हुई, और भारतीय पुरुष टीम ने 1990 से 2014 तक लगातार सात स्वर्ण जीते।
- 2018 में ईरान ने पुरुष और महिला दोनों वर्गों में स्वर्ण जीता।
- 2022 के हांगझोउ एशियाई खेलों (जो 2023 में हुए) में भारत ने पुरुष और महिला, दोनों स्वर्ण वापस जीते।
- महिला कबड्डी 2010 से एशियाई खेलों में है, और भारत ने 2010 और 2014 में भी स्वर्ण जीता।
प्रो कबड्डी लीग
2014 में शुरू हुई "प्रो कबड्डी लीग" ने इस खेल को नई पहचान दी। रंगीन मैट, तेज़ नियम, टीवी प्रसारण और बड़े दर्शक वर्ग के कारण कबड्डी आज भारत में क्रिकेट के बाद सबसे ज़्यादा देखे जाने वाले खेलों में गिनी जाती है। गाँवों के कई खिलाड़ी इस लीग से देशभर में मशहूर हुए। भारत के दूसरे खेलों की उपलब्धियाँ भारत के ओलंपिक पदक में पढ़ें।
मुख्य बिंदु
- कबड्डी में हर टीम के 7 खिलाड़ी मैदान पर होते हैं।
- रेडर "कबड्डी-कबड्डी" बोलते हुए विरोधियों को छूकर लौटता है।
- सभी खिलाड़ी आउट होने पर विरोधी को 2 अतिरिक्त अंक (लोना) मिलते हैं।
- कबड्डी 1990 से एशियाई खेलों में है; भारत ने 2022 में दोनों स्वर्ण जीते।
- कबड्डी बांग्लादेश का राष्ट्रीय खेल है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
कबड्डी में एक टीम में कितने खिलाड़ी होते हैं?
मैदान पर 7 खिलाड़ी, और पूरे दल में 12 तक खिलाड़ी।
कबड्डी में बोनस पॉइंट कब मिलता है?
जब विरोधी पाले में 6 या ज़्यादा डिफ़ेंडर हों और रेडर बोनस लाइन पार करके सुरक्षित लौट आए।
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