मंगलयान: पहली ही कोशिश में मंगल तक पहुँचने वाला भारत
भारत के मंगलयान की कहानी: 5 नवंबर 2013 को लॉन्च, 24 सितंबर 2014 को मंगल की कक्षा में, लगभग 450 करोड़ रुपये की लागत और पहली कोशिश में सफलता।
रोहित टंडन · 17 अक्टूबर 2026 · 4 मिनट
24 सितंबर 2014 की सुबह भारत ने वह कर दिखाया जो उससे पहले कोई देश नहीं कर पाया था — पहली ही कोशिश में किसी यान को मंगल ग्रह की कक्षा में पहुँचाना। इस यान का नाम था मंगलयान, जिसका आधिकारिक नाम "मार्स ऑर्बिटर मिशन" (MOM) है। कम ख़र्च, कम समय और देसी तकनीक से बना यह मिशन आज भी पूरी दुनिया में मिसाल माना जाता है।
मंगलयान एक नज़र में
| बात | जानकारी |
|---|---|
| लॉन्च | 5 नवंबर 2013, PSLV-C25 रॉकेट, श्रीहरिकोटा |
| पृथ्वी की कक्षा छोड़ी | 1 दिसंबर 2013 |
| मंगल की कक्षा में | 24 सितंबर 2014 |
| सफ़र | लगभग 300 दिन |
| लागत | लगभग 450 करोड़ रुपये |
| तय उम्र / असली उम्र | 6 महीने / लगभग 8 साल |
| उपकरण | 5 वैज्ञानिक उपकरण, जिनमें मार्स कलर कैमरा और मीथेन सेंसर |
छोटे रॉकेट से मंगल तक कैसे?
PSLV इतना ताक़तवर नहीं है कि किसी यान को सीधे मंगल की ओर फेंक सके। इसलिए इसरो ने एक चतुर तरीक़ा अपनाया। मंगलयान पहले पृथ्वी के चारों ओर एक लंबी, अंडाकार कक्षा में रखा गया। फिर उसके अपने इंजन को कई बार चलाकर कक्षा धीरे-धीरे बड़ी की गई, ठीक वैसे जैसे झूले को बार-बार धक्का देकर ऊँचा किया जाता है। 1 दिसंबर 2013 को आख़िरी धक्के के साथ यान ने पृथ्वी की कक्षा छोड़ दी और मंगल की ओर चल पड़ा।
लगभग 300 दिन बाद, 24 सितंबर 2014 को, महीनों से बंद पड़ा मुख्य इंजन लगभग 24 मिनट तक चलाया गया ताकि यान की रफ़्तार कम हो और मंगल का गुरुत्व उसे पकड़ ले। यह सारा काम यान ने ख़ुद पहले से दिए गए आदेशों से किया, क्योंकि उस समय पृथ्वी से मंगल तक रेडियो संदेश पहुँचने में लगभग 12 मिनट लगते थे।
"पहला" और "सबसे किफ़ायती"
- भारत पहली ही कोशिश में मंगल की कक्षा तक पहुँचने वाला दुनिया का पहला देश बना।
- मंगल तक पहुँचने वाला एशिया का पहला देश भी भारत बना।
- सोवियत अंतरिक्ष एजेंसी, नासा और यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी के बाद इसरो मंगल तक पहुँचने वाली चौथी एजेंसी बनी।
- इसकी लागत को अक्सर हॉलीवुड फ़िल्म "ग्रैविटी" के बजट से भी कम बताया गया।
क्या आप जानते हैं? 2016 में आए 2000 रुपये के नोट के पिछले हिस्से पर मंगलयान का चित्र छापा गया था — यानी यह मिशन देश के नोट पर भी जगह पा गया।
मंगल ग्रह के बारे में कुछ तथ्य
- मंगल की मिट्टी में लोहे का ऑक्साइड (एक तरह का ज़ंग) है, इसलिए यह लाल दिखता है और इसे "लाल ग्रह" कहते हैं।
- सौर मंडल का सबसे ऊँचा ज्वालामुखी "ओलंपस मॉन्स" मंगल पर है, जो एवरेस्ट से लगभग ढाई गुना ऊँचा है।
- मंगल के दो छोटे चंद्रमा हैं — फ़ोबोस और डीमोस।
- मंगल का एक दिन लगभग 24 घंटे 37 मिनट का होता है, यानी लगभग पृथ्वी जितना।
- वहाँ गुरुत्व पृथ्वी का लगभग 38% है — पृथ्वी पर 50 किलो का बच्चा वहाँ लगभग 19 किलो जितना महसूस करेगा।
मंगलयान ने क्या किया?
मंगलयान के मार्स कलर कैमरा ने मंगल की हज़ारों तस्वीरें भेजीं, जिनमें पूरे ग्रह की रंगीन तस्वीर, धूल भरे तूफ़ान और मंगल के चंद्रमा "फ़ोबोस" की तस्वीरें भी शामिल हैं। दूसरे उपकरणों ने मंगल के वातावरण और उसकी सतह के तापमान का अध्ययन किया। यान को केवल छह महीने काम करना था, लेकिन यह लगभग आठ साल चला। अप्रैल 2022 में इससे संपर्क टूट गया — शायद लंबे ग्रहण के दौरान बैटरी ख़त्म हो जाने से — और अक्टूबर 2022 में इसरो ने मिशन के पूरा होने की घोषणा की।
मंगलयान की सफलता ने आगे के बड़े मिशनों का रास्ता खोला — पढ़ें चंद्रयान-3 की कहानी और इसरो के सभी प्रमुख मिशन।
मुख्य बिंदु
- मंगलयान 5 नवंबर 2013 को PSLV-C25 से लॉन्च हुआ।
- 24 सितंबर 2014 को यह मंगल की कक्षा में पहुँचा।
- भारत पहली कोशिश में मंगल तक पहुँचने वाला पहला देश है।
- लागत लगभग 450 करोड़ रुपये थी।
- 6 महीने के लिए बना यान लगभग 8 साल चला।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
मंगलयान कब लॉन्च हुआ?
5 नवंबर 2013 को, श्रीहरिकोटा से PSLV-C25 रॉकेट द्वारा।
मंगलयान मंगल की कक्षा में कब पहुँचा?
24 सितंबर 2014 को, लगभग 300 दिन के सफ़र के बाद।
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स्रोत
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