भारत के पुराने नाम: भारतवर्ष, जम्बूद्वीप, आर्यावर्त, हिंदुस्तान और इंडिया
संविधान कहता है "इंडिया, अर्थात भारत"। जानिए भारतवर्ष, जम्बूद्वीप, आर्यावर्त, हिंदुस्तान और इंडिया नाम कहाँ से आए, और कैसे एक नदी ने देश को उसके ज़्यादातर नाम दिए।
रोहित टंडन · 8 अक्टूबर 2026 · 3 मिनट
भारत के पुराने नाम हैं: भारत या भारतवर्ष, जम्बूद्वीप, आर्यावर्त, हिंदुस्तान और इंडिया। भारत नाम प्राचीन राजा भरत से आया, जम्बूद्वीप पुराणों के विश्व-मानचित्र से, आर्यावर्त उत्तर के एक क्षेत्र से, जबकि हिंदुस्तान और इंडिया दोनों सिंधु नदी से निकले। संविधान इनमें से दो नाम साथ-साथ रखता है: "इंडिया, अर्थात भारत"।
हर नाम एक अलग दौर और बोलने वालों के अलग समूह से जुड़ा है। इनका स्रोत जान लें तो रोज़ की कई बातें भी समझ आती हैं, जैसे पूजा के संकल्प में "जम्बूद्वीपे भरतखंडे" क्यों बोला जाता है और "जय हिंद" में "हिंद" कहाँ से आया।
संविधान हमारे देश को क्या कहता है?
भारत के संविधान (Constitution) का अनुच्छेद (Article) 1 कहता है: "इंडिया, अर्थात भारत, राज्यों का संघ होगा।" यानी दोनों नाम आधिकारिक हैं, कोई भी उपनाम नहीं। इसीलिए आपके पासपोर्ट, नोटों और सरकारी दफ़्तरों के नामपट्ट पर देश का नाम दो रूपों में, भारत और India, लिखा मिलता है।
ये दोनों नाम संविधान में दो बहुत पुरानी परंपराओं से आए। "भारत" देश की अपनी भाषाओं में पला-बढ़ा, जबकि "इंडिया" यूनानी और लैटिन से होकर हम तक लौटा। जैसा आगे दिखेगा, दोनों हज़ारों साल पुराने हैं।
भारत और भारतवर्ष नाम कहाँ से आए?
पुराणों और महाभारत की परंपरा में भारतवर्ष नाम प्राचीन राजा भरत से जुड़ा है, और "वर्ष" का अर्थ है भूभाग या क्षेत्र। ग्रंथों में इस पर अलग राय है कि कौन-से भरत: महाभारत इसे दुष्यंत और शकुंतला के पुत्र भरत से जोड़ता है, जबकि कुछ पुराण ऋषभदेव के पुत्र भरत से। दोनों ही सूरतों में भारतवर्ष का अर्थ है "भरत की भूमि"।
विष्णु पुराण भारतवर्ष को वह भूमि बताता है जो समुद्र के उत्तर और हिमालय के दक्षिण में है। आज हिंदी और मराठी से लेकर बांग्ला और तमिल तक, ज़्यादातर भारतीय भाषाओं में देश का प्रचलित नाम "भारत" या उससे मिलता-जुलता रूप ही है।
जम्बूद्वीप क्या है, और इसका भारतवर्ष से क्या संबंध है?
पुराण दुनिया को कई बड़े द्वीपों यानी महाद्वीपों (continents) में बाँटते हैं, जो एक केंद्रीय पर्वत के चारों ओर घेरों में फैले हैं। इनमें सबसे भीतरी जम्बूद्वीप था, जिसका नाम जम्बू यानी जामुन के पेड़ पर पड़ा। भारतवर्ष को जम्बूद्वीप का एक खंड माना गया, इसलिए ये दोनों नाम आपस में टकराते नहीं: एक महाद्वीप है और दूसरा उसके भीतर का देश।
यह पुराना विचार आज भी पूजा-पाठ में ज़िंदा है। कई घरों में सत्यनारायण कथा या विवाह की शुरुआत में पुरोहित संकल्प में जगह का नाम "जम्बूद्वीपे भरतखंडे" बोलते हैं, यानी जम्बूद्वीप में, भरत के खंड में। अगली बार यह सुनें, तो समझिए कि आप पुराणों के भूगोल में लिखा एक पता सुन रहे हैं।
क्या आप जानते हैं? हिंद महासागर दुनिया का इकलौता महासागर है जिसका नाम किसी देश के नाम पर है। "इंडिया" की तरह इसका नाम भी सिंधु नदी तक जाता है।
आर्यावर्त का क्या अर्थ था?
कई प्राचीन ग्रंथों में आर्यावर्त शब्द हिमालय और विंध्य पर्वत के बीच के उत्तर भारत के क्षेत्र के लिए आया है। यह एक ख़ास भूभाग का नाम था, पूरे उपमहाद्वीप का नहीं। केरल या तमिलनाडु का कोई विद्यार्थी ये ग्रंथ पढ़े, तो पाएगा कि उसका इलाक़ा इस पुरानी सीमा से बाहर था।
इसलिए आर्यावर्त को एक ऐतिहासिक क्षेत्रीय नाम की तरह पढ़ना ठीक है। यह बताता है कि कुछ प्राचीन लेखक अपनी धरती को कैसे देखते थे, ठीक वैसे जैसे हम आज भी देश के हिस्सों को "दोआब" (दो नदियों के बीच की ज़मीन) या "दक्कन" कहते हैं।
हिंदुस्तान और इंडिया दोनों सिंधु नदी से कैसे बने?
फ़ारसी में "स" की ध्वनि अक्सर "ह" बन जाती थी। इसलिए सिंधु के पार की धरती "हिंद", वहाँ के लोग "हिंदू" और देश "हिंदुस्तान" कहलाया। फ़ारस के राजा दारा प्रथम (Darius I) के शिलालेखों (inscriptions) में सिंधु क्षेत्र "हिंदुश" नाम से पहले ही दर्ज है। मध्यकाल में यह नाम ख़ूब फैला और आज भी क्रिकेट स्टेडियम में "हिंदुस्तान ज़िंदाबाद" के नारे में सुनाई देता है।
यूनानियों ने उसी नदी को "इंडोस" सुना और उसके पार की भूमि को "इंडिया" कहा। चंद्रगुप्त मौर्य के दरबार में यूनानी राजदूत मेगस्थनीज़ ने इस देश पर "इंडिका" नाम की पुस्तक लिखी। लैटिन और यूरोप की भाषाओं से होकर "इंडिया" पूरी दुनिया में पहुँचा, और अंग्रेज़ों ने इसे अपने उपनिवेश का आधिकारिक नाम बनाया, जैसा ब्रिटिश भारत वाले पेज पर समझाया गया है।
| नाम | भाषा या स्रोत | अर्थ |
|---|---|---|
| भारत / भारतवर्ष | संस्कृत; पुराण और महाभारत | राजा भरत की भूमि |
| जम्बूद्वीप | संस्कृत; पुराणों का भूगोल | जामुन के पेड़ों वाला महाद्वीप, जिसका एक भाग भारतवर्ष है |
| आर्यावर्त | संस्कृत; प्राचीन ग्रंथ | हिमालय और विंध्य के बीच का उत्तर भारत |
| हिंदुस्तान / हिंद | फ़ारसी | सिंधु के पार की भूमि |
| इंडिया | यूनानी "इंडोस", फिर लैटिन | सिंधु नदी की भूमि |
दूसरी भाषाएँ भी इसी नदी के पीछे चलती हैं। अरब लेखकों ने देश को "अल-हिंद" कहा, पुराने चीनी ग्रंथों में "तियानझू" मिलता है, आधुनिक चीनी में "यिनदू" और जापानी में "इंदो"। लगभग हर नाम उसी नदी की ओर इशारा करता है, जिसके किनारे सिंधु घाटी सभ्यता (Indus Valley civilisation) पनपी, जिसका ज़िक्र भारत की सबसे लंबी नदी वाले पेज पर है।
मुख्य बिंदु
- संविधान का अनुच्छेद 1 कहता है "इंडिया, अर्थात भारत", इसलिए दोनों नाम आधिकारिक हैं।
- भारतवर्ष का अर्थ है राजा भरत की भूमि; "वर्ष" यानी क्षेत्र।
- जम्बूद्वीप पुराणों का जामुन के पेड़ों वाला महाद्वीप है, और भारतवर्ष उसका एक भाग।
- आर्यावर्त हिमालय और विंध्य के बीच के उत्तरी क्षेत्र का नाम था।
- हिंदुस्तान (फ़ारसी) और इंडिया (यूनानी) दोनों सिंधु नदी से बने।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
भारत के पुराने नाम कौन-से हैं?
मुख्य पुराने नाम हैं भारत या भारतवर्ष, जम्बूद्वीप, आर्यावर्त, हिंदुस्तान और इंडिया। "सोने की चिड़िया" भारत की पुरानी समृद्धि के लिए मशहूर मुहावरा है, कोई नाम नहीं।
भारतवर्ष और जम्बूद्वीप में क्या अंतर है?
जम्बूद्वीप पुराणों का बड़ा महाद्वीप है और भारतवर्ष उसके भीतर का एक क्षेत्र। इसीलिए संकल्प में "जम्बूद्वीपे भरतखंडे" कहा जाता है।
भारत को इंडिया क्यों कहते हैं?
यूनानियों ने इस भूमि का नाम सिंधु नदी पर रखा, जिसे वे "इंडोस" कहते थे, और यह नाम लैटिन से होकर दुनिया भर में पहुँचा। ऐसी और कहानियाँ हमारे इतिहास खंड में हैं।
स्रोत: भारत का संविधान, विधायी विभाग और एनसाइक्लोपीडिया ब्रिटानिका: मेगस्थनीज़।
स्रोत
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