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दुनिया की सबसे बड़ी सुनामी: लिटुया खाड़ी से 2004 की हिंद महासागर सुनामी तक

सबसे ऊँची सुनामी 1958 में लिटुया खाड़ी में ढलान पर लगभग 524 मीटर तक चढ़ी, और सबसे घातक सुनामी 2004 में हिंद महासागर में आई। जानिए सुनामी कैसे बनती है और भारत अब अपने तटों को कैसे सावधान करता है।

· 6 अक्टूबर 2026 · 3 मिनट

दुनिया की सबसे बड़ी सुनामी: लिटुया खाड़ी से 2004 की हिंद महासागर सुनामी तक

दुनिया की सबसे बड़ी सुनामी कौन-सी थी, यह इस पर निर्भर है कि आप क्या नापते हैं। सबसे ऊँची सुनामी 1958 में अलास्का की लिटुया खाड़ी में आई, जहाँ पानी ढलान पर लगभग 524 मीटर तक चढ़ गया। सबसे घातक सुनामी 26 दिसंबर 2004 को हिंद महासागर में आई, जिसमें भारत सहित 14 देशों में लगभग 2,27,898 लोगों की जान गई।

सुनामी कैसे बनती है?

सामान्य लहरें हवा से बनती हैं और समुद्र की सिर्फ़ ऊपरी परत को हिलाती हैं। सुनामी सतह से तल तक पूरे पानी को हिला देती है। ज़्यादातर सुनामी समुद्र के नीचे आए भूकंप (earthquake) से शुरू होती हैं, जब पृथ्वी की एक टेक्टोनिक प्लेट (tectonic plate) दूसरी के नीचे खिसकती है और समुद्र तल अचानक उठ जाता है या बैठ जाता है।

गाँव के तालाब में फेंका पत्थर याद कीजिए: जहाँ वह गिरता है, वहाँ से गोल लहरें हर दिशा में फैलती हैं। जब सैकड़ों किलोमीटर लंबा समुद्र तल कुछ मीटर उठता है, तो यही बात पूरे महासागर में होती है। भूस्खलन (landslide) और ज्वालामुखी विस्फोट (volcanic eruption) भी सुनामी ला सकते हैं, जैसा हमारे भूगोल के लेख धरती को बदलने वाली ताक़तों के बारे में बताते हैं।

किनारे के पास लहर ऊँची क्यों हो जाती है?

गहरे समुद्र में सुनामी एक मीटर से भी कम ऊँची हो सकती है, पर वह लगभग 800 किलोमीटर प्रति घंटे, यानी यात्री विमान जितनी तेज़ चलती है। किनारे के पास पानी उथला होता है, इसलिए लहर का अगला हिस्सा धीमा पड़ जाता है और पीछे से पानी आता रहता है।

यह टोल प्लाज़ा जैसा है: आगे की गाड़ियाँ ब्रेक लगाती हैं और पीछे की गाड़ियाँ उनसे सटती जाती हैं। पानी भी ऐसे ही जमा होकर कई मीटर ऊँची दीवार बन जाता है। मानसून की लहर टकराकर कुछ सेकंड में लौट जाती है, पर सुनामी उफनती नदी की तरह कई मिनट तक ज़मीन पर पानी भरती रहती है।

अब तक की सबसे ऊँची सुनामी कौन-सी थी?

9 जुलाई 1958 को अमेरिका के अलास्का की सँकरी लिटुया खाड़ी में तेज़ भूकंप आया। इससे लगभग 3 करोड़ घन मीटर चट्टानें ऊँचाई से पानी में आ गिरीं। उठी हुई लहर खाड़ी पार करके सामने की ढलान पर लगभग 524 मीटर तक चढ़ गई और जंगल उखाड़ ले गई।

इस ऊँचाई को रन-अप (run-up) कहते हैं, यानी ज़मीन पर पानी समुद्र तल से कितना ऊपर पहुँचा; यह अब तक की सबसे बड़ी नापी गई ऊँचाई है। खाड़ी लगभग सुनसान थी और पाँच लोगों की मौत हुई, इसलिए यह सुनामी सबसे ऊँची ज़रूर थी, पर सबसे घातक नहीं।

इतिहास की सबसे घातक सुनामी कौन-सी थी?

26 दिसंबर 2004 को इंडोनेशिया के सुमात्रा के पास समुद्र के नीचे लगभग 9.1 तीव्रता (magnitude) का भूकंप आया। कुछ ही घंटों में सुनामी श्रीलंका, भारत, थाईलैंड, मालदीव और पूर्वी अफ़्रीका तक पहुँच गई। 14 देशों में लगभग 2,27,898 लोग मारे गए, जो किसी भी दर्ज सुनामी में सबसे ज़्यादा है।

भारत के सरकारी आँकड़ों में 10,749 मौतें और 5,640 लापता दर्ज हैं। सबसे ज़्यादा नुक़सान तमिलनाडु में हुआ, जहाँ 8,000 से अधिक लोग मारे गए; अंडमान और निकोबार, केरल, आंध्र प्रदेश और पुदुचेरी भी बुरी तरह प्रभावित हुए।

तालिका में कुछ प्रसिद्ध सुनामियों की तुलना है। ये आम अनुमान हैं और अलग-अलग स्रोतों में थोड़े अलग मिलते हैं।

वर्ष और स्थानकारणपानी की अधिकतम ऊँचाईमृत्यु
1883, क्राकाटोआ (इंडोनेशिया)ज्वालामुखी विस्फोटलगभग 30–40 मीटरलगभग 36,000
1958, लिटुया खाड़ी (अलास्का)भूकंप के बाद चट्टानें गिरनालगभग 524 मीटर रन-अप5
2004, हिंद महासागर9.1 तीव्रता का भूकंपआचे में 30 मीटर से ज़्यादालगभग 2,27,898
2011, तोहोकू (जापान)9.0–9.1 तीव्रता का भूकंपमियाको में लगभग 40 मीटरलगभग 20,000 मृत या लापता
क्या आप जानते हैं? अगस्त 2020 में ओडिशा के नोलियासाही और वेंकटरायपुर, यूनेस्को के अंतर-सरकारी समुद्र विज्ञान आयोग से "सुनामी रेडी" (Tsunami Ready) मान्यता पाने वाले हिंद महासागर क्षेत्र के पहले समुदाय बने।

भारत आज सुनामी की चेतावनी कैसे देता है?

2004 के बाद भारत ने हैदराबाद के INCOIS में भारतीय सुनामी पूर्व चेतावनी केंद्र बनाया, जो 2007 से काम कर रहा है। यह समुद्र के नीचे के भूकंपों पर नज़र रखता है और समुद्री सेंसर तथा ज्वार मापक (tide gauge) की रीडिंग पढ़कर कुछ ही मिनटों में चेतावनी भेज सकता है।

भारत के लिए ख़तरा मुख्य रूप से पूर्व में अंडमान–सुमात्रा क्षेत्र और पश्चिम में अरब सागर के मकरान तट से है। पुरी और कोणार्क के सूर्य मंदिर वाला ओडिशा का तट चक्रवात और सुनामी दोनों झेलता है, इसलिए वहाँ के गाँव अभ्यास करते हैं। हिंद महासागर बाक़ी महासागरों से कैसे अलग है, यह दुनिया के पाँचों महासागरों वाले हमारे लेख में देखिए।

सुनामी का ख़तरा हो तो क्या करें?

समुद्र के पास तेज़ भूकंप महसूस हो, तो घोषणा का इंतज़ार मत कीजिए; तुरंत ऊँची जगह पर जाइए। अगर समुद्र अचानक बहुत पीछे हट जाए और तल दिखने लगे, तो लहर कुछ ही मिनट दूर हो सकती है।

कई घंटे ऊँची जगह पर ही रहिए, क्योंकि बाद की लहरें पहली से बड़ी हो सकती हैं। इसे ओडिशा के तट पर चक्रवात की चेतावनी जैसा मानिए: परिवार के साथ जल्दी निकलिए और अधिकारियों के कहने पर ही लौटिए। संयुक्त राष्ट्र हर साल 5 नवंबर को विश्व सुनामी जागरूकता दिवस मनाता है।

मुख्य बिंदु

  • सबसे ऊँची: 1958, लिटुया खाड़ी (अलास्का), रन-अप लगभग 524 मीटर।
  • सबसे घातक: 26 दिसंबर 2004, हिंद महासागर, 14 देशों में लगभग 2,27,898 मौतें।
  • ज़्यादातर सुनामी समुद्र के नीचे के भूकंप से बनती हैं; भूस्खलन और ज्वालामुखी भी कारण बनते हैं।
  • गहरे पानी में सुनामी लगभग 800 किलोमीटर प्रति घंटे चलती है; किनारे पर धीमी होकर ऊँची हो जाती है।
  • हैदराबाद के INCOIS में भारत का सुनामी चेतावनी केंद्र 2007 से काम कर रहा है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दुनिया की सबसे बड़ी सुनामी कौन-सी है?

ऊँचाई के हिसाब से 1958 की लिटुया खाड़ी (अलास्का) की सुनामी, जिसमें पानी लगभग 524 मीटर तक चढ़ा। जान के नुक़सान के हिसाब से 2004 की हिंद महासागर की सुनामी।

सुनामी सामान्य लहर से कैसे अलग है?

सामान्य लहर हवा से बनती है और सिर्फ़ सतह को हिलाती है। सुनामी पूरे गहरे पानी को हिलाती है और कई मिनट तक ज़मीन पर पानी भरती रहती है, इसलिए कहीं ज़्यादा तबाही करती है।

क्या भारत में फिर सुनामी आ सकती है?

हाँ, ख़ासकर अंडमान–सुमात्रा क्षेत्र और मकरान तट से। फ़र्क़ यह है कि अब भारत के पास चेतावनी व्यवस्था और प्रशिक्षित तटीय गाँव हैं।

स्रोत: भारतीय राष्ट्रीय महासागर सूचना सेवा केंद्र (INCOIS) और राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA)।

स्रोत

  1. भारतीय राष्ट्रीय महासागर सूचना सेवा केंद्र (INCOIS) (नए टैब में खुलता है)
  2. राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) (नए टैब में खुलता है)

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