नाज़्का रेखाओं का रहस्य: रेगिस्तान में बने विशाल चित्र
नाज़्का रेखाओं का रहस्य: पेरू के रेगिस्तान में हमिंगबर्ड, बंदर और मकड़ी के विशाल चित्र, ये कैसे बने, कैसे बचे और AI ने नई आकृतियाँ कैसे खोजीं।
रोहित टंडन · 31 अक्टूबर 2026 · 4 मिनट
दक्षिण अमेरिका के देश पेरू के एक सूखे रेगिस्तान में ज़मीन पर सैकड़ों विशाल रेखाएँ और आकृतियाँ बनी हैं — एक हमिंगबर्ड, एक बंदर, एक मकड़ी और कई ज्यामितीय आकार। ये इतने बड़े हैं कि इन्हें ठीक से केवल आसमान या पास की पहाड़ियों से देखा जा सकता है। इन्हें "नाज़्का रेखाएँ" कहा जाता है। यहाँ जानिए नाज़्का रेखाओं का रहस्य और वैज्ञानिकों ने इनके बारे में क्या पता लगाया है।
नाज़्का रेखाएँ एक नज़र में
| बात | जानकारी |
|---|---|
| जगह | नाज़्का रेगिस्तान, दक्षिणी पेरू |
| किसने बनाईं | नाज़्का संस्कृति के लोग (और उससे पहले के पराकास लोग) |
| कब | लगभग 500 ईसा पूर्व से 500 ईस्वी के बीच |
| क्या है | सीधी रेखाएँ, ज्यामितीय आकार और जानवरों-पौधों की आकृतियाँ |
| सम्मान | 1994 में यूनेस्को विश्व धरोहर |
इन्हें बनाया कैसे गया?
नाज़्का रेगिस्तान की ज़मीन पर लाल-भूरे पत्थरों की एक पतली परत है, जिन पर लोहे का ऑक्साइड जमा होने से उनका रंग गहरा हो गया है। उसके नीचे हल्के रंग की मिट्टी है। नाज़्का के लोगों ने ऊपर के गहरे पत्थरों को हटाकर किनारों पर ढेर कर दिया, जिससे नीचे की हल्की ज़मीन दिखने लगी और एक साफ़ रेखा बन गई। प्रयोगों से पता चला है कि लकड़ी की खूँटियों और रस्सियों की मदद से कुछ लोगों का एक समूह कुछ ही दिनों में ऐसी बड़ी आकृति बना सकता है — इसके लिए किसी "रहस्यमय तकनीक" की ज़रूरत नहीं थी।
2,000 साल तक कैसे बचीं?
नाज़्का दुनिया की सबसे सूखी जगहों में है, जहाँ बारिश बहुत कम होती है और ज़मीन के पास हवा भी ज़्यादा तेज़ नहीं चलती। पत्थर दिन में गरम होकर अपने ऊपर गरम हवा की एक परत बनाए रखते हैं, जिससे धूल कम उड़ती है। इसी सूखे और स्थिर मौसम के कारण ये रेखाएँ लगभग दो हज़ार साल तक लगभग वैसी ही बनी रहीं। सूखे रेगिस्तानों के बारे में पढ़ें: दुनिया के सबसे बड़े रेगिस्तान।
क्या आप जानते हैं? 2024 में जापान के यामागाता विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने हवाई तस्वीरों को आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस से जाँचकर केवल छह महीनों में 303 नई आकृतियाँ खोजीं — लगभग उतनी, जितनी पिछले लगभग सौ सालों में मिली थीं। AI के बारे में पढ़ें: आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस क्या है।
ये क्यों बनाई गईं? प्रमुख विचार
- खगोलीय पंचांग: जर्मन गणितज्ञ मारिया राइखे ने दशकों तक इनका अध्ययन किया और माना कि कुछ रेखाएँ सूर्य और तारों की दिशा से जुड़ी हैं।
- पानी और बारिश की पूजा: इतने सूखे इलाक़े में पानी सबसे क़ीमती था; कई विद्वान मानते हैं कि ये रेखाएँ पानी, बारिश और उपजाऊपन से जुड़े अनुष्ठानों का हिस्सा थीं।
- चलने वाले पवित्र रास्ते: कुछ आकृतियाँ एक ही लगातार रेखा से बनी हैं, जिन पर लोग शायद समारोह में चलते थे।
कुछ लोकप्रिय किताबों ने दावा किया कि ये "एलियंस" के लिए बनी हवाई पट्टियाँ हैं, लेकिन इसका कोई प्रमाण नहीं है — नरम ज़मीन पर कोई विमान उतर ही नहीं सकता, और पुरातत्वविदों को इन्हें बनाने वाले नाज़्का लोगों के औज़ार और बर्तन पास में ही मिले हैं।
ख़तरे में धरोहर
नाज़्का रेखाएँ बहुत नाज़ुक हैं — एक बार पैरों या गाड़ी के निशान पड़ जाएँ, तो वे सदियों तक बने रह सकते हैं। 2014 में कुछ कार्यकर्ताओं ने हमिंगबर्ड आकृति के पास जाकर निशान छोड़ दिए, और 2018 में एक ट्रक ड्राइवर ने कुछ रेखाओं को नुक़सान पहुँचाया। इसलिए अब यहाँ आम लोगों का रेखाओं पर चलना पूरी तरह मना है; इन्हें छोटे विमानों या देखने के लिए बने टावरों से ही देखा जाता है। दूसरे प्राचीन रहस्य: स्टोनहेंज का रहस्य।
मुख्य बिंदु
- नाज़्का रेखाएँ दक्षिणी पेरू के रेगिस्तान में हैं।
- इन्हें लगभग 500 ईसा पूर्व से 500 ईस्वी के बीच नाज़्का लोगों ने बनाया।
- ऊपर के गहरे पत्थर हटाकर नीचे की हल्की ज़मीन उभारी गई।
- सूखे और स्थिर मौसम ने इन्हें 2,000 साल तक बचाए रखा।
- 2024 में AI की मदद से 303 नई आकृतियाँ खोजी गईं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
नाज़्का रेखाएँ कहाँ हैं?
दक्षिण अमेरिका के देश पेरू के दक्षिणी हिस्से में, नाज़्का रेगिस्तान में।
क्या नाज़्का रेखाएँ एलियंस ने बनाई थीं?
नहीं, इसका कोई प्रमाण नहीं है; इन्हें लगभग 2,000 साल पहले नाज़्का संस्कृति के लोगों ने बनाया।
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स्रोत
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