दुनिया के सबसे महंगे कबूतर: करोड़ों में क्यों बिकते हैं?
दुनिया के सबसे महंगे कबूतर "न्यू किम" की 2020 में 16 लाख यूरो में नीलामी हुई। जानिए रेसिंग कबूतर इतने क़ीमती क्यों हैं और वे घर का रास्ता कैसे ढूँढते हैं।
रोहित टंडन · 15 अक्टूबर 2026 · 4 मिनट
छतों पर दाना चुगते कबूतर हम रोज़ देखते हैं, लेकिन कुछ कबूतर ऐसे भी हैं जिनकी क़ीमत किसी आलीशान घर से भी ज़्यादा है। दुनिया के सबसे महंगे कबूतर रेसिंग कबूतर होते हैं — ऐसे पक्षी जो सैकड़ों किलोमीटर दूर से भी तेज़ी से अपने घर लौट आते हैं। आइए जानें कि ये करोड़ों में क्यों बिकते हैं।
रिकॉर्ड तोड़ने वाले कबूतर
| कबूतर | वर्ष | नीलामी की क़ीमत |
|---|---|---|
| न्यू किम (बेल्जियम की मादा) | 2020 | लगभग 16 लाख यूरो (करीब 14 करोड़ रुपये) |
| आर्मांडो (बेल्जियम का नर) | 2019 | लगभग 12.5 लाख यूरो |
दोनों कबूतर बेल्जियम की ऑनलाइन नीलामी संस्था "पीपा" (PIPA) के ज़रिए बिके और दोनों को चीन के ख़रीदारों ने ख़रीदा। "आर्मांडो" को उसकी जीतों के कारण "कबूतरों का लुईस हैमिल्टन" (फ़ॉर्मूला-1 चैंपियन) कहा जाता था।
कबूतर इतने महंगे क्यों?
- प्रजनन के लिए: ज़्यादातर महंगे कबूतर रेस के लिए नहीं, बल्कि उनसे जीतने वाले बच्चे पैदा कराने के लिए ख़रीदे जाते हैं। चैंपियन कबूतर के बच्चे भी लाखों में बिकते हैं।
- बड़ी इनामी रेसें: चीन, बेल्जियम और दक्षिण अफ़्रीका में कबूतर रेस की बड़ी प्रतियोगिताएँ होती हैं, जिनमें इनाम की रक़म बहुत बड़ी होती है।
- वंश का रिकॉर्ड: रेसिंग कबूतरों का पूरा वंश-वृक्ष दर्ज रहता है, जैसे घोड़ों का। अच्छे वंश वाले कबूतर की क़ीमत ज़्यादा होती है।
- प्रशिक्षण और देखभाल: रेसिंग कबूतरों को ख़ास भोजन, टीके और सालों का उड़ान-प्रशिक्षण मिलता है; अच्छे दड़बे किसी खेल अकादमी की तरह चलाए जाते हैं।
क्या आप जानते हैं? प्रथम विश्व युद्ध में "शेर अमी" नाम के कबूतर ने गोलियों से घायल होने के बावजूद संदेश पहुँचाया, जिससे घिरे हुए लगभग 194 अमेरिकी सैनिकों की जान बची। उसे फ़्रांस का युद्ध पदक "क्रॉ द गेर" दिया गया।
कबूतर घर का रास्ता कैसे ढूँढते हैं?
पालतू कबूतरों में घर लौटने की अद्भुत क्षमता होती है, जिसके कारण उन्हें "होमिंग पिजन" कहते हैं। वैज्ञानिक मानते हैं कि वे कई तरीकों से रास्ता पहचानते हैं:
- पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र को महसूस करके;
- सूरज की स्थिति से दिशा तय करके;
- सड़कों, नदियों जैसे ज़मीनी निशानों को याद रखकर;
- कुछ शोधों के अनुसार गंध और बहुत धीमी आवाज़ों की मदद से भी।
इतिहास में कबूतर
कबूतर (रॉक पिजन) इंसानों के पाले हुए सबसे पुराने पक्षियों में से हैं — हज़ारों साल पहले से इन्हें पाला जा रहा है। प्राचीन काल से कबूतरों से संदेश भेजे जाते रहे; मुग़ल बादशाह अकबर को कबूतरबाज़ी का बड़ा शौक़ था। दूसरे विश्व युद्ध में बहादुरी दिखाने वाले जानवरों को मिलने वाला ब्रिटेन का "डिकिन मेडल" 30 से ज़्यादा कबूतरों को दिया गया। भारत में ओडिशा पुलिस ने बाढ़ और आपदा के समय संदेश भेजने के लिए दशकों तक कबूतर डाक सेवा चलाई, जो 2008 के आसपास बंद हुई।
सेहत से जुड़ी सावधानी
शहरों में बड़ी संख्या में कबूतरों को दाना डालने से उनकी बीट जमा होती है। लगातार सूखी बीट के कण साँस के साथ जाने से कुछ लोगों को फेफड़ों की एलर्जी जैसी बीमारी ("पिजन ब्रीडर्स लंग") हो सकती है। इसलिए बालकनी और खिड़कियों के आसपास बीट की सफ़ाई गीले कपड़े और मास्क के साथ करना बेहतर है।
मुख्य बिंदु
- सबसे महंगा कबूतर "न्यू किम" 2020 में लगभग 16 लाख यूरो में बिका।
- महंगे कबूतर ज़्यादातर चैंपियन बच्चे पैदा कराने के लिए ख़रीदे जाते हैं।
- कबूतर चुंबकीय क्षेत्र, सूरज और ज़मीनी निशानों से घर का रास्ता ढूँढते हैं।
- युद्धों में संदेश पहुँचाने वाले कबूतरों को बहादुरी के पदक मिले।
- ओडिशा पुलिस की कबूतर डाक सेवा 2008 के आसपास तक चली।
एक और समझदार पक्षी के बारे में पढ़ें: कौवों के रोचक तथ्य। और पढ़ें: जीव विज्ञान के 15 रोचक तथ्य।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दुनिया का सबसे महंगा कबूतर कौन-सा है?
बेल्जियम की रेसिंग मादा कबूतर "न्यू किम", जो नवंबर 2020 में लगभग 16 लाख यूरो में बिकी।
रेसिंग कबूतर कितनी दूर से घर लौट सकते हैं?
अच्छे रेसिंग कबूतर सैकड़ों किलोमीटर — कुछ तो 1,000 किलोमीटर से भी ज़्यादा — दूर से अपने घर लौट आते हैं।
क्विज़: कक्षा 4: जानवर और पक्षी · और पढ़ें: रोचक तथ्य।
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