दुनिया की सबसे ऊँची इमारत: बुर्ज ख़लीफ़ा के रोचक तथ्य
828 मीटर ऊँचा बुर्ज ख़लीफ़ा 2010 से दुनिया की सबसे ऊँची इमारत है। इसके रोचक तथ्य, गगनचुंबी इमारतें कैसे खड़ी रहती हैं, और भारत की सबसे ऊँची संरचनाएँ।
रोहित टंडन · 6 अक्टूबर 2026 · 3 मिनट
इंसान हमेशा से ऊँचाई छूना चाहता रहा है — पिरामिडों से लेकर मीनारों तक। आज यह सपना गगनचुंबी इमारतों में दिखता है, जो बादलों को छूती लगती हैं। इन सबमें सबसे ऊँची है संयुक्त अरब अमीरात के दुबई शहर की बुर्ज ख़लीफ़ा।
बुर्ज ख़लीफ़ा: एक नज़र में
| ऊँचाई | 828 मीटर |
|---|---|
| मंज़िलें | 160 से ज़्यादा (आमतौर पर 163 बताई जाती हैं) |
| खुलने की तारीख़ | 4 जनवरी 2010 |
| शहर | दुबई, संयुक्त अरब अमीरात |
| नाम | अबू धाबी के शासक शेख़ ख़लीफ़ा बिन ज़ायद के सम्मान में |
इतनी ऊँची इमारत खड़ी कैसे रहती है?
ऊँची इमारतों के सामने सबसे बड़ी चुनौती होती है — अपना भारी वज़न सँभालना और तेज़ हवा का सामना करना। बुर्ज ख़लीफ़ा के डिज़ाइन में इन दोनों का हल निकाला गया:
- "Y" आकार का आधार: ऊपर से देखने पर इमारत का निचला हिस्सा तीन पंखुड़ियों वाला दिखता है, जिससे वह बहुत स्थिर रहती है।
- सीढ़ीनुमा ऊँचाई: ऊपर जाते-जाते इमारत धीरे-धीरे पतली होती है, जिससे हवा का दबाव बँट जाता है और तेज़ हवा का भँवर नहीं बनता।
- गहरी नींव: रेत भरी ज़मीन में कंक्रीट के बड़े खंभे दर्जनों मीटर नीचे तक डाले गए हैं।
- मज़बूत कंक्रीट कोर: इमारत के बीच का कंक्रीट का ढाँचा रीढ़ की हड्डी की तरह काम करता है।
क्या आप जानते हैं? बुर्ज ख़लीफ़ा इतनी ऊँची है कि उसके सबसे ऊपरी हिस्से से सूर्यास्त ज़मीन की तुलना में कुछ मिनट बाद दिखाई देता है।
आगे कौन?
सऊदी अरब के जेद्दा शहर में बन रहे जेद्दा टावर को एक किलोमीटर से भी ऊँचा बनाने की योजना है। अगर यह पूरा होता है, तो यह बुर्ज ख़लीफ़ा से आगे निकल सकता है। गगनचुंबी इमारतों की रैंकिंग "काउंसिल ऑन टॉल बिल्डिंग्स एंड अर्बन हैबिटैट" (CTBUH) जैसी संस्थाएँ तय करती हैं।
इतिहास की सबसे ऊँची इमारतें
मिस्र का गीज़ा का महान पिरामिड (मूल ऊँचाई लगभग 146 मीटर) लगभग 3,800 वर्षों तक दुनिया की सबसे ऊँची मानव-निर्मित संरचना रहा। 1889 में बना पेरिस का एफ़िल टावर लगभग 300 मीटर ऊँचा था और 1930 तक सबसे ऊँचा रहा। इसके बाद न्यूयॉर्क की क्राइसलर बिल्डिंग और फिर 1931 में एम्पायर स्टेट बिल्डिंग ने यह ख़िताब लिया। 20वीं सदी के अंत तक यह दौड़ एशिया और मध्य-पूर्व की ओर बढ़ गई।
भारत की ऊँची संरचनाएँ
- स्टैच्यू ऑफ़ यूनिटी (182 मीटर): गुजरात के केवड़िया (एकता नगर) में सरदार वल्लभभाई पटेल की यह प्रतिमा 2018 में बनी और दुनिया की सबसे ऊँची प्रतिमा है।
- क़ुतुब मीनार (लगभग 72.5 मीटर): दिल्ली की यह मीनार दुनिया की सबसे ऊँची ईंटों से बनी मीनार मानी जाती है और यूनेस्को विश्व धरोहर है।
- मुंबई की गगनचुंबी इमारतें: भारत की ज़्यादातर सबसे ऊँची रिहायशी इमारतें मुंबई में हैं, जहाँ ज़मीन कम और आबादी ज़्यादा है।
- चिनाब रेल पुल: जम्मू-कश्मीर में चिनाब नदी पर बना यह पुल नदी तल से लगभग 359 मीटर ऊँचा है और दुनिया का सबसे ऊँचा रेलवे आर्च पुल माना जाता है।
गगनचुंबी इमारतें क्यों बनती हैं?
बड़े शहरों में ज़मीन महँगी और कम होती है, इसलिए ऊपर की ओर बढ़ना ज़रूरी हो जाता है। लेकिन ऊँची इमारतों के साथ आग से सुरक्षा, भूकंप-रोधी डिज़ाइन, पानी और बिजली की व्यवस्था जैसी चुनौतियाँ भी आती हैं — जिनके लिए आधुनिक इंजीनियरिंग लगातार नए तरीक़े खोज रही है।
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