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भारत का पहला नक़्शा किसने बनाया? सर्वे ऑफ़ इंडिया और महान त्रिकोणमितीय सर्वेक्षण

जेम्स रेनेल का "मैप ऑफ़ हिंदूस्तान" (1782), 1767 में बना सर्वे ऑफ़ इंडिया, 1802 का महान त्रिकोणमितीय सर्वेक्षण और एवरेस्ट की ऊँचाई नापने वाले राधानाथ सिकदर।

· 8 अक्टूबर 2026 · 3 मिनट

आज हम मोबाइल पर एक उँगली से पूरे देश का नक़्शा देख लेते हैं। लेकिन दो-ढाई सौ साल पहले भारत का सही नक़्शा बनाना एक विशाल वैज्ञानिक अभियान था, जिसमें दशकों लगे और जिसमें हज़ारों लोगों ने जंगलों, पहाड़ों और नदियों के पार नाप-जोख की। "भारत का पहला नक़्शा किसने बनाया?" — इसका जवाब इसी कहानी में छिपा है।

प्राचीन दुनिया के नक़्शों में भारत

भारत का उल्लेख और मोटा-मोटा चित्रण बहुत पुराने नक़्शों में भी मिलता है। दूसरी सदी के यूनानी विद्वान टॉलेमी की "ज्योग्राफ़ी" में भारत का एक अनुमानित चित्र था, पर उसमें आकार और दूरियाँ काफ़ी ग़लत थीं। अरब और फ़ारसी भूगोलवेत्ताओं ने भी भारत के नक़्शे बनाए।

पहला अपेक्षाकृत सटीक नक़्शा: जेम्स रेनेल (1782)

ईस्ट इंडिया कंपनी के सर्वेक्षक जेम्स रेनेल बंगाल के पहले सर्वेयर जनरल थे। उन्होंने कई वर्षों के सर्वेक्षण के बाद 1782 में "मैप ऑफ़ हिंदूस्तान" प्रकाशित किया। इसे पूरे उपमहाद्वीप का पहला अपेक्षाकृत सटीक नक़्शा माना जाता है। इसी कारण रेनेल को अक्सर "भारतीय भूगोल का जनक" भी कहा जाता है।

सर्वे ऑफ़ इंडिया (1767)

भारत का सर्वेक्षण विभाग — सर्वे ऑफ़ इंडिया — 1767 में बना। यह भारत सरकार के सबसे पुराने वैज्ञानिक विभागों में से एक है और आज इसका मुख्यालय देहरादून में है। देश के आधिकारिक नक़्शे यही विभाग तैयार करता है।

महान त्रिकोणमितीय सर्वेक्षण (1802 से)

1802 में विलियम लैम्बटन ने चेन्नई (मद्रास) के पास से एक अद्भुत परियोजना शुरू की — महान त्रिकोणमितीय सर्वेक्षण (Great Trigonometrical Survey)। इसमें ज़मीन पर दूर-दूर तक बड़े त्रिभुजों का जाल बनाकर बेहद सटीक दूरियाँ और कोण नापे गए। बाद में जॉर्ज एवरेस्ट ने इस काम को आगे बढ़ाया। यह सर्वेक्षण दशकों तक चला और इसी ने भारत के सटीक नक़्शों की नींव रखी।

क्या आप जानते हैं? 1852 के आसपास बंगाल के गणितज्ञ राधानाथ सिकदर ने गणनाओं से पता लगाया कि "पीक XV" दुनिया की सबसे ऊँची चोटी है। 1865 में इसका नाम जॉर्ज एवरेस्ट के नाम पर "माउंट एवरेस्ट" रखा गया।

सर्वेक्षण की चुनौतियाँ

सर्वेक्षकों को भारी-भरकम उपकरण — जैसे विशाल "थियोडोलाइट" — कंधों पर उठाकर पहाड़ों पर चढ़ना पड़ता था। मलेरिया, जंगली जानवर और ख़राब मौसम ने कई लोगों की जान ली। कई जगह ऊँचे मीनार बनाकर उन पर उपकरण रखे गए ताकि दूर के बिंदु दिख सकें।

नक़्शा पढ़ना कैसे सीखें?

हर नक़्शे में चार चीज़ें ज़रूर देखिए: पैमाना (नक़्शे पर 1 सेंटीमीटर ज़मीन पर कितनी दूरी है), दिशा (उत्तर की ओर इशारा करता तीर), संकेत-सूची (सड़क, रेल, नदी और शहरों के प्रतीक) और अक्षांश-देशांतर की रेखाएँ, जिनसे किसी भी जगह की सटीक स्थिति बताई जाती है। भारत 8° से 37° उत्तरी अक्षांश और 68° से 97° पूर्वी देशांतर के बीच फैला है।

आज के नक़्शे

आज नक़्शे उपग्रहों, GPS और ड्रोन से बनते हैं। भारत का अपना उपग्रह-आधारित नेविगेशन तंत्र NavIC है, और सर्वे ऑफ़ इंडिया डिजिटल नक़्शे भी उपलब्ध कराता है। ग्रामीण इलाक़ों में "स्वामित्व" जैसी योजनाओं के तहत ड्रोन से ज़मीन का सर्वे किया जा रहा है। फिर भी इन सबकी शुरुआत उन्हीं सर्वेक्षकों से हुई, जिन्होंने पैदल चलकर देश को नापा था।

और पढ़ें: भारत के पुराने नाम · भूगोल के प्रश्न · कक्षा 6 क्विज़।

स्रोत

  1. भारतीय सर्वेक्षण विभाग (सर्वे ऑफ़ इंडिया) (नए टैब में खुलता है)
  2. विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (नए टैब में खुलता है)
भारत का पहला नक़्शा किसने बनाया? सर्वे ऑफ़ इंडिया और महान त्रिकोणमितीय सर्वेक्षण

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