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जयपुर को गुलाबी शहर क्यों कहते हैं? इतिहास और रोचक तथ्य

1876 में प्रिंस ऑफ़ वेल्स के स्वागत में पूरे पुराने शहर को गुलाबी रंगा गया था। सवाई जय सिंह का बसाया योजनाबद्ध शहर, हवा महल और जंतर-मंतर।

· 7 अक्टूबर 2026 · 3 मिनट

राजस्थान की राजधानी जयपुर को दुनिया "गुलाबी शहर" (पिंक सिटी) के नाम से जानती है। पुराने शहर की इमारतें आज भी एक ख़ास गुलाबी-टेराकोटा रंग में रंगी दिखती हैं। लेकिन यह रंग आया कहाँ से? इसकी कहानी जितनी रंगीन है, उतना ही रोचक है जयपुर का इतिहास।

जयपुर की स्थापना

जयपुर की स्थापना 1727 में आमेर के राजा सवाई जय सिंह द्वितीय ने की थी। वे स्वयं गणित और खगोलविज्ञान के विद्वान थे। शहर की योजना वास्तुकार विद्याधर भट्टाचार्य ने वास्तु और शिल्प शास्त्र के सिद्धांतों के अनुसार बनाई। जयपुर भारत के शुरुआती योजनाबद्ध शहरों में से एक है — चौड़ी सीधी सड़कें, बाज़ारों की व्यवस्थित क़तारें और शहर को खंडों में बाँटने वाली ग्रिड प्रणाली।

गुलाबी रंग की कहानी

1876 में ब्रिटेन के प्रिंस ऑफ़ वेल्स (बाद में राजा एडवर्ड सप्तम) भारत आए। उनके स्वागत के लिए जयपुर के महाराजा सवाई राम सिंह द्वितीय ने पूरे पुराने शहर को गुलाबी रंग से रंगवा दिया, क्योंकि यह रंग आतिथ्य और स्वागत का प्रतीक माना जाता है। तभी से यह रंग जयपुर की पहचान बन गया और पुराने शहर की इमारतों पर इसी रंग को बनाए रखने की परंपरा चली आ रही है।

क्या आप जानते हैं? 2019 में जयपुर के "परकोटे वाले शहर" (वॉल्ड सिटी) को यूनेस्को विश्व धरोहर घोषित किया गया।

हवा महल

1799 में महाराजा सवाई प्रताप सिंह ने हवा महल बनवाया। इसकी 953 छोटी-छोटी खिड़कियाँ (झरोखे) इस तरह बनाई गई थीं कि राजपरिवार की महिलाएँ बिना दिखे बाहर सड़क के उत्सव और जुलूस देख सकें। इन झरोखों से बहती हवा महल को गर्मी में भी ठंडा रखती थी — इसी से इसका नाम पड़ा।

जंतर-मंतर: पत्थर की वेधशाला

सवाई जय सिंह ने दिल्ली, जयपुर, उज्जैन, वाराणसी और मथुरा में खगोलीय वेधशालाएँ बनवाईं। इनमें सबसे बड़ी जयपुर का जंतर-मंतर है, जिसे 2010 में यूनेस्को विश्व धरोहर घोषित किया गया। यहाँ का सम्राट यंत्र दुनिया की सबसे बड़ी पत्थर की धूपघड़ी है, जो लगभग दो सेकंड की सटीकता तक समय बता सकती है।

आमेर क़िला

जयपुर से कुछ किलोमीटर दूर पहाड़ी पर बना आमेर का क़िला पहले कछवाहा राजपूतों की राजधानी था। यह "राजस्थान के पहाड़ी क़िलों" के समूह में शामिल है, जिसे 2013 में यूनेस्को विश्व धरोहर का दर्जा मिला। इसका शीश महल शीशे की बारीक कारीगरी के लिए प्रसिद्ध है।

शहर की बनावट

पुराना जयपुर ऊँची दीवारों से घिरा था, जिनमें आने-जाने के लिए बड़े दरवाज़े बने थे — जैसे चाँदपोल, सूरजपोल और सांगानेरी गेट। शहर के अंदर सड़कों की सीधी ग्रिड ने इसे कई चौकोर खंडों में बाँटा, और हर खंड में अलग-अलग कारीगरों और व्यापारियों के बाज़ार बसाए गए। जौहरी बाज़ार और बापू बाज़ार जैसे पुराने बाज़ार आज भी इसी योजना की याद दिलाते हैं।

और भी रोचक बातें

  • दिल्ली, आगरा और जयपुर मिलकर पर्यटन का प्रसिद्ध "स्वर्णिम त्रिभुज" (गोल्डन ट्रायंगल) बनाते हैं।
  • जयपुर रत्नों की कटाई, ब्लू पॉटरी और ब्लॉक प्रिंटिंग के लिए भी दुनिया भर में जाना जाता है।
  • मकर संक्रांति पर जयपुर का आसमान पतंगों से भर जाता है।
  • जयपुर के पास नाहरगढ़ और जयगढ़ क़िले भी हैं; जयगढ़ में रखी "जयवाना" तोप को पहियों पर रखी दुनिया की बड़ी तोपों में गिना जाता है।

और पढ़ें: दिल्ली के 10 रोचक तथ्य · इतिहास के प्रश्न।

स्रोत

  1. राजस्थान पर्यटन (नए टैब में खुलता है)
  2. यूनेस्को विश्व धरोहर (नए टैब में खुलता है)
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