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समुद्र का पानी खारा क्यों होता है, नदियों का पानी मीठा क्यों?

समुद्र में घुला नमक चट्टानों, नदियों और समुद्र की तलहटी से आता है। लाखों वर्षों में इसके जमा होने और पानी के वाष्प बनकर उड़ने से समुद्र खारा बना रहता है, जबकि नदियों में नमक की मात्रा अपेक्षाकृत कम होती है।

· 2 नवंबर 2026 · 7 मिनट

समुद्र का पानी खारा क्यों होता है, इसका मुख्य कारण है उसमें घुले नमक और खनिज, जो लाखों वर्षों से जमा होते आए हैं। बारिश चट्टानों से खनिजों को घोलकर नदियों तक पहुँचाती है और नदियाँ उन्हें समुद्र में ले जाती हैं। समुद्र का पानी वाष्प बनकर उड़ जाता है, लेकिन उसमें घुले अधिकांश लवण पीछे रह जाते हैं, इसलिए समुद्र का पानी खारा बना रहता है।

बारिश चट्टानों से नमक समुद्र तक कैसे पहुँचाती है?

बारिश का पानी पूरी तरह शुद्ध नहीं होता। यह हवा से कार्बन डाइऑक्साइड सोखकर कार्बोनिक अम्ल (carbonic acid) बनाता है, जो चट्टानों के कुछ खनिजों को धीरे-धीरे घोलने में मदद करता है। जब मानसून में पानी पहाड़ियों, खेतों और सड़कों से बहता है, तो अपने साथ घुले हुए पदार्थों को छोटी धाराओं और नदियों तक ले जाता है।

भारी बारिश के बाद गाँव की कच्ची सड़क पर बहने वाले मटमैले पानी को देखिए। उसमें मिट्टी के ऐसे कण होते हैं जिन्हें हम देख सकते हैं, लेकिन पानी में घुले खनिज आँखों से दिखाई नहीं देते। नदियाँ इन पदार्थों को आगे ले जाकर झीलों, ज्वारनदमुखों और अंततः समुद्र तक पहुँचाती हैं, जिससे समुद्र में लवण की मात्रा बढ़ती है।

नदियाँ नमक ले जाती हैं, फिर उनका पानी मीठा क्यों रहता है?

नदियों के पानी में भी घुले हुए लवण होते हैं, लेकिन उनकी मात्रा सामान्यतः समुद्र की तुलना में बहुत कम होती है। बारिश और पिघलती बर्फ नदियों में लगातार नया पानी पहुँचाती हैं, जबकि नदी का पानी बहकर समुद्र की ओर जाता रहता है। पानी की यह निरंतर आपूर्ति और प्रवाह नदियों में नमक को समुद्र जैसी मात्रा में जमा होने से रोकते हैं।

घर में रखे एक गिलास पानी का उदाहरण लें। उसमें थोड़ी मात्रा में घुले पदार्थ हो सकते हैं, फिर भी पानी स्वाद में मीठा लग सकता है। इसी तरह मानसून के दौरान किसी भारतीय नदी में बहुत अधिक वर्षाजल पहुँचने से घुले हुए पदार्थों की सांद्रता (concentration) कम हो सकती है।

मीठे पानी का अर्थ यह नहीं है कि उसमें बिल्कुल भी नमक नहीं होता। इस शब्द का उपयोग ऐसे पानी के लिए होता है जिसमें घुले हुए लवणों की मात्रा अपेक्षाकृत कम होती है और जो समुद्री पानी से अलग होता है।

समुद्र में नमक लाखों वर्षों तक कैसे बना रहता है?

नदियाँ समुद्र में खनिज पहुँचाती हैं, लेकिन समुद्र से पानी वाष्पीकरण (evaporation) के कारण बाहर भी निकलता है। सूर्य की गर्मी से समुद्र की सतह का पानी जलवाष्प बनकर वायुमंडल में चला जाता है, जबकि अधिकांश घुले हुए लवण वहीं रह जाते हैं। बाद में जलवाष्प ठंडी होकर बादल बनाती है और बारिश के रूप में धरती पर लौट सकती है।

यह जल चक्र (water cycle) का हिस्सा है, जिसमें पानी लगातार वायुमंडल, जमीन और समुद्र के बीच घूमता रहता है। एक प्लेट पर नमकीन पानी की बूँद सुखाकर देखें, तो पानी गायब हो जाएगा लेकिन नमक का अवशेष रह जाएगा। समुद्र में भी यही प्रक्रिया बहुत बड़े पैमाने पर होती है, हालाँकि समुद्र का पानी लगातार वायुमंडल के साथ आदान-प्रदान और आपस में मिश्रण करता रहता है।

समुद्र में नमक अनंत मात्रा में जमा नहीं होता। कुछ घुले हुए पदार्थ समुद्री जीव इस्तेमाल करते हैं, कुछ समुद्र की तलहटी में तलछट का हिस्सा बन जाते हैं और कुछ चट्टानों के साथ रासायनिक अभिक्रियाओं में शामिल होते हैं। लंबे भूवैज्ञानिक समय में नमक के आने और बाहर निकलने के बीच का संतुलन समुद्र की कुल लवणता को निर्धारित करता है।

समुद्र को खारा बनाने वाले दूसरे स्रोत कौन-से हैं?

जमीन की चट्टानों का अपक्षय (weathering) घुले हुए लवणों का एक बड़ा स्रोत है, लेकिन यही एकमात्र स्रोत नहीं है। समुद्र की तलहटी में मौजूद दरारों से पानी गर्म चट्टानों के संपर्क में आता है, जहाँ रासायनिक अभिक्रियाएँ उसकी संरचना बदल देती हैं। गर्म हुआ पानी जलतापीय छिद्रों (hydrothermal vents) से वापस समुद्र में निकल सकता है और अपने साथ घुले पदार्थ लाता है।

समुद्र के नीचे होने वाली ज्वालामुखीय गतिविधियाँ भी खनिज छोड़ती हैं। इन प्रक्रियाओं से स्पष्ट होता है कि समुद्र की लवणता केवल नदियों से आने वाले साधारण खाने के नमक पर निर्भर नहीं करती। समुद्री पानी में सोडियम और क्लोराइड सबसे अधिक पाए जाने वाले घुले आयन (ions) हैं और साधारण खाने का नमक भी इन्हीं से बनता है।

समुद्री पानी में नमक कितना होता है?

वैज्ञानिक पानी में घुले नमक की मात्रा को लवणता (salinity) कहते हैं। समुद्री पानी की औसत लवणता लगभग 35 प्रति हजार होती है, यानी उसके वजन का करीब 3.5% हिस्सा घुले हुए लवणों का होता है। यह मात्रा हर जगह समान नहीं रहती, क्योंकि वाष्पीकरण, बारिश, नदियों से आने वाला पानी और बर्फ बनने की प्रक्रिया पानी तथा नमक के संतुलन को प्रभावित करती हैं।

पानी का स्रोत या प्रकारनमक की सामान्य मात्राइसका अर्थ
मीठा पानीआमतौर पर 0.1% से कमघुले हुए नमक की मात्रा अपेक्षाकृत कम
औसत समुद्री पानीलगभग 3.5%इसमें काफी मात्रा में लवण घुले होते हैं
नदी का पानीसमुद्री पानी से सामान्यतः बहुत कमखनिजों की मात्रा नदी और उसके आसपास की जमीन पर निर्भर करती है
अधिक वाष्पीकरण वाले तटीय जलऔसत समुद्री पानी से अधिक हो सकती हैपानी घटने पर बचे हुए लवण अधिक सघन हो सकते हैं
क्या आप जानते हैं? यदि समुद्रों में मौजूद नमक को निकालकर पृथ्वी की पूरी भूमि पर समान रूप से फैला दिया जाए, तो उसकी परत 166 मीटर से भी अधिक मोटी होगी। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि समुद्र में घुला नमक कितना अधिक है, भले ही पानी में मिला होने के कारण वह दिखाई नहीं देता।

समुद्र की लवणता हर जगह एक जैसी नहीं होती। जहाँ वाष्पीकरण अधिक और मीठे पानी की आपूर्ति कम होती है, वहाँ पानी अधिक खारा हो सकता है, जबकि भारी बारिश, नदी के बहाव और बर्फ पिघलने से लवणता घट सकती है। प्रकृति से जुड़े दूसरे विषयों को समझने के लिए रोचकदुनिया का रोचक तथ्यों का संग्रह और सभी लेखों का पुस्तकालय भी पढ़ सकते हैं।

मुख्य बिंदु

  • बारिश चट्टानों से खनिज घोलकर उन्हें नदियों तक पहुँचाती है।
  • नदियाँ घुले हुए खनिज समुद्र में ले जाती हैं, लेकिन उनमें नमक की मात्रा आमतौर पर समुद्र से बहुत कम होती है।
  • वाष्पीकरण में समुद्र का पानी निकल जाता है, जबकि अधिकांश घुले हुए लवण पीछे रह जाते हैं।
  • समुद्र की तलहटी के जलतापीय छिद्र और पानी के नीचे की ज्वालामुखीय गतिविधियाँ भी खनिज पहुँचाती हैं।
  • समुद्री पानी के वजन का औसतन लगभग 3.5% हिस्सा घुले हुए लवणों का होता है, हालाँकि जगह के अनुसार यह बदलता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या नदी के पानी में बिल्कुल नमक नहीं होता?

नहीं। नदियों में भी घुले हुए लवण और खनिज मौजूद होते हैं, लेकिन उनकी मात्रा सामान्यतः समुद्र की तुलना में बहुत कम होती है। इसी कारण नदी का पानी मीठे पानी की श्रेणी में आता है।

क्या समुद्र हर साल पहले से अधिक खारा होता जाता है?

ज़रूरी नहीं। नदियाँ और समुद्र की तलहटी में होने वाली प्रक्रियाएँ घुले हुए पदार्थ पहुँचाती हैं, जबकि तलछट, समुद्री जीव और रासायनिक अभिक्रियाएँ उनमें से कुछ पदार्थों को हटा देती हैं। समुद्र की कुल लवणता इन स्रोतों और निकासी के बीच संतुलन पर निर्भर करती है।

क्या प्यास बुझाने के लिए समुद्र का पानी पी सकते हैं?

नहीं। समुद्री पानी में नमक की मात्रा इतनी अधिक होती है कि मानव शरीर उसे पीने के पानी की तरह सुरक्षित रूप से इस्तेमाल नहीं कर सकता। अतिरिक्त नमक बाहर निकालने के लिए गुर्दों को अधिक पानी की जरूरत पड़ती है, जिससे शरीर में पानी की कमी और बढ़ सकती है।

स्रोत: समुद्र की लवणता के बारे में अधिक जानकारी के लिए अमेरिका के राष्ट्रीय समुद्री और वायुमंडलीय प्रशासन की जानकारी तथा अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण का विवरण देखें। इन स्रोतों में बताया गया है कि चट्टानें, नदियाँ, वाष्पीकरण और समुद्र की तलहटी में होने वाली प्रक्रियाएँ समुद्री पानी को कैसे प्रभावित करती हैं। सामान्य ज्ञान बढ़ाने के लिए रोचकदुनिया की सामान्य ज्ञान प्रश्नोत्तरी भी आजमा सकते हैं।

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