गगनयान: अंतरिक्ष में भारतीयों को भेजने का भारत का मिशन
गगनयान भारत का मानव अंतरिक्ष मिशन है: तीन अंतरिक्ष यात्रियों को 400 किमी की कक्षा में भेजने की योजना, चुने गए चार यात्री, व्योममित्र और अहम परीक्षण।
रोहित टंडन · 17 अक्टूबर 2026 · 4 मिनट
3 अप्रैल 1984 को राकेश शर्मा सोवियत यान सोयुज़ T-11 से अंतरिक्ष जाने वाले पहले भारतीय बने। प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने पूछा कि अंतरिक्ष से भारत कैसा दिखता है, तो उन्होंने कहा — "सारे जहाँ से अच्छा"। अब भारत अपने ही रॉकेट और अपने ही यान से भारतीयों को अंतरिक्ष भेजने की तैयारी कर रहा है। इस मिशन का नाम है गगनयान।
गगनयान का लक्ष्य
गगनयान कार्यक्रम की घोषणा 15 अगस्त 2018 को लाल क़िले से की गई थी। इसरो के अनुसार इसका लक्ष्य तीन अंतरिक्ष यात्रियों को पृथ्वी से लगभग 400 किलोमीटर ऊपर की कक्षा में तीन दिन तक के मिशन पर भेजना और फिर उन्हें भारतीय समुद्री क्षेत्र में सुरक्षित उतारना है। ऐसा कर लेने पर भारत सोवियत संघ/रूस, अमेरिका और चीन के बाद अपने दम पर इंसान को अंतरिक्ष भेजने वाला चौथा देश बन जाएगा।
गगनयान के मुख्य हिस्से
| हिस्सा | काम |
|---|---|
| HLVM3 रॉकेट | LVM3 का "मानव-योग्य" रूप, जिसमें सुरक्षा के अतिरिक्त इंतज़ाम हैं |
| क्रू मॉड्यूल | वह कैप्सूल जिसमें अंतरिक्ष यात्री बैठेंगे; हवा, दबाव और तापमान नियंत्रित |
| सर्विस मॉड्यूल | इंजन, ईंधन और बिजली देने वाला हिस्सा |
| क्रू एस्केप सिस्टम | रॉकेट में गड़बड़ी हो तो यात्रियों वाले कैप्सूल को तुरंत दूर ले जाने वाली प्रणाली |
| व्योममित्र | मानव जैसा रोबोट, जो बिना चालक वाली परीक्षण उड़ानों में जाएगा |
चुने गए अंतरिक्ष यात्री
27 फ़रवरी 2024 को प्रधानमंत्री ने गगनयान के लिए चुने गए चार अंतरिक्ष यात्रियों के नाम बताए। चारों भारतीय वायुसेना के टेस्ट पायलट हैं: प्रशांत बालकृष्णन नायर, अजीत कृष्णन, अंगद प्रताप और शुभांशु शुक्ला। इन्होंने रूस और भारत में कठिन प्रशिक्षण लिया है — बेंगलुरु में इसरो की अंतरिक्ष यात्री प्रशिक्षण सुविधा में उन्हें भारहीनता, आपात स्थितियों से निपटने और यान के उपकरण चलाने का अभ्यास कराया गया। जून–जुलाई 2025 में शुभांशु शुक्ला "एक्सिओम-4" मिशन से अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) गए — वे ISS पहुँचने वाले पहले भारतीय और अंतरिक्ष जाने वाले दूसरे भारतीय बने। उनका यह अनुभव गगनयान के काम आएगा। भारतीय मूल की अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स के बारे में भी पढ़ें।
परीक्षण: सुरक्षा सबसे पहले
- TV-D1 (21 अक्टूबर 2023): इस परीक्षण उड़ान में क्रू एस्केप सिस्टम को आज़माया गया। कैप्सूल रॉकेट से अलग होकर पैराशूट से बंगाल की खाड़ी में उतरा और नौसेना ने उसे निकाला।
- पैराशूट और लैंडिंग परीक्षण: समुद्र में सुरक्षित उतरने के लिए कई चरणों वाले पैराशूट बार-बार परखे गए।
- बिना चालक वाली उड़ानें: इंसानों को भेजने से पहले व्योममित्र रोबोट के साथ बिना चालक वाली उड़ानें तय हैं। उड़ानों की ताज़ा तारीख़ें इसरो की वेबसाइट पर देखें, क्योंकि सुरक्षा जाँच के अनुसार ये बदलती रहती हैं।
क्या आप जानते हैं? "व्योममित्र" नाम संस्कृत के दो शब्दों से बना है — "व्योम" यानी अंतरिक्ष और "मित्र" यानी दोस्त। यह रोबोट बोल सकता है, यान के उपकरणों पर नज़र रख सकता है और ज़मीन पर बैठे वैज्ञानिकों को जानकारी भेज सकता है।
आगे का सपना
गगनयान सिर्फ़ शुरुआत है। सरकार ने 2035 तक भारत का अपना अंतरिक्ष स्टेशन — "भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन" — बनाने और 2040 तक किसी भारतीय को चाँद पर उतारने का लक्ष्य रखा है। इसरो के अब तक के मिशनों की सूची इसरो के प्रमुख मिशन में पढ़ें।
मुख्य बिंदु
- गगनयान भारत का पहला मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम है।
- लक्ष्य: तीन यात्री, 400 किमी की कक्षा, तीन दिन तक का मिशन।
- चार चुने गए यात्री वायुसेना के टेस्ट पायलट हैं।
- राकेश शर्मा (1984) अंतरिक्ष जाने वाले पहले भारतीय थे।
- 2035 तक भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन और 2040 तक चाँद पर भारतीय का लक्ष्य है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
अंतरिक्ष जाने वाले पहले भारतीय कौन थे?
राकेश शर्मा, जो 3 अप्रैल 1984 को सोवियत यान सोयुज़ T-11 से अंतरिक्ष गए।
गगनयान में कितने अंतरिक्ष यात्री जाएँगे?
योजना के अनुसार तीन अंतरिक्ष यात्री, लगभग 400 किलोमीटर की कक्षा में।
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स्रोत
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