चक्रवातों के नाम कैसे रखे जाते हैं: पूरी प्रक्रिया
चक्रवातों के नाम कैसे रखे जाते हैं: 13 देशों की सूची, भारत के दिए नाम, नाम रखने के नियम, चक्रवात की श्रेणियाँ और "हरिकेन" तथा "टाइफ़ून" से अंतर।
रोहित टंडन · 28 अक्टूबर 2026 · 4 मिनट
फ़ानी, अम्फान, बिपरजॉय — ख़बरों में आने वाले चक्रवातों के ये नाम आख़िर रखता कौन है? और एक बार इस्तेमाल हुआ नाम दोबारा क्यों नहीं आता? यहाँ समझिए कि उत्तर हिंद महासागर में चक्रवातों के नाम कैसे रखे जाते हैं, और चक्रवात से जुड़े कुछ ज़रूरी तथ्य।
नाम क्यों रखे जाते हैं?
किसी चक्रवात को नंबर या तकनीकी कोड की बजाय एक छोटे, आसान नाम से पुकारना लोगों, मीडिया और सरकारी एजेंसियों के लिए बहुत आसान होता है। जब एक ही समय में एक से ज़्यादा चक्रवात सक्रिय हों, तो नामों से भ्रम नहीं होता। साथ ही आसान नाम चेतावनी को तेज़ी से और साफ़ तरीक़े से लोगों तक पहुँचाने में मदद करता है।
नाम कौन रखता है?
बंगाल की खाड़ी और अरब सागर — यानी उत्तर हिंद महासागर — में बनने वाले चक्रवातों के नाम विश्व मौसम संगठन (WMO) और संयुक्त राष्ट्र के ESCAP के "उष्णकटिबंधीय चक्रवात पैनल" के सदस्य देश तय करते हैं। इस क्षेत्र में नाम देने की ज़िम्मेदारी नई दिल्ली स्थित भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के "क्षेत्रीय विशिष्ट मौसम विज्ञान केंद्र" (RSMC) की है।
| साल | क्या हुआ |
|---|---|
| 2004 | इस क्षेत्र में चक्रवातों के नाम रखने की शुरुआत; 8 देशों की सूची |
| 2018 | पैनल में 13 देश हो गए |
| 2020 | 13 देशों के 13-13 नाम — कुल 169 नामों की नई सूची जारी |
13 सदस्य देश हैं: बांग्लादेश, भारत, ईरान, मालदीव, म्यांमार, ओमान, पाकिस्तान, क़तर, सऊदी अरब, श्रीलंका, थाईलैंड, संयुक्त अरब अमीरात और यमन। नाम सूची के क्रम में बारी-बारी से इस्तेमाल होते हैं।
भारत के दिए गए नाम
2020 की सूची में भारत ने ये 13 नाम दिए: गति, तेज, मुरासु, आग, व्योम, झर, प्रोबाहो, नीर, प्रभंजन, घूर्णी, अंबुद, जलधि और वेग। इनमें से कई संस्कृत और भारतीय भाषाओं के शब्द हैं, जो हवा, पानी, गति या बादल से जुड़े हैं — जैसे "व्योम" यानी आकाश और "जलधि" यानी समुद्र।
नाम रखने के नियम
- नाम राजनीति, धर्म, संस्कृति या किसी लिंग के प्रति अपमानजनक नहीं होना चाहिए।
- नाम छोटा (अधिकतम 8 अक्षर) और बोलने में आसान होना चाहिए।
- नाम किसी भी सदस्य देश की भावनाओं को ठेस न पहुँचाए।
- एक बार इस्तेमाल हुआ नाम दोबारा इस्तेमाल नहीं होता — वह सूची से हमेशा के लिए हटा दिया जाता है।
- नाम तभी दिया जाता है जब तूफ़ान "चक्रवाती तूफ़ान" बन जाए, यानी हवा की रफ़्तार लगभग 62 किमी प्रति घंटा या उससे ज़्यादा हो।
क्या आप जानते हैं? मई 2020 का चक्रवात "अम्फान" (थाईलैंड का दिया नाम) पुरानी सूची का आख़िरी नाम था। उसके बाद जून 2020 में आया "निसर्ग" (बांग्लादेश का दिया नाम) नई सूची का पहला नाम बना। बंगाल की खाड़ी में अरब सागर की तुलना में कहीं ज़्यादा चक्रवात बनते हैं।
चक्रवात की श्रेणियाँ (IMD)
| श्रेणी | हवा की रफ़्तार (किमी/घंटा) |
|---|---|
| अवदाब (डिप्रेशन) | 31–49 |
| गहरा अवदाब | 50–61 |
| चक्रवाती तूफ़ान — यहीं से नाम मिलता है | 62–88 |
| गंभीर चक्रवाती तूफ़ान | 89–117 |
| बहुत गंभीर चक्रवाती तूफ़ान | 118–166 |
| अत्यंत गंभीर चक्रवाती तूफ़ान | 167–221 |
| सुपर चक्रवाती तूफ़ान | 222 और ज़्यादा |
चक्रवात, हरिकेन और टाइफ़ून
ये तीनों एक ही तरह के तूफ़ान हैं, बस जगह के हिसाब से नाम अलग है: हिंद महासागर में "चक्रवात" (साइक्लोन), अटलांटिक और पूर्वी प्रशांत में "हरिकेन", और पश्चिमी प्रशांत में "टाइफ़ून"। 1999 के ओडिशा सुपर चक्रवात में लगभग 10,000 लोगों की जान गई थी, लेकिन 2013 के चक्रवात "फ़ैलिन" के समय लगभग 10 लाख लोगों को समय पर सुरक्षित निकालकर बहुत-सी जानें बचाई गईं — यह बेहतर पूर्वानुमान और तैयारी की बड़ी सफलता थी। समुद्र के बारे में और पढ़ें: दुनिया के महासागर और इतिहास की सबसे बड़ी सुनामी।
मुख्य बिंदु
- उत्तर हिंद महासागर के चक्रवातों के नाम 13 देशों की सूची से आते हैं।
- नाम देने की ज़िम्मेदारी IMD के नई दिल्ली केंद्र (RSMC) की है।
- 2020 में 169 नामों की नई सूची बनी; भारत ने 13 नाम दिए।
- एक बार इस्तेमाल हुआ नाम दोबारा नहीं आता।
- हवा 62 किमी/घंटा पार करे, तब तूफ़ान को नाम मिलता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
भारत में चक्रवातों के नाम कौन रखता है?
नई दिल्ली स्थित भारतीय मौसम विज्ञान विभाग का क्षेत्रीय केंद्र (RSMC), 13 देशों की तय सूची से क्रम के अनुसार।
क्या चक्रवात का नाम दोबारा इस्तेमाल होता है?
नहीं, उत्तर हिंद महासागर की सूची का हर नाम केवल एक बार इस्तेमाल होता है।
और लेख: भूगोल · भूगोल के प्रश्न।
स्रोत
उपयोगी लगा? शेयर करें।