सरदार पटेल और रियासतों का विलय: एक भारत कैसे बना
1947 में 560 से ज़्यादा रियासतें भारत के लगभग 40% भूभाग पर फैली थीं। सरदार पटेल और वी.पी. मेनन ने इन्हें एक देश में कैसे जोड़ा, और तीन रियासतों में देर क्यों लगी, यह यहाँ पढ़ें।
रोहित टंडन · 27 अक्टूबर 2026 · 3 मिनट
सरदार पटेल और रियासतों का विलय वह काम था जिसने टुकड़ों में बँटे नक़्शे को एक भारत बनाया। 15 अगस्त 1947 को आज़ादी के समय 560 से ज़्यादा रियासतें भारत, पाकिस्तान या स्वतंत्र रहने में से कुछ भी चुन सकती थीं। लगभग दो साल के भीतर इनमें से लगभग सभी भारत में मिल गईं, और इसका बड़ा श्रेय सरदार वल्लभभाई पटेल और उनके सचिव वी.पी. मेनन की धैर्य भरी, दृढ़ मेहनत को जाता है।
1947 में चुनौती कितनी बड़ी थी?
अंग्रेज़ों के समय भारत में दो तरह के इलाक़े थे। प्रांतों पर अंग्रेज़ सीधे राज करते थे, जबकि रियासतों पर राजा, महाराजा और नवाब राज करते थे जो अंग्रेज़ी सर्वोच्चता (paramountcy) मानते थे। ये रियासतें मिलकर भारत के लगभग 40% भूभाग पर फैली थीं, और इनमें विशाल हैदराबाद से लेकर कुछ गाँवों जितनी छोटी जागीरें तक शामिल थीं। यह व्यवस्था कैसे बनी, यह ब्रिटिश भारत के रोचक तथ्य: 1858 से 1947 तक का राज में बताया गया है।
अंग्रेज़ गए तो रियासतों पर उनकी सर्वोच्चता भी ख़त्म हो गई। 1947 में दिल्ली से मद्रास जाने वाली किसी रेलगाड़ी की कल्पना कीजिए: रास्ते में वह अलग-अलग राजाओं की ज़मीन से गुज़रती। अगर हर रियासत अपना रास्ता चुनती, तो भारत का नक़्शा छेदों से भरा होता, और हर सीमा पर अलग चुंगी, अलग सेना और अलग नियम होते।
पटेल की योजना क्या थी?
5 जुलाई 1947 को रियासत विभाग बना, जिसकी ज़िम्मेदारी गृह मंत्री सरदार पटेल को मिली और वी.पी. मेनन इसके सचिव बने। उनका मुख्य औज़ार था विलय पत्र (Instrument of Accession)। इस पर हस्ताक्षर करने वाला शासक केवल तीन विषय भारत सरकार को सौंपता था: रक्षा, विदेश मामले और संचार, बाक़ी विषय कुछ समय के लिए उसी के पास रहते थे।
पटेल ने अपनापन और सख़्ती दोनों से काम लिया। उन्होंने राजाओं की देशभक्ति को पुकारा, उन्हें भोज और बैठकों में बुलाया, और याद दिलाया कि उनकी प्रजा आज़ाद भारत का हिस्सा बनना चाहती है। ज़्यादातर शासकों ने 15 अगस्त 1947 से पहले हस्ताक्षर कर दिए। बाद में छोटी रियासतों को बड़ी इकाइयों में मिलाया गया और शासकों को हर साल एक भत्ता दिया गया, जिसे प्रिवी पर्स (privy purse) कहते थे और जो 1971 में ख़त्म कर दिया गया।
किन रियासतों के विलय में देर लगी?
तीन रियासतें 15 अगस्त 1947 तक भारत में नहीं मिली थीं: जूनागढ़, जम्मू-कश्मीर और हैदराबाद। हर एक की समस्या अलग थी और हर एक का हल भी अलग तरीक़े से निकला। नीचे की तालिका में मुख्य तारीख़ें हैं।
| रियासत | समस्या | हल कैसे निकला | वर्ष |
|---|---|---|---|
| जूनागढ़ | नवाब ने पाकिस्तान में मिलने की घोषणा की, जबकि ज़्यादातर जनता भारत चाहती थी | भारतीय प्रशासन ने कामकाज सँभाला; फ़रवरी 1948 के जनमत संग्रह (plebiscite) में भारी बहुमत भारत के पक्ष में रहा | 1948 |
| जम्मू-कश्मीर | महाराजा हरि सिंह ने फ़ैसला टाला; पाकिस्तान की ओर से क़बायली हमलावर घुस आए | महाराजा ने 26 अक्टूबर 1947 को विलय पत्र पर हस्ताक्षर किए | 1947 |
| हैदराबाद | निज़ाम स्वतंत्र रहना चाहता था; रज़ाकारों की हिंसा बढ़ रही थी | ऑपरेशन पोलो, 13–17 सितंबर 1948; निज़ाम ने 17 सितंबर को आत्मसमर्पण किया | 1948 |
| काठियावाड़ की छोटी रियासतें | एक ही क्षेत्र में 200 से ज़्यादा छोटी रियासतें | सौराष्ट्र संघ में जोड़ी गईं | 1948 |
| राजपूताना की रियासतें | अलग-अलग आकार की अनेक रियासतें | चरणों में मिलकर राजस्थान राज्य बनीं | 1949 |
हैदराबाद सबसे कठिन मामला था, क्योंकि वह बड़ा, धनी और ठीक भारत के बीच में था। ऑपरेशन पोलो केवल कुछ दिन चला, और उस इलाक़े में 17 सितंबर आज भी याद किया जाता है। एक भारत का सपना आज़ादी की लड़ाई ने दिखाया था, जिसकी झलक स्वतंत्रता संग्राम के प्रसिद्ध नारे और उन्हें देने वाले में मिलती है।
पटेल को लौह पुरुष क्यों कहा जाता है?
1928 के बारडोली सत्याग्रह में, जब पटेल ने लगान की भारी बढ़ोतरी के ख़िलाफ़ किसानों का नेतृत्व किया, तब उन्हें "सरदार" यानी नेता की उपाधि मिली। "लौह पुरुष" नाम 1947 और 1948 में दिखाई गई उनकी अटल इच्छाशक्ति से आया। उन्होंने प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के साथ मिलकर काम किया, जिनके बारे में जवाहरलाल नेहरू के 10 मुख्य तथ्य में पढ़ सकते हैं।
पटेल का जन्म 31 अक्टूबर 1875 को गुजरात के नडियाद में हुआ और 15 दिसंबर 1950 को उनका निधन हुआ। वे अपने काम का पूरा नतीजा देखने के लिए जीवित नहीं रहे, लेकिन जिस नक़्शे को उन्होंने गढ़ा वही आज के राज्यों की नींव है। 1991 में उन्हें मरणोपरांत (posthumously) भारत रत्न दिया गया।
क्या आप जानते हैं? गुजरात में नर्मदा नदी के पास पटेल के सम्मान में बनी स्टैच्यू ऑफ़ यूनिटी 182 मीटर ऊँची है, न्यूयॉर्क की स्टैच्यू ऑफ़ लिबर्टी से लगभग दोगुनी, और यह दुनिया की सबसे ऊँची प्रतिमा है।
आज हम इस विलय को कैसे याद करते हैं?
2014 से पटेल का जन्मदिन, 31 अक्टूबर, राष्ट्रीय एकता दिवस के रूप में मनाया जाता है। स्कूलों और दफ़्तरों में "रन फ़ॉर यूनिटी" होती है और देश को एक रखने की शपथ ली जाती है। बहुत-से विद्यार्थी यह कहानी पहली बार उसी सुबह की प्रार्थना सभा में सुनते हैं।
केवड़िया के पास बनी स्टैच्यू ऑफ़ यूनिटी 31 अक्टूबर 2018 को खुली और गुजरात में परिवारों की पसंदीदा सैर बन गई है। उसकी दर्शक दीर्घा से सरदार सरोवर बाँध देखते हुए पर्यटक याद करते हैं कि एक व्यक्ति के धैर्य ने सैकड़ों टुकड़ों को कैसे जोड़ा। उस दौर की और कहानियाँ भारत के स्वतंत्रता संग्राम के रोचक तथ्य, 1857 से 1947 में पढ़ें।
मुख्य बिंदु
- 1947 में 560 से ज़्यादा रियासतें भारत के लगभग 40% भूभाग पर फैली थीं।
- रियासत विभाग 5 जुलाई 1947 को सरदार पटेल के अधीन बना, और वी.पी. मेनन इसके सचिव थे।
- विलय पत्र से केवल रक्षा, विदेश मामले और संचार भारत सरकार को सौंपे गए।
- जूनागढ़, जम्मू-कश्मीर और हैदराबाद 15 अगस्त 1947 के बाद भारत में मिले।
- पटेल का जन्मदिन, 31 अक्टूबर, राष्ट्रीय एकता दिवस के रूप में मनाया जाता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1947 में कितनी रियासतें थीं?
1947 में 560 से ज़्यादा छोटी-बड़ी रियासतें थीं। ये मिलकर अविभाजित भारत के लगभग 40% भूभाग पर फैली थीं।
विलय पत्र क्या था?
यह एक क़ानूनी दस्तावेज़ था, जिस पर हस्ताक्षर करके कोई शासक भारत में शामिल होता था। इससे रियासत रक्षा, विदेश मामले और संचार भारत सरकार को सौंप देती थी।
हैदराबाद भारत में कब मिला?
हैदराबाद 13 से 17 सितंबर 1948 तक चले ऑपरेशन पोलो के बाद भारत में मिला। निज़ाम ने 17 सितंबर 1948 को आत्मसमर्पण किया। ऐसी और कहानियाँ हमारे इतिहास के लेखों में हैं।
स्रोत: एनसाइक्लोपीडिया ब्रिटानिका: वल्लभभाई पटेल और स्टैच्यू ऑफ़ यूनिटी की आधिकारिक वेबसाइट।
स्रोत
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