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अजंता और एलोरा की गुफाएँ: पत्थर में बसी भारत की कला

अजंता और एलोरा की गुफाएँ: अजंता के बौद्ध चित्र, 1819 में एक शिकारी को मिली गुफाएँ, एलोरा के बौद्ध, हिंदू और जैन मंदिर, और एक ही चट्टान से बना कैलाश मंदिर।

· 23 अक्टूबर 2026 · 4 मिनट

महाराष्ट्र की पहाड़ियों में चट्टानों को काटकर बनाई गई अजंता और एलोरा की गुफाएँ दुनिया में भारतीय कला के सबसे बड़े ख़ज़ानों में हैं। अजंता अपनी दीवारों पर बने रंगीन चित्रों के लिए प्रसिद्ध है, तो एलोरा अपनी विशाल मूर्तियों और एक ही चट्टान से तराशे गए मंदिर के लिए। दोनों 1983 में भारत के पहले यूनेस्को विश्व धरोहर स्थलों में शामिल हुईं।

अजंता और एलोरा एक नज़र में

बातअजंताएलोरा
गुफाएँलगभग 3034 (मुख्य)
धर्मबौद्धबौद्ध (12), हिंदू (17) और जैन (5)
समयलगभग दूसरी सदी ईसा पूर्व से 5वीं सदी ईस्वीलगभग 6ठी से 10वीं सदी ईस्वी
किसके लिए प्रसिद्धदीवार-चित्रमूर्तियाँ और कैलाश मंदिर
छत्रपति संभाजीनगर (औरंगाबाद) से दूरीलगभग 100 किमीलगभग 30 किमी

अजंता: रंगों में कहानियाँ

वाघोरा नदी के किनारे घोड़े की नाल के आकार की घाटी में बनी अजंता की गुफाएँ दो दौर में बनीं — पहला दौर सातवाहन काल में, लगभग दूसरी सदी ईसा पूर्व में, और दूसरा 5वीं सदी में वाकाटक राजा हरिषेण के समय। इनमें बौद्ध भिक्षुओं के रहने के कमरे (विहार) और प्रार्थना-भवन (चैत्य) हैं। दीवारों और छतों पर बने चित्र बुद्ध के जीवन और जातक कथाओं को दिखाते हैं। गुफा 1 में बना "पद्मपाणि बोधिसत्व" का चित्र भारतीय चित्रकला के सबसे प्रसिद्ध नमूनों में है। ये रंग पत्थरों, खनिजों और पौधों से बनाए गए थे।

क्या आप जानते हैं? सदियों तक जंगल में छिपी रहने के बाद अजंता की गुफाएँ 1819 में फिर दुनिया के सामने आईं, जब बाघ का शिकार करने निकले ब्रिटिश अफ़सर जॉन स्मिथ की नज़र एक गुफा के मुहाने पर पड़ी। उन्होंने गुफा 10 के एक खंभे पर अपना नाम और तारीख़ भी खुरच दी, जो आज भी दिखती है।

एलोरा: तीन धर्मों का संगम

एलोरा की गुफाएँ लगभग 6ठी से 10वीं सदी के बीच बनीं। इनमें बौद्ध, हिंदू और जैन — तीनों धर्मों की गुफाएँ एक-दूसरे के पास बनी हैं, जो उस समय के धार्मिक सद्भाव का सुंदर उदाहरण है। बौद्ध गुफाओं में तीन मंज़िला विहार है, हिंदू गुफाओं में शिव, विष्णु और देवियों की विशाल मूर्तियाँ हैं, और जैन गुफाओं में बारीक नक़्क़ाशी है।

कैलाश मंदिर: एक चट्टान का चमत्कार

एलोरा की गुफा 16 में बना कैलाश मंदिर दुनिया की सबसे अद्भुत इमारतों में गिना जाता है। इसे राष्ट्रकूट राजा कृष्ण प्रथम के समय, 8वीं सदी में, एक ही विशाल चट्टान को ऊपर से नीचे की ओर काटकर बनाया गया — यानी इसे जोड़ा नहीं, बल्कि तराशा गया। अनुमान है कि इसके लिए लगभग 2 लाख टन पत्थर काटकर हटाया गया। मंदिर भगवान शिव के निवास कैलाश पर्वत को दर्शाता है, और इसमें मंदिर, मंडप, हाथियों की मूर्तियाँ और ऊँचे स्तंभ — सब एक ही चट्टान के हैं।

इतनी पुरानी कला कैसे बची?

  • चट्टान को काटकर बनी होने के कारण ये गुफाएँ मौसम और समय की मार काफ़ी हद तक झेल पाईं।
  • अजंता सदियों तक जंगल में छिपी रही, जिससे उसके चित्र सुरक्षित रहे।
  • आज भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) इनकी देखरेख करता है; चित्रों को बचाने के लिए गुफाओं में फ़्लैश फ़ोटोग्राफ़ी और भीड़ पर रोक है।

बौद्ध शिक्षा के महान केंद्रों के बारे में पढ़ें: प्राचीन भारत के विश्वविद्यालय। प्राचीन भारत की और झलक: प्राचीन भारत के रोचक तथ्य।

मुख्य बिंदु

  • अजंता और एलोरा महाराष्ट्र में हैं और 1983 में यूनेस्को विश्व धरोहर बनीं।
  • अजंता की बौद्ध गुफाएँ अपने दीवार-चित्रों के लिए प्रसिद्ध हैं।
  • अजंता 1819 में ब्रिटिश अफ़सर जॉन स्मिथ ने फिर खोजी।
  • एलोरा में बौद्ध, हिंदू और जैन गुफाएँ साथ-साथ हैं।
  • कैलाश मंदिर एक ही चट्टान को ऊपर से काटकर बनाया गया।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कैलाश मंदिर किसने बनवाया?

राष्ट्रकूट राजा कृष्ण प्रथम के समय, 8वीं सदी में, एलोरा की गुफा 16 में।

अजंता की गुफाएँ किस धर्म से जुड़ी हैं?

बौद्ध धर्म से; इनमें बुद्ध के जीवन और जातक कथाओं के चित्र हैं।

और लेख: इतिहास · इतिहास के प्रश्न।

स्रोत

  1. UNESCO — Ajanta Caves (नए टैब में खुलता है)
  2. UNESCO — Ellora Caves (नए टैब में खुलता है)
  3. Archaeological Survey of India, Aurangabad Circle (नए टैब में खुलता है)
अजंता और एलोरा की गुफाएँ: पत्थर में बसी भारत की कला

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