देवनागरी लिपि: इतिहास, बनावट और इसमें लिखी जाने वाली भाषाएँ
देवनागरी लिपि की जानकारी: ब्राह्मी से देवनागरी तक, शिरोरेखा और मात्राएँ, वर्णमाला का वैज्ञानिक क्रम, इसमें लिखी जाने वाली भाषाएँ और कंप्यूटर पर देवनागरी।
रोहित टंडन · 24 अक्टूबर 2026 · 4 मिनट
आप जो यह लेख पढ़ रहे हैं, वह देवनागरी लिपि में लिखा है। हिंदी, संस्कृत, मराठी और नेपाली समेत कई भाषाएँ इसी लिपि में लिखी जाती हैं, और करोड़ों लोग रोज़ इसका इस्तेमाल करते हैं। ध्यान रहे, भाषा और लिपि अलग चीज़ें हैं — भाषा वह है जो हम बोलते हैं, और लिपि वह चिह्न-व्यवस्था जिससे उसे लिखा जाता है। यहाँ देवनागरी का इतिहास और उसकी ख़ूबियाँ दी गई हैं।
ब्राह्मी से देवनागरी तक
भारत की ज़्यादातर लिपियों की जड़ प्राचीन ब्राह्मी लिपि है, जिसके सबसे प्रसिद्ध नमूने तीसरी सदी ईसा पूर्व के सम्राट अशोक के शिलालेखों में मिलते हैं। ब्राह्मी से समय के साथ गुप्त लिपि, फिर सिद्धमात्रिका और नागरी लिपियाँ विकसित हुईं। लगभग 10वीं–11वीं सदी तक देवनागरी लगभग अपने आज के रूप में दिखने लगी। "नागरी" शब्द का संबंध "नगर" से जोड़ा जाता है, और "देव" जुड़ने से यह "देवनागरी" कहलाई। दक्षिण भारत की तमिल, तेलुगु, कन्नड़ और मलयालम लिपियाँ भी ब्राह्मी परिवार से ही निकली हैं।
देवनागरी की बनावट
- बाएँ से दाएँ: देवनागरी बाएँ से दाएँ लिखी जाती है।
- शिरोरेखा: ज़्यादातर अक्षरों के ऊपर एक आड़ी रेखा होती है, जो शब्द के अक्षरों को जोड़ती है।
- व्यंजन में छिपा "अ": हर व्यंजन में "अ" की ध्वनि पहले से जुड़ी होती है — "क" का उच्चारण "क्+अ" है। इसीलिए इसे "अबुगिडा" (अक्षरात्मक लिपि) कहा जाता है।
- मात्राएँ: दूसरे स्वर लगाने के लिए मात्राएँ लगती हैं — कि, की, कु, कू, के, कै, को, कौ।
- बड़े-छोटे अक्षर नहीं: अंग्रेज़ी की तरह कैपिटल और स्मॉल अक्षर नहीं होते।
- जैसा लिखो, वैसा पढ़ो: ज़्यादातर शब्द जैसे लिखे जाते हैं, लगभग वैसे ही बोले जाते हैं।
वर्णमाला का वैज्ञानिक क्रम
देवनागरी वर्णमाला में अक्षर मनमाने ढंग से नहीं, बल्कि मुँह में उनके बोले जाने की जगह के क्रम में रखे गए हैं — गले से होंठों की ओर:
| वर्ग | अक्षर | कहाँ से बोले जाते हैं |
|---|---|---|
| कंठ्य | क ख ग घ ङ | गला |
| तालव्य | च छ ज झ ञ | तालु |
| मूर्धन्य | ट ठ ड ढ ण | मूर्धा (तालु का ऊपरी हिस्सा) |
| दंत्य | त थ द ध न | दाँत |
| ओष्ठ्य | प फ ब भ म | होंठ |
हर वर्ग में भी क्रम तय है: पहले कठोर ध्वनि, फिर उसकी हवा वाली (महाप्राण) ध्वनि, फिर कोमल, फिर उसकी महाप्राण और अंत में नाक से निकलने वाली ध्वनि। हिंदी में आम तौर पर 11 स्वर और 33 मूल व्यंजन पढ़ाए जाते हैं।
क्या आप जानते हैं? आज की दुनिया में इस्तेमाल होने वाले अंक 0 से 9 भारत में ही विकसित हुए थे। देवनागरी के अपने अंक हैं — ०, १, २, ३, ४, ५, ६, ७, ८, ९ — लेकिन संविधान के अनुच्छेद 343 के अनुसार सरकारी कामकाज में "भारतीय अंकों का अंतर्राष्ट्रीय रूप" (1, 2, 3…) इस्तेमाल होता है। शून्य की कहानी पढ़ें: शून्य की खोज।
किन भाषाओं में देवनागरी?
भारत में हिंदी, संस्कृत, मराठी, कोंकणी, बोडो, डोगरी, मैथिली और नेपाली मुख्य रूप से देवनागरी में लिखी जाती हैं; सिंधी भारत में देवनागरी और अरबी-फ़ारसी दोनों लिपियों में लिखी जाती है। भोजपुरी, अवधी, राजस्थानी और कई दूसरी बोलियाँ भी देवनागरी में ही लिखी जाती हैं। भारत से बाहर नेपाल की राजभाषा नेपाली भी देवनागरी में है। हिंदी के बारे में पढ़ें: हिंदी भाषा के रोचक तथ्य, और संस्कृत के बारे में: संस्कृत भाषा।
कंप्यूटर और फ़ोन पर देवनागरी
1991 में आए "यूनिकोड" मानक में देवनागरी को अपना अलग खंड मिला, जिससे आज यह वेबसाइटों, फ़ोन और कंप्यूटर पर हर जगह ठीक दिखती है। टाइप करने के लिए भारत सरकार का मानक "इनस्क्रिप्ट" कीबोर्ड है, और फ़ोन पर रोमन अक्षरों में लिखकर देवनागरी में बदलने वाले कीबोर्ड भी लोकप्रिय हैं। 1893 में वाराणसी में स्थापित "नागरी प्रचारिणी सभा" ने देवनागरी और हिंदी के प्रचार में ऐतिहासिक भूमिका निभाई।
मुख्य बिंदु
- देवनागरी प्राचीन ब्राह्मी लिपि से विकसित हुई।
- यह बाएँ से दाएँ लिखी जाती है और अक्षरों के ऊपर शिरोरेखा होती है।
- वर्णमाला बोलने की जगह के क्रम में — गले से होंठों तक — सजी है।
- हिंदी, संस्कृत, मराठी, नेपाली और कोंकणी देवनागरी में लिखी जाती हैं।
- यूनिकोड के कारण देवनागरी हर कंप्यूटर और फ़ोन पर दिखती है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
देवनागरी लिपि किस लिपि से निकली है?
प्राचीन ब्राह्मी लिपि से, गुप्त और नागरी लिपियों के रास्ते।
हिंदी वर्णमाला में कितने अक्षर हैं?
आम तौर पर 11 स्वर और 33 मूल व्यंजन पढ़ाए जाते हैं; संयुक्त अक्षरों को गिनने के तरीक़े से संख्या थोड़ी बदल सकती है।
और लेख: रोचक तथ्य।
स्रोत
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