भारत में बैंकों का इतिहास: पहले बैंक से डिजिटल बैंकिंग तक
भारत में बैंकों का इतिहास: साहूकार और हुंडी, 1770 का पहला बैंक, प्रेसिडेंसी बैंकों से SBI तक, 1969 का राष्ट्रीयकरण, जन धन योजना और आपकी जमा राशि का बीमा।
रोहित टंडन · 30 अक्टूबर 2026 · 4 मिनट
आज भारत में लगभग हर परिवार का बैंक खाता है, और फ़ोन से ही पैसे भेजे-मँगाए जाते हैं। लेकिन बैंकिंग का यह सफ़र गाँव के साहूकार और व्यापारियों की हुंडी से शुरू होकर दुनिया की सबसे बड़ी बैंकिंग व्यवस्थाओं तक पहुँचा है। यहाँ भारत में बैंकों का इतिहास आसान भाषा में दिया गया है।
बैंक से पहले: साहूकार और हुंडी
प्राचीन और मध्यकालीन भारत में साहूकार, सेठ और सर्राफ़ लोगों को क़र्ज़ देते और पैसा जमा रखते थे। कौटिल्य के "अर्थशास्त्र" में भी क़र्ज़ और ब्याज के नियमों का ज़िक्र मिलता है। व्यापारी एक शहर से दूसरे शहर पैसा भेजने के लिए "हुंडी" का इस्तेमाल करते थे — एक लिखित आदेश, जिसे दिखाकर दूसरे शहर में बैठा व्यापारी पैसा दे देता था। इससे भारी सिक्के साथ ले जाने का ख़तरा नहीं रहता था।
आधुनिक बैंकों की शुरुआत
| साल | पड़ाव |
|---|---|
| 1770 | कलकत्ता में "बैंक ऑफ़ हिंदोस्तान" — भारत के शुरुआती आधुनिक बैंकों में (1832 में बंद) |
| 1806 | "बैंक ऑफ़ कलकत्ता" बना, जो 1809 में "बैंक ऑफ़ बंगाल" कहलाया |
| 1840, 1843 | "बैंक ऑफ़ बॉम्बे" और "बैंक ऑफ़ मद्रास" बने |
| 1921 | तीनों प्रेसिडेंसी बैंक मिलकर "इंपीरियल बैंक ऑफ़ इंडिया" बने |
| 1935 | भारतीय रिज़र्व बैंक की स्थापना |
| 1 जुलाई 1955 | इंपीरियल बैंक से "भारतीय स्टेट बैंक" (SBI) बना |
इस तरह SBI की जड़ें 1806 तक जाती हैं, और यह भारत का सबसे पुराना चल रहा बैंक माना जाता है। 1894 में लाहौर में स्थापित पंजाब नेशनल बैंक भारतीयों की पूँजी से बने और भारतीयों द्वारा चलाए गए शुरुआती बड़े बैंकों में था; लाला लाजपत राय इसके संस्थापकों से जुड़े थे। केंद्रीय बैंक के बारे में पढ़ें: भारतीय रिज़र्व बैंक।
बैंकों का राष्ट्रीयकरण
आज़ादी के बाद भी ज़्यादातर बैंक निजी हाथों में थे और गाँवों, किसानों और छोटे कारोबारियों तक बैंकिंग बहुत कम पहुँचती थी। 19 जुलाई 1969 को प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की सरकार ने 14 बड़े निजी बैंकों का राष्ट्रीयकरण कर दिया, और 15 अप्रैल 1980 को 6 और बैंकों का। इसके बाद गाँवों में तेज़ी से बैंक शाखाएँ खुलीं — पढ़ें इंदिरा गांधी के प्रमुख तथ्य।
क्या आप जानते हैं? 28 अगस्त 2014 को शुरू हुई "प्रधानमंत्री जन धन योजना" के तहत एक ही हफ़्ते में लगभग 1.8 करोड़ बैंक खाते खोले गए, जो गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड बना। 2023 तक इस योजना के खातों की संख्या 50 करोड़ पार कर गई।
उदारीकरण से डिजिटल बैंकिंग तक
- 1991 के बाद: आर्थिक सुधारों के साथ नए निजी बैंकों को लाइसेंस मिले, जिससे प्रतियोगिता और नई सेवाएँ बढ़ीं।
- पहला ATM: भारत में पहला ATM 1987 में मुंबई में लगाया गया।
- बैंकों का विलय: 1 अप्रैल 2020 को 10 सरकारी बैंकों को मिलाकर 4 बड़े बैंक बनाए गए।
- नए तरह के बैंक: 2015 के बाद "पेमेंट बैंक" और "स्मॉल फ़ाइनेंस बैंक" शुरू हुए।
- डिजिटल भुगतान: 2016 में UPI आया, जिसने बैंकिंग को फ़ोन में पहुँचा दिया — पढ़ें UPI कैसे काम करता है।
आपकी जमा राशि कितनी सुरक्षित है?
भारत में बैंकों में जमा पैसे का बीमा "निक्षेप बीमा और प्रत्यय गारंटी निगम" (DICGC) करता है, जो रिज़र्व बैंक की एक सहायक संस्था है। फ़रवरी 2020 से किसी एक बैंक में एक जमाकर्ता के 5 लाख रुपये तक (मूल राशि और ब्याज मिलाकर) बीमित हैं। यानी अगर कोई बैंक डूब जाए, तब भी इतनी राशि सुरक्षित रहती है। पैसे की कहानी: पैसे का इतिहास।
मुख्य बिंदु
- बैंकों से पहले साहूकार और हुंडी की व्यवस्था थी।
- 1770 का बैंक ऑफ़ हिंदोस्तान भारत के शुरुआती आधुनिक बैंकों में था।
- SBI 1 जुलाई 1955 को इंपीरियल बैंक से बना।
- 19 जुलाई 1969 को 14 बैंकों का राष्ट्रीयकरण हुआ।
- हर जमाकर्ता के एक बैंक में 5 लाख रुपये तक बीमित हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
भारत का सबसे पुराना चल रहा बैंक कौन-सा है?
भारतीय स्टेट बैंक (SBI), जिसकी जड़ें 1806 के बैंक ऑफ़ कलकत्ता तक जाती हैं।
भारत में बैंकों का राष्ट्रीयकरण कब हुआ?
19 जुलाई 1969 को 14 बैंकों का और 15 अप्रैल 1980 को 6 और बैंकों का।
और लेख: इतिहास · अर्थव्यवस्था के प्रश्न।
स्रोत
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