शतरंज का इतिहास: भारत के चतुरंग से विश्व चैंपियन तक
शतरंज का इतिहास भारत से शुरू होता है: गुप्त काल का चतुरंग, फ़ारस का शतरंज, "शह-मात" का अर्थ, और आनंद, गुकेश, हम्पी तथा दिव्या जैसे भारतीय सितारे।
रोहित टंडन · 18 अक्टूबर 2026 · 4 मिनट
आज दुनिया के करोड़ों लोग शतरंज खेलते हैं, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि इस खेल का जन्म भारत में हुआ था। शतरंज का इतिहास लगभग डेढ़ हज़ार साल पुराना है और इसकी शुरुआत "चतुरंग" नाम के खेल से हुई। यहाँ जानिए यह खेल भारत से दुनिया तक कैसे पहुँचा और आज भारत फिर से शतरंज की महाशक्ति कैसे बन गया।
चतुरंग: शतरंज का पूर्वज
इतिहासकारों के अनुसार गुप्त काल में, लगभग छठी सदी ईस्वी में, भारत में "चतुरंग" खेला जाता था। संस्कृत में चतुरंग का अर्थ है "चार अंगों वाली" — यानी प्राचीन सेना के चार हिस्से: पैदल सैनिक, घुड़सवार, हाथी और रथ। आज के शतरंज के मोहरों में यही चार अंग दिखते हैं: प्यादा, घोड़ा, हाथी (ऊँट या बिशप का पुराना रूप) और रथ (आज का "हाथी" या रूक)। साथ में राजा और उसका मंत्री होता था, जो आगे चलकर "वज़ीर" और यूरोप में "क्वीन" बना।
भारत से दुनिया तक
| दौर | कहाँ | खेल का नाम |
|---|---|---|
| लगभग छठी सदी | भारत | चतुरंग |
| सातवीं सदी | फ़ारस (ईरान) | चतरंग, फिर शतरंज |
| आठवीं–नौवीं सदी | अरब दुनिया | शतरंज |
| दसवीं सदी के आसपास | स्पेन और यूरोप | चेस |
| 15वीं सदी के अंत | यूरोप | वज़ीर (क्वीन) को तेज़ चाल मिली — आज का आधुनिक शतरंज |
फ़ारसी में "शाह" का अर्थ राजा है। जब राजा पर हमला होता है तो "शह" कहते हैं, और "शह-मात" का अर्थ है "राजा बेबस हो गया"। अंग्रेज़ी का "चेकमेट" इसी फ़ारसी शब्द से निकला है।
क्या आप जानते हैं? एक पुरानी लोककथा के अनुसार शतरंज के आविष्कारक ने राजा से इनाम में बस इतना माँगा कि बिसात के पहले ख़ाने पर गेहूँ का एक दाना, दूसरे पर दो, तीसरे पर चार — इसी तरह हर ख़ाने पर दोगुना रखा जाए। 64 ख़ानों का कुल योग 1.8 × 1019 से भी ज़्यादा दाने बनता है — इतना गेहूँ पूरी दुनिया में सैकड़ों सालों में भी नहीं उगता।
भारत के शतरंज सितारे
- विश्वनाथन आनंद: 1988 में भारत के पहले ग्रैंडमास्टर बने और पाँच बार विश्व चैंपियन रहे (2000, 2007, 2008, 2010, 2012)।
- डी. गुकेश: 12 दिसंबर 2024 को सिंगापुर में डिंग लिरेन को हराकर 18 साल की उम्र में सबसे कम उम्र के निर्विवाद विश्व चैंपियन बने।
- कोनेरू हम्पी: 2019 और 2024 में महिला विश्व रैपिड चैंपियन।
- दिव्या देशमुख: 2025 में 19 साल की उम्र में फ़िडे महिला विश्व कप जीता और ग्रैंडमास्टर बनीं।
- आर. प्रज्ञानानंद: 2023 के फ़िडे विश्व कप में उपविजेता।
शतरंज ओलंपियाड में दोहरा स्वर्ण
2024 में हंगरी के बुडापेस्ट में हुए शतरंज ओलंपियाड में भारत ने इतिहास रच दिया — ओपन और महिला, दोनों वर्गों में स्वर्ण पदक जीते। इससे पहले 2022 में भारत ने चेन्नई के पास मामल्लपुरम में शतरंज ओलंपियाड की मेज़बानी की थी। आज भारत में 80 से ज़्यादा ग्रैंडमास्टर हैं, और ज़्यादातर नए सितारे तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल से आए हैं।
मोहरों के नाम और बिसात
शतरंज की बिसात पर 8 × 8 यानी 64 ख़ाने होते हैं, और हर खिलाड़ी 16 मोहरों से शुरू करता है: एक राजा, एक वज़ीर (रानी), दो हाथी (रूक), दो ऊँट (बिशप), दो घोड़े (नाइट) और आठ प्यादे। खेल का लक्ष्य विरोधी के राजा को ऐसी स्थिति में लाना है कि वह किसी भी चाल से बच न सके — यही शह-मात है। सफ़ेद मोहरों वाला खिलाड़ी हमेशा पहली चाल चलता है।
शतरंज खेलने के फ़ायदे
- ध्यान लगाने और आगे की सोचने की आदत बढ़ती है।
- हार-जीत को सहजता से लेना और धैर्य रखना सिखाता है।
- याददाश्त और समस्या हल करने की क्षमता बेहतर होती है।
मुख्य बिंदु
- शतरंज का जन्म भारत में "चतुरंग" के रूप में हुआ।
- चतुरंग का अर्थ है सेना के चार अंग: पैदल, घोड़े, हाथी और रथ।
- "चेकमेट" फ़ारसी "शह-मात" से बना है।
- विश्वनाथन आनंद भारत के पहले ग्रैंडमास्टर हैं।
- डी. गुकेश 2024 में सबसे कम उम्र के विश्व चैंपियन बने।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
शतरंज का आविष्कार कहाँ हुआ?
भारत में, जहाँ गुप्त काल में "चतुरंग" नाम का खेल खेला जाता था।
भारत के पहले ग्रैंडमास्टर कौन थे?
विश्वनाथन आनंद, जो 1988 में ग्रैंडमास्टर बने।
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