भारतीय रुपये का इतिहास और रोचक तथ्य
भारतीय रुपये का इतिहास: शेरशाह सूरी का चाँदी का "रुपिया", 16 आने का रुपया, ₹ चिह्न किसने बनाया, नोट कौन छापता है, नोटबंदी और नोटों के सुरक्षा चिह्न।
रोहित टंडन · 30 अक्टूबर 2026 · 4 मिनट
"रुपया" भारत की मुद्रा है, और यह शब्द सदियों पुराना है। संस्कृत के "रूप्य" का अर्थ है "गढ़ी हुई चाँदी", और इसी से "रुपया" शब्द बना। यहाँ भारतीय रुपये का इतिहास और उससे जुड़े रोचक तथ्य दिए गए हैं — शेरशाह सूरी के सिक्के से लेकर आज के ₹ चिह्न तक।
शेरशाह सूरी का "रुपिया"
1540 से 1545 के बीच शासन करने वाले शेरशाह सूरी ने लगभग 11 ग्राम (178 ग्रेन) चाँदी का एक मानक सिक्का चलाया, जिसे "रुपिया" कहा गया। यह सिक्का इतना भरोसेमंद था कि बाद में मुग़लों और फिर अंग्रेज़ों ने भी इसे जारी रखा। आज का रुपया उसी परंपरा से जुड़ा है। शेरशाह ने ग्रैंड ट्रंक रोड को भी नया रूप दिया था।
आना, पाई और नया पैसा
पहले एक रुपये में 16 आने होते थे, एक आने में 4 पैसे और एक पैसे में 3 पाई — यानी एक रुपये में 64 पैसे या 192 पाई। 1 अप्रैल 1957 को भारत ने दशमलव प्रणाली अपनाई और एक रुपये को 100 "नए पैसे" में बाँटा गया। कुछ साल बाद "नया" शब्द हटा दिया गया। "सोलह आने सच" जैसी कहावत आज भी उसी पुरानी व्यवस्था की याद दिलाती है — यानी पूरा सच।
नोट कौन छापता है, सिक्के कौन बनाता है?
- नोट: 2, 5, 10, 20, 50, 100, 200, 500 और 2000 रुपये के नोट भारतीय रिज़र्व बैंक जारी करता है, और इन पर RBI गवर्नर के हस्ताक्षर होते हैं।
- 1 रुपये का नोट: इसे भारत सरकार जारी करती है, इसलिए इस पर वित्त सचिव के हस्ताक्षर होते हैं।
- सिक्के: सिक्के भारत सरकार बनवाती है, और RBI उन्हें देश भर में पहुँचाता है।
₹ चिह्न की कहानी
15 जुलाई 2010 को भारत सरकार ने रुपये के लिए नया चिह्न "₹" अपनाया। इसे डी. उदय कुमार ने डिज़ाइन किया, जो तब IIT गुवाहाटी से जुड़े थे। यह चिह्न देवनागरी के "र" और रोमन के "R" को मिलाकर बना है, और ऊपर की दो आड़ी रेखाएँ तिरंगे और "बराबर" के निशान की याद दिलाती हैं। इसके साथ भारत अमेरिकी डॉलर, ब्रिटिश पाउंड, यूरो और जापानी येन जैसी उन मुद्राओं में शामिल हुआ जिनका अपना ख़ास चिह्न है।
क्या आप जानते हैं? 1950 और 1960 के दशक तक भारतीय रुपया खाड़ी के कई देशों — जैसे कुवैत, बहरीन, क़तर और ओमान — में भी चलता था। इसके लिए रिज़र्व बैंक ने अलग "खाड़ी रुपया" छापा था। बाद में इन देशों ने अपनी-अपनी मुद्राएँ शुरू कर दीं।
नोटबंदी और बदलते नोट
भारत में कुछ बार बड़े नोटों को चलन से हटाया गया है — 1946, 1978 और फिर 8 नवंबर 2016 को, जब 500 और 1000 रुपये के पुराने नोट बंद किए गए। इसके बाद "महात्मा गांधी नई सीरीज़" के नोट आए, जिनके पीछे भारत की विरासत के चित्र हैं — जैसे 10 रुपये के नोट पर कोणार्क सूर्य मंदिर (पढ़ें कोणार्क सूर्य मंदिर) और 2000 रुपये के नोट पर मंगलयान (पढ़ें मंगलयान)। मई 2023 में RBI ने 2000 रुपये के नोट वापस लेने की घोषणा की। हर नोट के भाषा-पैनल में 15 भाषाएँ होती हैं — पढ़ें भारत की भाषाएँ।
असली नोट कैसे पहचानें?
- वॉटरमार्क: रोशनी में देखने पर महात्मा गांधी का चित्र और मूल्य दिखता है।
- सुरक्षा धागा: नोट में एक धागा होता है, जो झुकाने पर रंग बदलता है।
- रंग बदलती स्याही: कुछ नोटों पर अंक झुकाने पर हरे से नीले हो जाते हैं।
- उभरी छपाई: दृष्टिबाधित लोगों के लिए कुछ चिह्न छूकर पहचाने जा सकते हैं।
पैसे की पूरी कहानी: पैसे का इतिहास।
मुख्य बिंदु
- "रुपया" शब्द संस्कृत के "रूप्य" (गढ़ी हुई चाँदी) से बना है।
- शेरशाह सूरी ने 16वीं सदी में चाँदी का "रुपिया" चलाया।
- 1957 में रुपया 100 पैसों में बँटा।
- ₹ चिह्न 15 जुलाई 2010 को अपनाया गया; इसे डी. उदय कुमार ने बनाया।
- 1 रुपये का नोट भारत सरकार और बाक़ी नोट RBI जारी करता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
रुपये का चिह्न ₹ किसने डिज़ाइन किया?
डी. उदय कुमार ने; सरकार ने इसे 15 जुलाई 2010 को अपनाया।
1 रुपये के नोट पर किसके हस्ताक्षर होते हैं?
भारत सरकार के वित्त सचिव के, क्योंकि यह नोट सरकार जारी करती है।
और लेख: रोचक तथ्य।
स्रोत
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