भारत के प्रमुख जलप्रपात: सबसे ऊँचे और सबसे चौड़े झरने
भारत के प्रमुख जलप्रपात: कुंचिकल, नोहकलिकाई, दूधसागर, जोग, चित्रकोट और अथिरापल्ली — कहाँ हैं, कितने ऊँचे हैं और झरने बनते कैसे हैं।
रोहित टंडन · 16 अक्टूबर 2026 · 4 मिनट
मानसून के बाद भारत की नदियाँ जब पहाड़ों से नीचे गिरती हैं, तो दूध जैसी झागदार धाराएँ बनती हैं — यही जलप्रपात हैं। पश्चिमी घाट, मेघालय के पठार और मध्य भारत की चट्टानों में देश के सबसे सुंदर झरने मिलते हैं। यहाँ भारत के प्रमुख जलप्रपात उनकी ऊँचाई, नदी और राज्य के साथ दिए गए हैं।
भारत के प्रमुख जलप्रपात एक नज़र में
| जलप्रपात | राज्य | नदी | ख़ास बात |
|---|---|---|---|
| कुंचिकल | कर्नाटक | वाराही | कई चरणों वाला, अक्सर भारत का सबसे ऊँचा जलप्रपात बताया जाता है (लगभग 450 मीटर) |
| नोहकलिकाई | मेघालय | बरसाती धारा | भारत का सबसे ऊँचा "सीधा गिरने वाला" झरना (लगभग 340 मीटर) |
| दूधसागर | गोवा–कर्नाटक सीमा | मांडवी | लगभग 310 मीटर; दूध जैसा सफ़ेद पानी |
| जोग (गेरसोप्पा) | कर्नाटक | शरावती | लगभग 253 मीटर; चार धाराएँ — राजा, रानी, रोरर और रॉकेट |
| चित्रकोट | छत्तीसगढ़ | इंद्रावती | भारत का सबसे चौड़ा जलप्रपात; "भारत का नियाग्रा" |
| अथिरापल्ली | केरल | चालक्कुडी | केरल का सबसे बड़ा जलप्रपात; फ़िल्मों का मशहूर लोकेशन |
| हुंडरू | झारखंड | सुवर्णरेखा | लगभग 98 मीटर; राँची के पास |
ध्यान रहे, अलग-अलग स्रोतों में ऊँचाइयाँ अलग मिलती हैं — कुछ स्रोत कई चरणों को मिलाकर नापते हैं, तो कुछ केवल सबसे बड़ी छलाँग को।
जलप्रपात बनते कैसे हैं?
जब कोई नदी कठोर चट्टान से होकर नरम चट्टान पर बहती है, तो नरम चट्टान जल्दी कट जाती है और कठोर चट्टान का किनारा ऊपर रह जाता है। धीरे-धीरे ऊँचाई का अंतर बढ़ता जाता है और पानी सीधे नीचे गिरने लगता है। नीचे गिरते पानी की ताक़त से तल में गहरा गड्ढा बनता है, जिसे "प्लंज पूल" कहते हैं। पश्चिमी घाट की खड़ी ढलानें और मेघालय का ऊँचा पठार इसी कारण झरनों से भरे हैं।
क्या आप जानते हैं? दूधसागर जलप्रपात के सामने से गोवा–कर्नाटक रेल लाइन गुज़रती है। ट्रेन जब झरने के ठीक सामने बने पुल से गुज़रती है, तो यात्रियों को यह नज़ारा सबसे सुंदर दिखता है — पढ़ें भारतीय रेल के रोचक तथ्य।
कुछ और रोचक बातें
- नोहकलिकाई की कहानी: खासी लोककथा में "का लिकाई" नाम की महिला की दुखभरी कहानी इस झरने के नाम से जुड़ी है।
- चित्रकोट: मानसून में इंद्रावती नदी लगभग 300 मीटर चौड़ाई में गिरती है, इसलिए इसे भारत का नियाग्रा कहा जाता है। अथिरापल्ली को भी यही उपनाम मिला है।
- जोग से बिजली: शरावती नदी पर बने बाँधों और बिजलीघरों के कारण आज जोग जलप्रपात पूरी ताक़त से मुख्य रूप से मानसून में ही दिखता है।
- सबसे अच्छा समय: ज़्यादातर जलप्रपात जुलाई से अक्टूबर के बीच सबसे भरे होते हैं।
भारत के कुछ और प्रसिद्ध झरने
- धुआँधार (मध्य प्रदेश): जबलपुर के पास भेड़ाघाट में नर्मदा संगमरमर की चट्टानों के बीच गिरती है, और उड़ती फुहार धुएँ जैसी दिखती है।
- शिवसमुद्रम (कर्नाटक): कावेरी नदी पर; यहाँ 1902 में एशिया के शुरुआती पनबिजलीघरों में से एक बना था।
- होगेनक्कल (तमिलनाडु): कावेरी पर, गोल टोकरीनुमा नावों (कोरेकल) की सवारी के लिए मशहूर।
- नोहशंगथियांग या सेवन सिस्टर्स (मेघालय): चेरापूंजी के पास सात धाराओं में गिरने वाला झरना।
- केम्प्टी (उत्तराखंड): मसूरी के पास, पर्यटकों का पसंदीदा।
- तीरथगढ़ (छत्तीसगढ़): बस्तर की कांगेर घाटी में सीढ़ीनुमा चट्टानों पर गिरता झरना।
झरने देखने जाएँ तो सावधानी
बरसात में चट्टानें बहुत फिसलन भरी होती हैं और पानी का बहाव अचानक बढ़ सकता है। हर साल कई लोग सेल्फ़ी लेते समय या पानी में उतरकर जान गँवाते हैं। इसलिए हमेशा तय रास्तों और रेलिंग के भीतर रहें, प्रतिबंधित जगहों पर न जाएँ और स्थानीय प्रशासन के निर्देश मानें।
मुख्य बिंदु
- कुंचिकल (कर्नाटक) को अक्सर भारत का सबसे ऊँचा जलप्रपात बताया जाता है।
- नोहकलिकाई (मेघालय) भारत का सबसे ऊँचा सीधा गिरने वाला झरना है।
- जोग जलप्रपात शरावती नदी पर है और इसकी चार धाराएँ हैं।
- चित्रकोट (इंद्रावती, छत्तीसगढ़) भारत का सबसे चौड़ा जलप्रपात है।
- कठोर चट्टान के नीचे नरम चट्टान कटने से जलप्रपात बनते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
भारत का सबसे ऊँचा जलप्रपात कौन-सा है?
कर्नाटक का कुंचिकल जलप्रपात अक्सर सबसे ऊँचा बताया जाता है; सीधे गिरने वाले झरनों में मेघालय का नोहकलिकाई सबसे ऊँचा है।
जोग जलप्रपात किस नदी पर है?
कर्नाटक में शरावती नदी पर।
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स्रोत
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