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भारत की ऋतुएँ: छह ऋतुएँ और मौसम विभाग के चार मौसम

भारतीय पंचांग में वसंत से शिशिर तक छह ऋतुएँ हैं, जबकि मौसम विभाग चार मौसम गिनता है। यहाँ दोनों हैं, उनके महीनों, फ़सलों और त्योहारों के साथ, और यह भी कि मौसम बदलते क्यों हैं।

· 28 अक्टूबर 2026 · 4 मिनट

भारत की ऋतुएँ: छह ऋतुएँ और मौसम विभाग के चार मौसम

भारत की ऋतुएँ दो तरीक़ों से गिनी जाती हैं। पारंपरिक भारतीय पंचांग में लगभग दो-दो महीने की छह ऋतुएँ हैं: वसंत, ग्रीष्म, वर्षा, शरद, हेमंत और शिशिर। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) इसके बजाय चार मौसम मानता है: सर्दी, गर्मी, दक्षिण-पश्चिम मानसून और मानसून के बाद का मौसम।

भारत की छह ऋतुएँ कौन-सी हैं?

छह ऋतुएँ हिंदू चंद्र मासों के हिसाब से चलती हैं, हर ऋतु में दो महीने। चंद्र पंचांग (lunar calendar) हर साल अंग्रेज़ी कैलेंडर से थोड़ा खिसकता है, इसलिए अंग्रेज़ी महीनों का मेल लगभग ही होता है। तालिका में आम मेल और हर ऋतु की पहचान दी गई है।

ऋतुहिंदू महीनेलगभग अंग्रेज़ी महीनेपहचान
वसंतचैत्र–वैशाखमार्च–अप्रैलफूल, नई पत्तियाँ, सुहावना मौसम
ग्रीष्मज्येष्ठ–आषाढ़मई–जूनतेज़ गर्मी और सूखी लू
वर्षाश्रावण–भाद्रपदजुलाई–अगस्तमानसून की बारिश, भरी नदियाँ
शरदआश्विन–कार्तिकसितंबर–अक्टूबरसाफ़ आसमान, रात में हल्की ठंडक
हेमंतमार्गशीर्ष–पौषनवंबर–दिसंबरसर्दी की शुरुआत
शिशिरमाघ–फाल्गुनजनवरी–फ़रवरीकड़ाके की ठंड, उत्तर में कोहरा

ये नाम आज भी रोज़ की बोली में हैं। वर्षा ऋतु के बीच श्रावण में "सावन" के गीत गाए जाते हैं, और कई परिवार साल की सबसे कड़ी गर्मी को आज भी "जेठ की गर्मी" कहते हैं। ऋतुओं के ये पुराने नाम, भारत के पुराने नाम जैसे भारतवर्ष और जम्बूद्वीप की तरह, इस धरती की लंबी याद सँजोए हुए हैं।

मौसम विभाग कौन-से चार मौसम मानता है?

पूर्वानुमान और रिकॉर्ड के लिए IMD साल को चार मौसमों में बाँटता है। सर्दी जनवरी से फ़रवरी तक और मानसून से पहले का गरम मौसम मार्च से मई तक रहता है। दक्षिण-पश्चिम मानसून का मौसम जून से सितंबर तक चलता है, और मानसून के बाद का मौसम, जिसे उत्तर-पूर्वी मानसून का मौसम भी कहते हैं, अक्टूबर से दिसंबर तक।

चार मौसमों की यह व्यवस्था आज के भारत के मौसम के असली ढंग से मेल खाती है। इसमें बारिश के सारे मुख्य महीने एक ही मौसम में आ जाते हैं, जिससे IMD एक साल की बारिश की तुलना दूसरे साल से आसानी से कर पाता है। उत्तर-पूर्वी मानसून को भी इसमें अलग जगह मिलती है, क्योंकि तमिलनाडु को अपनी सालाना बारिश का बड़ा हिस्सा जुलाई में नहीं, अक्टूबर से दिसंबर में मिलता है।

मौसम बदलते ही क्यों हैं?

पृथ्वी की धुरी (axis) लगभग 23.5 डिग्री झुकी हुई है। साल भर सूरज की परिक्रमा (revolution) करते हुए पृथ्वी का उत्तरी आधा भाग कुछ महीने सूरज की ओर झुका रहता है और कुछ महीने उससे दूर। जब वह सूरज की ओर झुका होता है, तो दोपहर में सूरज ऊँचा रहता है, दिन लंबे होते हैं और ज़मीन गरम होती है, और भारत में गर्मी आती है।

इसे घर पर ही परखा जा सकता है। जून में दोपहर की धूप दक्षिण की ओर खुली बालकनी में मुश्किल से आती है, क्योंकि सूरज लगभग सिर के ऊपर होता है, जबकि दिसंबर में धूप कमरे के अंदर तक पहुँचती है, क्योंकि सूरज आसमान में नीचे रहता है। ऊँचाई का भी असर है: पहाड़ी शहर मई में भी ठंडे रहते हैं, और भारत की प्रमुख पर्वत चोटियाँ, कंचनजंगा से अनामुडी तक पर बर्फ़ मैदानों के तपने के बहुत बाद तक टिकी रहती है।

किस ऋतु की कौन-सी फ़सलें और त्योहार हैं?

भारतीय खेती ऋतुओं के साथ क़दम मिलाकर चलती है। धान, मक्का और कपास जैसी ख़रीफ़ फ़सलें मानसून की पहली बारिश के साथ बोई जाती हैं और सितंबर-अक्टूबर के आसपास कटती हैं। गेहूँ, सरसों और चना जैसी रबी फ़सलें अक्टूबर-नवंबर में बोई जाती हैं और मार्च-अप्रैल में कटती हैं, जबकि गर्मी का छोटा ज़ायद मौसम तरबूज़ और खीरा देता है।

त्योहार अक्सर इन्हीं मोड़ों पर आते हैं। जनवरी के बीच मकर संक्रांति और पोंगल सबसे ठंडे दिनों के बीतने का उत्सव हैं, होली फाल्गुन में वसंत की दहलीज़ पर आती है, और अप्रैल की बैसाखी पंजाब में गेहूँ की कटाई का पर्व है। शरद ऋतु में दिवाली बारिश के बाद की साफ़ रातों को रोशन करती है। मानसून का पानी उन बड़ी नदियों को भरता है जिनका वर्णन भारत की सबसे लंबी नदी: गंगा, ब्रह्मपुत्र और सिंधु में है।

क्या आप जानते हैं? कालिदास के काव्य "ऋतुसंहार" में छहों ऋतुओं का वर्णन है, लेकिन यह वसंत से शुरू नहीं होता। इसकी शुरुआत ग्रीष्म से होती है और अंत वसंत पर।

क्या पूरे भारत में एक जैसी ऋतुएँ होती हैं?

नहीं। भारत इतना बड़ा है कि एक ही महीना दो जगहों पर बिल्कुल अलग लगता है। जनवरी में दिल्ली कोहरे में ठिठुरती है, चेन्नई में मौसम सुहावना रहता है और तिरुवनंतपुरम में सूती कपड़े काफ़ी होते हैं। मई में राजस्थान के मैदान तपते हैं, लेकिन शिमला और ऊटी ठंडे रहते हैं।

तटीय इलाक़ों के मौसम नरम रहते हैं, क्योंकि समुद्र हवा को बहुत गरम या बहुत ठंडा नहीं होने देता। हिमालय में ऊँचाई पर बसे लद्दाख में सर्दियाँ लंबी और बेहद ठंडी होती हैं और गर्मी छोटी। बारिश भी जगह-जगह बहुत अलग होती है, और मानसून भारत के प्रमुख जलप्रपात को मुख्य रूप से जुलाई से सितंबर तक भरता है।

मुख्य बिंदु

  • पारंपरिक पंचांग में छह ऋतुएँ हैं: वसंत, ग्रीष्म, वर्षा, शरद, हेमंत और शिशिर।
  • हर ऋतु में दो हिंदू महीने होते हैं, इसलिए अंग्रेज़ी महीनों का मेल लगभग ही होता है।
  • IMD चार मौसम मानता है: सर्दी, मानसून से पहले, दक्षिण-पश्चिम मानसून और मानसून के बाद।
  • मौसम इसलिए बदलते हैं कि पृथ्वी की धुरी लगभग 23.5 डिग्री झुकी है।
  • ख़रीफ़ फ़सलें मानसून में और रबी फ़सलें सर्दियों में उगती हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत में कितनी ऋतुएँ होती हैं?

पारंपरिक पंचांग के अनुसार भारत में छह ऋतुएँ होती हैं। भारत मौसम विज्ञान विभाग अपने पूर्वानुमान और रिकॉर्ड के लिए चार मौसम मानता है।

अक्टूबर में कौन-सी ऋतु होती है?

अक्टूबर ज़्यादातर शरद ऋतु में आता है, जिसमें आश्विन और कार्तिक महीने होते हैं। चंद्र पंचांग के कारण यह मेल हर साल थोड़ा बदलता है।

लू क्या होती है?

लू एक गरम, सूखी और धूल भरी हवा है जो मई-जून की दोपहरों में उत्तर और उत्तर-पश्चिम भारत में चलती है। यह ग्रीष्म ऋतु की पहचान है। और पढ़ें हमारे भूगोल के लेखों में।

स्रोत: भारत मौसम विज्ञान विभाग और एनसाइक्लोपीडिया ब्रिटानिका: भारत की जलवायु।

स्रोत

  1. India Meteorological Department — seasons (नए टैब में खुलता है)
  2. Ministry of Agriculture — crop seasons (नए टैब में खुलता है)
  3. NCERT Geography, Class 9 — "Climate" (नए टैब में खुलता है)

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