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राज्यों और शहरों के पुराने नाम: कब और क्यों बदले

मद्रास तमिलनाडु बना, उड़ीसा ओडिशा बना और कलकत्ता कोलकाता बना। यहाँ राज्यों और शहरों के पुराने नाम, उनके बदलने की तारीख़ और कारण दिए गए हैं।

· 29 अक्टूबर 2026 · 4 मिनट

राज्यों और शहरों के पुराने नाम: कब और क्यों बदले

1947 के बाद भारत के कई राज्यों और शहरों के नाम बदले हैं, जैसे मद्रास राज्य से तमिलनाडु, उड़ीसा से ओडिशा और कलकत्ता से कोलकाता। इस पेज पर राज्यों और शहरों के पुराने नाम (Old names of Indian states and cities) और हर बदलाव का साल दिया गया है। साथ ही यह भी बताया गया है कि नाम क्यों बदले और उन्हें बदलने का अधिकार किसके पास है।

किन राज्यों के पहले अलग नाम थे?

नीचे की तालिका में वे मुख्य राज्य और केंद्र शासित प्रदेश हैं जिनका आज नया नाम है। कुछ नाम राज्य बनते समय ही बदल गए, और कुछ दशकों बाद तब बदले, जब लोगों ने अपनी भाषा के ज़्यादा करीब वाला नाम माँगा।

पुराना नामनया नामकब
संयुक्त प्रांत (यूनाइटेड प्रोविंसेज़)उत्तर प्रदेश1950
त्रावणकोर-कोचीन (और मालाबार)केरल1956
मद्रास राज्यतमिलनाडु1969
नेफ़ा (NEFA)अरुणाचल प्रदेश1972 (राज्य 1987)
मैसूर राज्यकर्नाटक1973
लक्काडीव, मिनिकॉय और अमीनदीवीलक्षद्वीप1973
पॉन्डिचेरीपुदुच्चेरी2006
उत्तरांचलउत्तराखंड2007
उड़ीसाओडिशा2011

संयुक्त प्रांत 24 जनवरी 1950 को उत्तर प्रदेश बना, इसीलिए यह राज्य 24 जनवरी को अपना स्थापना दिवस मनाता है। ध्यान दीजिए कि ज़्यादातर नए नाम स्थानीय भाषा से ही आए हैं: ओडिशा वही नाम है जो ओड़िया बोलने वाले बोलते हैं, और उत्तराखंड पहाड़ों का वह पुराना नाम है जो स्थानीय परंपरा में चलता आया है।

बंबई राज्य दो राज्यों में कैसे बँटा?

आज़ादी के बाद बंबई राज्य में आज के महाराष्ट्र और गुजरात दोनों के इलाके शामिल थे। मराठी और गुजराती बोलने वाले लोग अपना-अपना राज्य चाहते थे, और 1950 के दशक में "संयुक्त महाराष्ट्र" और "महागुजरात" आंदोलन तेज़ हुए। आख़िरकार 1 मई 1960 को बंबई राज्य को महाराष्ट्र और गुजरात में बाँट दिया गया।

दोनों राज्य 1 मई को अपना स्थापना दिवस मनाते हैं, यानी महाराष्ट्र दिन और गुजरात स्थापना दिवस। यह बँटवारा दिखाता है कि भारत का नक्शा बनाने में भाषा का कितना असर रहा। यही बात भारत की भाषाओं और संस्कृति की बड़ी कहानी में भी दिखती है, जहाँ हर क्षेत्र अपनी बोली और अपने त्योहार सँभालकर रखता है।

किन बड़े शहरों के नाम बदले?

शहरों के नाम बड़ी संख्या में 1990 के दशक में बदलने शुरू हुए। 1995 में बंबई मुंबई बना, जिसका नाम द्वीप के कोली मछुआरा परिवारों की देवी मुंबा देवी से जुड़ा है। 1996 में मद्रास चेन्नई बना और 2001 में कलकत्ता कोलकाता बना। 2014 में बैंगलोर बेंगलुरु और मैसूर मैसूरु बने।

छोटे और नए बदलाव भी परीक्षा में पूछे जाते हैं। त्रिवेंद्रम अब तिरुवनंतपुरम है, कोचीन अब कोच्चि है, 2016 में गुड़गाँव गुरुग्राम बना और 2018 में इलाहाबाद प्रयागराज बना। 2024 में अंडमान-निकोबार की राजधानी पोर्ट ब्लेयर का नाम श्री विजयपुरम रखा गया। आपके दादा-दादी आज भी आदत से "बंबई" या "मद्रास" बोलते होंगे, और पुराने फ़िल्मी गीत इन नामों को आज भी ज़िंदा रखते हैं।

क्या आप जानते हैं? मुंबई के मशहूर रेलवे स्टेशन के तीन नाम रह चुके हैं: पहले विक्टोरिया टर्मिनस, फिर 1996 में छत्रपति शिवाजी टर्मिनस, और 2017 में छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस।

नाम आख़िर बदले क्यों जाते हैं?

सबसे आम कारण उच्चारण (pronunciation) है। बहुत-सी पुरानी वर्तनियाँ अंग्रेज़ अफ़सरों ने लिखी थीं, जिन्होंने स्थानीय नामों को अंग्रेज़ी कानों से सुना था, इसलिए "कोलकाता" और "चेन्नई" उस बोली के ज़्यादा करीब हैं जो वहाँ के लोग हमेशा से बोलते आए हैं। हमारा लेख ब्रिटिश भारत: 1858 से 1947 तक बताता है कि औपनिवेशिक नक्शे का कितना बड़ा हिस्सा अंग्रेज़ी में बना और नामित हुआ।

दूसरा कारण इतिहास और पहचान है। कोई नाम किसी देवी, नदी, राजा या प्राचीन नगर की याद दिलाता है, और लोगों को गर्व होता है जब उनके घर का नाम उससे जुड़ा हो। देश के अपने नाम की कहानी भी ऐसी ही परतों वाली है, जिसे आप हमारे लेख भारत के पुराने नाम में पढ़ सकते हैं।

नाम बदलने का फ़ैसला कौन करता है?

किसी राज्य का नाम बदलने के लिए संविधान के अनुच्छेद 3 के तहत संसद को कानून पास करना होता है। विधेयक (bill) पहले उस राज्य की विधानसभा के पास राय के लिए भेजा जाता है, हालाँकि संसद उस राय को मानने के लिए बाध्य नहीं है। उड़ीसा इसी तरह 2011 में संसद के एक अधिनियम से ओडिशा बना।

किसी शहर, कस्बे या रेलवे स्टेशन का नाम राज्य सरकार बदलती है, जो आम तौर पर केंद्रीय गृह मंत्रालय से अनापत्ति प्रमाण पत्र (no-objection certificate) लेती है। मंज़ूरी देने से पहले मंत्रालय रेलवे, डाक विभाग और भारतीय सर्वेक्षण विभाग जैसी संस्थाओं से राय लेता है। नाम बदलने के बाद रेल यात्रा में दिखने वाले स्टेशन बोर्ड से लेकर शादी के कार्ड पर छपे पते तक, सब धीरे-धीरे बदलता है, पर पिन कोड वही रहता है। अतीत की ऐसी और कहानियों के लिए हमारे इतिहास के लेख देखिए।

मुख्य बिंदु

  • संयुक्त प्रांत 24 जनवरी 1950 को उत्तर प्रदेश बना।
  • मद्रास राज्य 1969 में तमिलनाडु और मैसूर राज्य 1973 में कर्नाटक बना।
  • बंबई राज्य 1 मई 1960 को महाराष्ट्र और गुजरात में बँटा।
  • उड़ीसा का ओडिशा और उत्तरांचल का उत्तराखंड होना संसद के अधिनियमों से हुआ।
  • 1995 से 2001 के बीच बंबई, मद्रास और कलकत्ता क्रमशः मुंबई, चेन्नई और कोलकाता बने।
  • राज्य का नाम केवल अनुच्छेद 3 के तहत संसद के कानून से बदल सकता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तमिलनाडु का पुराना नाम क्या था?

1969 तक तमिलनाडु को मद्रास राज्य कहा जाता था। नए नाम का अर्थ है "तमिलों की धरती"।

उड़ीसा का नाम ओडिशा कब हुआ?

उड़ीसा 2011 में ओडिशा बना, और उसी समय भाषा का नाम उड़िया से ओड़िया हुआ। यह बदलाव संसद के एक अधिनियम से किया गया।

कोलकाता को पहले क्या कहते थे?

2001 तक कोलकाता का आधिकारिक नाम कलकत्ता था। नई वर्तनी उसी तरह है जैसे बांग्ला बोलने वाले इस नाम को हमेशा से बोलते आए हैं।

स्रोत: भारत का संविधान, विधायी विभाग और भारत के बदले गए शहरों और राज्यों के नाम (विश्वकोश)। पहले स्रोत में अनुच्छेद 3 का पाठ है।

स्रोत

  1. Ministry of Home Affairs — renaming of places (नए टैब में खुलता है)
  2. Constitution of India — Article 3 (नए टैब में खुलता है)
  3. Press Information Bureau (नए टैब में खुलता है)

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