ओले क्यों गिरते हैं: ओलावृष्टि का पूरा विज्ञान
ओले क्यों गिरते हैं: बादल के अंदर बर्फ़ की परतें कैसे बनती हैं, गर्मी में भी ओले क्यों, सबसे बड़े ओले के रिकॉर्ड, भारत में फ़सलों पर असर और ओलावृष्टि में बचाव।
रोहित टंडन · 28 अक्टूबर 2026 · 4 मिनट
कभी-कभी तपती गर्मी के बाद अचानक आसमान काला होता है और छत पर बर्फ़ के छोटे-छोटे गोले टप-टप गिरने लगते हैं। बच्चे उन्हें उठाकर ख़ुश होते हैं, लेकिन किसानों के लिए यही ओले पूरी फ़सल बर्बाद कर सकते हैं। आख़िर ओले क्यों गिरते हैं, और गर्मी में बर्फ़ कहाँ से आती है? यहाँ इसका आसान विज्ञान दिया गया है।
ओले बनते कैसे हैं?
ओले "कपासी-वर्षी" (क्यूम्युलोनिम्बस) नाम के ऊँचे, गरजने वाले बादलों में बनते हैं, जो 10 किलोमीटर से भी ज़्यादा ऊँचे हो सकते हैं। इन बादलों के ऊपरी हिस्से में तापमान शून्य से बहुत नीचे होता है, भले ही ज़मीन पर गर्मी हो।
- ऊपर उछाल: बादल के अंदर तेज़ी से ऊपर चढ़ने वाली हवा पानी की बूँदों को बर्फ़ीली ऊँचाई तक ले जाती है, जहाँ वे जम जाती हैं।
- परत-दर-परत: यह छोटा बर्फ़ का दाना बादल में ऊपर-नीचे घूमता रहता है। हर बार उस पर अति-ठंडे पानी की एक नई परत जमती है, और वह बड़ा होता जाता है।
- नीचे गिरना: जब ओला इतना भारी हो जाता है कि ऊपर की हवा उसे सँभाल न सके, तो वह नीचे गिर पड़ता है।
किसी बड़े ओले को बीच से काटें, तो उसमें प्याज़ या पेड़ के तने जैसी गोल परतें दिखती हैं — हर परत बादल के अंदर उसकी एक "यात्रा" की कहानी है।
ओले, बर्फ़ और ओला-बारिश में अंतर
| क्या | कैसे बनता है |
|---|---|
| ओले (हेल) | गरजते बादलों में परत-दर-परत जमी बर्फ़ के ठोस गोले; गर्मी में भी गिर सकते हैं |
| हिमपात (स्नो) | ठंडे बादलों में बने हल्के, षट्कोणीय बर्फ़ के क्रिस्टल; आम तौर पर सर्दियों में |
| स्लीट | गिरती हुई बारिश की बूँदें जो रास्ते में ठंडी हवा से जमकर छोटे दाने बन जाती हैं |
क्या आप जानते हैं? गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स के अनुसार अब तक का सबसे भारी ओला 14 अप्रैल 1986 को बांग्लादेश के गोपालगंज में गिरा था, जिसका वज़न लगभग 1 किलोग्राम था। और इतिहास में दर्ज सबसे जानलेवा ओलावृष्टि 30 अप्रैल 1888 को भारत के मुरादाबाद में हुई थी, जिसमें लगभग 246 लोगों की जान गई।
भारत में ओलावृष्टि
भारत में ओले सबसे ज़्यादा मार्च से मई के बीच, मानसून से पहले के तूफ़ानों में, और सर्दियों के अंत में पश्चिमी विक्षोभ के समय गिरते हैं। यही समय गेहूँ, सरसों और चने जैसी रबी फ़सलों के पकने का होता है, इसलिए कुछ मिनटों की ओलावृष्टि किसानों की महीनों की मेहनत बर्बाद कर सकती है। फल-बाग़ और सब्ज़ियाँ भी बहुत प्रभावित होती हैं। "प्रधानमंत्री फ़सल बीमा योजना" में ओलावृष्टि को स्थानीय आपदा के रूप में शामिल किया गया है, जिसमें नुक़सान की सूचना तय समय में बीमा कंपनी या कृषि विभाग को देनी होती है। भारत के फ़सल-मौसम: भारत की ऋतुएँ।
क्या ओलों को रोका जा सकता है?
कुछ देशों में बादलों में रसायन छिड़ककर (क्लाउड सीडिंग) या "हेल कैनन" से ओलों को रोकने की कोशिश की गई है, लेकिन वैज्ञानिकों के अनुसार इनका असर अभी पक्के तौर पर साबित नहीं हुआ है। फ़सलों को बचाने का सबसे भरोसेमंद तरीक़ा अभी भी जाल है — हिमाचल प्रदेश के कई सेब बाग़ानों में पेड़ों के ऊपर "एंटी-हेल नेट" लगाए जाते हैं।
ओलावृष्टि के समय क्या करें?
- तुरंत किसी पक्की छत के नीचे चले जाएँ और खिड़कियों-शीशों से दूर रहें।
- बाहर फँस जाएँ, तो सिर और चेहरे को बैग या हाथों से ढकें।
- गाड़ी को हो सके तो किसी छत के नीचे खड़ा करें; गाड़ी में हों तो शीशों से दूर झुककर बैठें।
- पशुओं को छत वाली जगह में बाँधें।
- ऐसे बादलों के साथ बिजली भी गिरती है — पढ़ें बिजली से कैसे बचें।
बादलों से जुड़ी दूसरी चरम घटना: बादल फटना क्या है।
मुख्य बिंदु
- ओले ऊँचे क्यूम्युलोनिम्बस बादलों में बनते हैं।
- बादल में ऊपर-नीचे घूमते हुए ओलों पर बर्फ़ की परतें चढ़ती जाती हैं।
- बादल के ऊपरी हिस्से बहुत ठंडे होते हैं, इसलिए गर्मी में भी ओले गिरते हैं।
- सबसे भारी ओला (लगभग 1 किलो) 1986 में बांग्लादेश में गिरा।
- भारत में ओले रबी फ़सलों को सबसे ज़्यादा नुक़सान पहुँचाते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
गर्मी के मौसम में ओले क्यों गिरते हैं?
क्योंकि गरजने वाले ऊँचे बादलों के ऊपरी हिस्से में तापमान शून्य से बहुत नीचे होता है, भले ही ज़मीन पर गर्मी हो।
ओले किस बादल से गिरते हैं?
क्यूम्युलोनिम्बस (कपासी-वर्षी) बादलों से।
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स्रोत
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