ज्वालामुखी कैसे बनते हैं: प्रकार, बड़े विस्फोट और बैरन द्वीप
ज्वालामुखी कैसे बनते हैं: मैग्मा और लावा का अंतर, सक्रिय, सुप्त और मृत ज्वालामुखी, "रिंग ऑफ़ फ़ायर", इतिहास के बड़े विस्फोट और भारत का बैरन द्वीप।
रोहित टंडन · 21 अक्टूबर 2026 · 4 मिनट
धरती के भीतर से जब पिघली हुई चट्टान, गैसें और राख ज़ोर से बाहर निकलती हैं, तो उसे ज्वालामुखी विस्फोट कहते हैं। ज्वालामुखी डरावने हैं, लेकिन इन्होंने ही पृथ्वी पर नई ज़मीन, उपजाऊ मिट्टी और यहाँ तक कि वायुमंडल बनाने में भी बड़ी भूमिका निभाई है। यहाँ जानिए ज्वालामुखी कैसे बनते हैं, उनके प्रकार क्या हैं और भारत में कौन-सा ज्वालामुखी आज भी सक्रिय है।
मैग्मा और लावा में अंतर
पृथ्वी के भीतर, भूपर्पटी के नीचे, बहुत ज़्यादा गर्मी के कारण कुछ जगहों पर चट्टानें पिघल जाती हैं। ज़मीन के अंदर रहने वाली इस पिघली चट्टान को मैग्मा कहते हैं। मैग्मा आसपास की ठोस चट्टानों से हल्का होता है, इसलिए वह दरारों से ऊपर उठता है। जब यह सतह से बाहर आ जाता है, तो इसे लावा कहा जाता है। लावा का तापमान 700 से 1,200 डिग्री सेल्सियस तक हो सकता है।
ज्वालामुखी कहाँ बनते हैं?
पृथ्वी की ऊपरी परत कई बड़ी "प्लेटों" में बँटी है, जो बहुत धीरे-धीरे खिसकती रहती हैं। ज़्यादातर ज्वालामुखी इन्हीं प्लेटों की सीमाओं पर बनते हैं — जहाँ एक प्लेट दूसरी के नीचे धँसती है या जहाँ दो प्लेटें एक-दूसरे से दूर होती हैं। प्रशांत महासागर के किनारों पर ऐसे ज्वालामुखियों की इतनी लंबी पट्टी है कि उसे "रिंग ऑफ़ फ़ायर" (आग का घेरा) कहते हैं; दुनिया के लगभग 75% ज्वालामुखी इसी में हैं। कुछ ज्वालामुखी प्लेटों के बीच "हॉटस्पॉट" पर भी बनते हैं, जैसे अमेरिका के हवाई द्वीप।
ज्वालामुखी के प्रकार
| आधार | प्रकार | मतलब / उदाहरण |
|---|---|---|
| सक्रियता | सक्रिय | हाल में फटा हो या फटने की संभावना हो — जैसे इटली का एटना, भारत का बैरन द्वीप |
| सक्रियता | सुप्त | लंबे समय से शांत, पर फिर फट सकता है — जैसे भारत का नारकोंडम |
| सक्रियता | मृत (विलुप्त) | जिसके फिर फटने की संभावना नहीं मानी जाती |
| आकार | शील्ड | पतले लावा से बना, चौड़ा और ढलवाँ — जैसे हवाई का मौना लोआ |
| आकार | मिश्रित (स्ट्रैटो) | लावा और राख की परतों से बना ऊँचा शंकु — जैसे जापान का फ़ूजी |
भारत का अकेला सक्रिय ज्वालामुखी
भारत का एकमात्र सक्रिय ज्वालामुखी बैरन द्वीप है, जो अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह में पोर्ट ब्लेयर से लगभग 135 किलोमीटर उत्तर-पूर्व में है। "बैरन" का अर्थ है बंजर — द्वीप पर कोई इंसान नहीं रहता। यह 1991 के बाद कई बार फटा है। पास का नारकोंडम द्वीप एक सुप्त ज्वालामुखी है। करोड़ों साल पहले भारत में भी विशाल ज्वालामुखी विस्फोट हुए थे — लगभग 6.6 करोड़ साल पहले बहे लावा से महाराष्ट्र और आसपास का "दक्कन ट्रैप" बना, जहाँ आज कपास के लिए उपजाऊ काली मिट्टी मिलती है।
क्या आप जानते हैं? 1883 में इंडोनेशिया के क्राकाटोआ ज्वालामुखी के विस्फोट की आवाज़ लगभग 4,800 किलोमीटर दूर तक सुनी गई — इसे इतिहास में दर्ज सबसे तेज़ आवाज़ों में माना जाता है। 1815 में इंडोनेशिया के ही टैम्बोरा के विस्फोट से आसमान में इतनी राख फैली कि अगला साल, 1816, यूरोप और अमेरिका में "बिना गर्मी वाला साल" कहलाया।
इतिहास के कुछ बड़े विस्फोट
- वेसुवियस (79 ईस्वी): इटली के पोम्पेई शहर को राख में दफ़न कर दिया; खुदाई में पूरा शहर लगभग वैसा ही मिला।
- टैम्बोरा (1815): इतिहास में दर्ज सबसे शक्तिशाली विस्फोटों में।
- क्राकाटोआ (1883): विस्फोट और उससे उठी सुनामी में हज़ारों लोग मारे गए — पढ़ें इतिहास की सबसे बड़ी सुनामी।
- माउंट सेंट हेलेंस (1980): अमेरिका में; पहाड़ का एक पूरा हिस्सा उड़ गया।
ज्वालामुखी के फ़ायदे भी हैं
ज्वालामुखी की राख से बनी मिट्टी बहुत उपजाऊ होती है। आइसलैंड जैसे देश ज़मीन की गर्मी से बिजली और घरों के लिए गर्म पानी पाते हैं, जिसे "भू-तापीय ऊर्जा" कहते हैं। हवाई और आइसलैंड जैसे द्वीप ज्वालामुखियों से ही बने हैं। "वॉल्केनो" शब्द रोमन अग्नि-देवता "वल्कन" के नाम से आया है। सौरमंडल का सबसे ऊँचा ज्वालामुखी मंगल ग्रह का ओलंपस मॉन्स है — पढ़ें सौरमंडल के ग्रह।
मुख्य बिंदु
- ज़मीन के अंदर पिघली चट्टान मैग्मा और बाहर निकलने पर लावा कहलाती है।
- ज़्यादातर ज्वालामुखी टेक्टोनिक प्लेटों की सीमाओं पर बनते हैं।
- दुनिया के लगभग 75% ज्वालामुखी "रिंग ऑफ़ फ़ायर" में हैं।
- भारत का एकमात्र सक्रिय ज्वालामुखी अंडमान का बैरन द्वीप है।
- दक्कन ट्रैप प्राचीन ज्वालामुखी लावा से बना है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
भारत का एकमात्र सक्रिय ज्वालामुखी कौन-सा है?
अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह का बैरन द्वीप।
मैग्मा और लावा में क्या अंतर है?
ज़मीन के अंदर की पिघली चट्टान मैग्मा है; वही सतह पर बाहर आने पर लावा कहलाती है।
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स्रोत
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